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अचानक आयी बाढ़ से हजारों बीघा की सब्जी नष्ट

  • बेमौसम महानंदी नदी में बढ़ गया पानी

  • लॉक डाउन के बाद कर्जा ले की थी खेती

  • प्रशासन से अविलंब राहत की मांग की गयी

  • लॉक डाउन के बाद किसानों को बहुत बड़ी चोट

प्रतिनिधि

मालदाः अचानक आयी बाढ़ ने इलाके के हजारों किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इस

इलाके में इस मौसम में बाढ़ नहीं आती है। इसलिए लॉक डाउन के दौरान हुए नुकसान की

भरपायी के लिए किसानों ने भारी मात्रा में सब्जी की खेती कर ली थी। सभी को उम्मीद थी

कि सस्ते दर पर बिकने के बाद भी उन्हें कोरोना लॉक डाउन की वजह से जो आर्थिक

नुकसान हुआ है, उसकी कुछ तो भरपायी हो जाएगी। इस उम्मीद पर भी बाढ़ कहर बनकर

टूट पड़ा है। साहापुर ग्राम पंचायत के चरकादिपुर इलाके में किसानों के सर पर हाथ है। वे

समझ नहीं पा रहे हैं कि इस दूसरे नुकसान की भरपायी वे कैसे करें। इस मौसम में कभी

बाढ़ नहीं आता था। अचानक आयी बाढ़ की वजह से हजारों बीघा में लगी उनकी फसल

पानी में डूबी हुई है। इससे वे सड़ रहे हैं और किसानों को उसकी लागत भी वसूल होने की

कोई उम्मीद नहीं है।

इस इलाके में अभी रोजगार का एकमात्र साधन खेती ही है। इसी वजह से कोरोना ल़क

डाउन के नुकसान की भरपायी करने के लिए किसानों ने पूरी मेहनत की थी। इस पूरी

मेहनत पर पानी फेर दिया है इस बेमौसम की बाढ़ ने। किसानों और उनके पूरे परिवार के

लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि उनकी रोजी रोटी इसी खेती पर पूरी तरह निर्भर है।

किसानों ने इस संकट से निपटने के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है। उनका

कहना है कि अब कहीं से मदद नहीं मिली तो उन्हें भूखे मरना पड़ेगा।

अचानक आयी बाढ़ से हैरान से पुराने किसान भी

इस मामले में मालदा के प्रखंड कृषि पदाधिकारी डॉ शैफूल इस्लाम ने कहा कि अचानक से

महानंदा नदी में पानी बढ़ जाने की वजह से अनेक वैसे इलाकों में पानी चला गया है जहां

सब्जी की खेती हुई थी। खेतों में यह फसल लगभग तैयार होने की स्थिति में थी और इस

फसल को हटाने के बाद ही किसान धान की खेती की तैयारियां करते। अब सब्जी के इस

व्यापक नुकसान के बारे में उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।

पानी में डूबने वाली सब्जियों में हरी सब्जियों के अलावा मकई की भी खेती थी। गांव के

एक तरफ से बहने वाली महानंदा नदी में सामान्य जल प्रवाह होने की वजह से यहां सब्जी

की खेती भी अच्छी हो जाती है। यह अजीब वाकया है जबकि नदी में पानी अचानक बढ़

गया और सारी खेती उसमें डूब गयी है। इन किसानों की परेशानी यह है कि लॉक डाउन के

बाद किसी तरह समस्या से उबरने के लिए अनेक लोगों ने कर्ज भी ले रखा है।

किसानों से किसी तरह कर्ज लेकर की थी खेती

वहां के किसान फागु मंडल ने कहा कि उन्होंने अपने 77 साल के जीवन में कभी इस

मौसम में महानंदा नदी में बाढ़ आते नहीं देखा था। बड़ी मुश्किल से महाजन से कर्ज लेकर

खेती की थी अब इस बाढ़ में सारी फसल ही चौपट हो चुकी है। वहां की महिला कृषक

जयंती मंडल ने कहा कि इलाके के अधिकांश परिवारों का रोजगार खेती ही है। मालदा

इलाके में ताजा सब्जी की मांग से इलाके के लोगों को अच्छी आमदनी होती थी। इस बार

अचानक ही सब कुछ उल्टा पुल्टा हो गया है। अब लॉक डाउन के नुकसान के बाद इस

नुकसान की भरपाई कैसे होगी, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। इलाके के पंचायत सदस्य

सुभाष मंडल ने कहा कि पूरा इलाका ही कृषि प्रधान क्षेत्र है। अब अचानक ऐसा कुछ हुआ

है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सारी सब्जी पानी में डूबने की वजह से सड़ चुकी

है। इसलिए प्रशासन को इन किसानों की मदद के लिए त्वरित कार्रवाई करनी ही चाहिए।


 

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