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पहली बार नीतीश कुमार के राज में तबादलों पर सवाल उठ गये

  • खास लॉबी के प्रभावी होने का लग रहा है आरोप

  • राबड़ी देवी के कार्यकाल में भी ऐसा हुआ था

  • एक खास जाति वर्ग के प्रभुत्व का सवाल उठा

  • कई किस्म की राजनीति भी मथ रही बिहार को

दीपक नौरंगी

भागलपुरः पहली बार राज्य में ऐसा हुआ है कि मुख्यमंत्री के दो प्रधान सचिव बनाए गए

हैं। हालांकि नियमानुसार यह सही है। तत्कालीन सरकार राबड़ी देवी के कार्यकाल 2001-

02 में उस समय के रिटायर्ड मुख्य सचिव मुकुंद प्रसाद को सरकार का प्रधान सचिव

बनाया गया था। वह राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद के बेहद करीबी माने जाते थे। इस वजह से

राबड़ी देवी के शासन तंत्र को बेहतर तरीके से चलाने के लिए मुकुंद प्रसाद पर भरोसा किया

गया था। लेकिन उस समय भी सीएम के एक ही प्रधान सचिव हुआ करते थे। ऐसा पहली

बार देखा गया है कि बिहार के मुख्यमंत्री के दो प्रधान सचिव है।

वीडियो में समझिये क्यों उठ गया है विवाद

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन में उनके प्रधान सचिव चंचल कुमार का

बोलबाला काफी दिख रहा है। चंचल कुमार से जुड़े हुए कायस्थ समाज के अधिकारियों की

एक बड़ी लॉबी पूरे प्रशासनिक तंत्र पर हावी है। इस लॉबी से जुड़े सभी कायस्थ आईएएस

अफसर तमाम प्रमुख पदों पर काबिज है। उदाहरण स्वरूप मुख्यमंत्री के दोनों प्रधान

सचिव दीपक कुमार और चंचल कुमार एक ही जाति के हैं। गृह विभाग के प्रधान सचिव

चेतन प्रसाद उसी समाज से हैं। इसके अलावा चंचल कुमार के पास समान प्रशासन विभाग

का भी अतिरिक्त प्रभार है। चर्चित आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत स्वास्थ्य विभाग के

प्रधान सचिव है। आनंद किशोर नगर विकास और आवास विभाग के प्रधान सचिव है।

पहली बार इस किस्म का विवाद नीतीश शासन में हो रहा है

आनंद किशोर के पास बिहार बोर्ड का अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार है। जितेंद्र कुमार

श्रीवास्तव भी एक प्रमुख विभाग के सचिव बने हुए हैं। राज्य के अधिकतर प्रमुख विभागों

के मुखिया एक ही समाज के अधिकारी हैं। ये सभी चंचल कुमार की लॉबी के ही माने जाते

हैं। हाल में आईएएस अधिकारियों की हुई ट्रांसफर पोस्टिंग यह बात साफ साफ दिखती है

आईएएस अधिकारी चंचल कुमार का पूरे शासन तंत्र पर बोलबाला है ।

ऐसी स्थिति के उत्पन्न होने के बाद पहली बार नीतीश कुमार की सरकार पर एक खास

जाति के लॉबी के धीरे धीरे ताकतवार होने से दूसरे किस्म की समस्याएं अंदर ही अंदर

जन्म लेने लगी हैं। वर्तमान में बिहार की राजनीति बहुत उथल पुथल की अवस्था में है।

वैसे विरोधी पक्ष के भी पहले के मुकाबले अधिक ताकतवर होने तथा जदयू और भाजपा के

बीच लव एंड हेट की स्थिति से भी राज्य की ब्यूरोक्रेसी को पहली बार इस किस्म की

परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें राजनीतिक समीकरण को देखते समझते

हुए सोच समझकर फैसले लेने पड़ रहे हैं।

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