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फिर अशांत क्षेत्र घोषित हुए नागालैंड सहित पूर्वोत्तर के पांच राज्य

  • सरकारी कर्मचारियों से पूछा गया विद्रोहियों के रिश्ता

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः फिर अशांत क्षेत्र घोषित हुआ है नागालैंड सहित पूर्वोत्तर के पांच राज्य। केंद्रीय

गृह मंत्रालय का इस निर्णय के बाद नागालैंड सरकार ने अपने कर्मचारियों को यह बताने

का आदेश दिया है कि क्या उनका कोई रिश्तेदार विद्रोहियों का हिस्सा है या नहीं।

दरअसल नागालैंड सहित 5 पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवादी गतिविधियां चरम पर है। एक

बयान में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार सीमा पार से आतंकवाद के खिलाफ

कार्रवाई करने और पूर्वोत्तर में उग्रवाद खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। 2018 में बीजेपी के

नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पहले अरुणाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय,

मिजोरम और नागालैंड सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में लागू किया था। अब केंद्र सरकार ने

फिर 30 जून, 2020 से अगले छह महीने के लिए यानी दिसंबर तक पूरे नगालैंड को ‘अशांत

क्षेत्र’ घोषित किया था। अब भारत के गृह मामलों के मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि यह

नागालैंड सहित चार उत्तर पूर्वी राज्य में इस अधिनियम को बढ़ाया जाएगा। वहीं

अरूणाचल प्रदेश के असम सीमा से लगे 8 थाना क्षेत्रों तथा म्यांमार सीमा से लगे 3 थाना

क्षेत्रों तक सीमित कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में

अरुणाचल प्रदेश में 16 अफस्पा पुलिस स्टेशन थे, जो अब घटकर सिर्फ 8 रहे गए हैं।यह

उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम, 1958 भारत की

संसद का एक कार्य है जो भारतीय सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार प्रदान करता है ताकि

अशांत क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति हो।

फिर अशांत क्षेत्र घोषित करने में कुछ ढिलाई भी दी गी

एक अन्य निर्णय में गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर में विद्रोहियों के लिये आत्मसमर्पण-सह-

पुनर्वास नीति के तहत 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 4 लाख रुपए तक सहायता राशि कर दी है।

सरकार की यह नई पॉलिसी 1 अप्रैल, 2020 से लागू होगी। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा

मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैंड जाने वाले विदेशियों के लिये प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट और

संरक्षित क्षेत्र परमिट में भी थोड़ी ढिलाई बरती गई है। हालाँकि, पाकिस्तान, चीन और

अफगानिस्तान जैसे देशों से आने वाले यात्रियों के लिये अभी इस क्षेत्र में प्रतिबंध जारी

रहेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा किए गए इस निर्णय के बाद, नागालैंड सरकार ने अपने

कर्मचारियों को यह बताने का आदेश दिया है कि क्या उनका कोई रिश्तेदार विद्रोहियों का

हिस्सा है। एक अभूतपूर्व कदम में, नागालैंड सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी

सरकारी कर्मचारियों को स्व-घोषणा करने के लिए कहा है कि क्या उनके परिवार के

सदस्य या रिश्तेदार राज्य में भूमिगत सशस्त्र विद्रोही समूहों में से किसी के सदस्य हैं।

एक परिपत्र जारी करते हुए, राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को यह घोषणा 7

अगस्त तक गृह विभाग को सौंपने के लिए कहा है।


 

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