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महाकाश की सौर आंधियों के नये तथ्यों का पहली बार खुलासा हुआ

  • नासा के पार्कर सोलर प्रोव ने खुलासा किया नई जानकारी की
  • अंतरिक्ष में धूल रहित इलाका भी पाया गया
  • सूर्य का प्रभाव भी है सौर आंधियों पर पड़ता है
  • अशांत समुद्र के विशाल लहरों के जैसी स्थिति
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः महाकाश की सौर आंधियों की नई जानकारी का खुलासा
हुआ है। नासा द्वारा सूर्य की जांच के लिए भेजे गये पार्कर सोलर प्रोब
के और करीब  पहुंचने से इन नये तथ्यों की जानकारी मिली है।

इसमें से सबसे प्रमुख बात अंतरिक्ष में धूलकण शून्य इलाका का पाया
जाना है। आम तौर पर सौर आंधियों की वजह से अंतरिक्ष में ऐसे
स्थानों के पाये  जाने की कोई उम्मीद पहले नहीं की गयी थी।

नासा का यह अंतरिक्ष यान चक्कर काटता हुआ धीरे धीरे सूर्य के करीब
पहुंच  रहा है। अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे सूर्य के प्रति पूर्व की
वैज्ञानिक  परिकल्पना में संशोधन की उम्मीद जतायी जा रही है।

इस यान के और आगे बढ़ने के बाद वहां सौर आंधी का पता चला है कि
जिसके बार में अंदाजा होने के बाद भी उसके बेहतर आंकड़े वैज्ञानिकों
के पास पहले उपलब्ध नहीं थे।

इस यान को पिछले वर्ष इसी सूर्य की खोज के लिए रवाना किया गया
था। वह सूर्य की परिधि में चक्कर काटता हुआ एक खास दूरी तक
जायेगा। वहां से सारे तथ्यों की जांच और वैज्ञानिक आंकड़ा एकत्रित
कर लेने के बाद इस यान को फिर से वापस लौट आना है।

अब तक यह यान सही तरीके से काम कर रहा है। इसके तहत नासा के
नियंत्रण कक्ष को नियमित तौर पर आंकड़े भी भेज रहा है। इस यान के
आगे बढ़ने की वजह से अंतरिक्ष में सूर्य की वजह से क्या कुछ प्रभाव
पड़ता है, इसके बारे में भी खगोल वैज्ञानिकों को नई नई जानकारी
मिल रही है।

महाकाश की अन्य गतिविधियों पर भी नजर रख रहा है प्रोब

पार्कर सोलर प्रोब के बारे में नई जानकारी का खुलासा सार्वजनिक तौर पर एक वैज्ञानिक पत्रिका में किया गया है।

इसमें अब तक के आंकड़ों और उनके विश्लेषणों का खुलासा किया
गया है। अंतरिक्ष में इस किस्म की परिस्थितियों का खुलासा होने की
वजह से सौर मंडल के ढांचों का विश्लेषण करने में वैज्ञानिकों को मदद
मिलेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

सौर आंधियों के बारे में जानकारी इसलिए भी हासिल की जा रही है
ताकि भविष्य में सौर आंधियों के पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर आने की
स्थिति में उत्पन्न होने वाले खतरों के बारे में जानकारी मिल सके।

इस किस्म की आंधियों का असर पृथ्वी के अंदर अथवा सैटेलाइटों तक
पहुंचने की स्थिति में पूरी दुनिया की सैटेलाइट लिंक सहित दूरसंचार
सेवाओं पर इसके भयानक प्रभाव पड़ने की आशंका पहले से ही व्यक्त
की जा रही है।

वैज्ञानिक पहले ही यह बता चुके हैं कि यदि ऐसी कोई परिस्थिति
उत्पन्न हुई तो पृथ्वी पर उड़ने वाले विमानों के परिचालन पर भी
इसका कुप्रभाव पड़ेगा क्योंकि सौर आंधी की वजह से हवाई जहाज
उड़ते हुए अपना दिशा तय नहीं कर पायेंगे। ऐसे में उनके भटक जाने
अथवा दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

प्रकाशित शोध प्रबंध में बताया गया है कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी करीब
93 मिलियन मील है। इसमें से पार्कर सोलर प्रोबव ने करीब 15
मिलियन मील की दूरी तय की है। अपने अभियान के तहत इस यान
को सूर्य के करीब चार मिलियन मील की दूरी तक पहुंचना है। वहां से
आंकड़ा एकत्रित करने के बाद वह पृथ्वी पर वापस लौट आयेगा।

पार्कर सोलर प्रोब ने भी खोजा था सूर्य पर प्लाज्मा किरणों की बारिश

इसी यान में लगे कैमरों की वजह से सूर्य की धरती पर प्लाज्मा किरणों की बारिश का नजारा पहली बार देखा जा सकता है।

यह घटना सूर्य की ठीक बीच, जिसे कॉरोना कहा जाता है, वहां देखी
गयी है। इसके तहत प्लाज्मा किरणों की उछाल आसमान पर कई
लाख मील तक जा रही है। वहां से यह प्लाज्मा किरणें वापस सूर्य पर
बारिश की तरह बरस रही हैं। वैसे इसे देखने के बाद भी अब तक
वैज्ञानिक इस प्लाज्मा किरणों की बारिश के होने के कारणों का
खुलासा नहीं कर पाये हैं।

इस अंतरिक्ष यान में लगे उपकरणों ने वहां अचानक से उत्पन्न होने
वाली भीषण लपटों का आंकड़ा भी दर्ज किया है। महाकाश की यह
लपटें इतनी भयानक हैं कि कई बार इनकी वजह से वहां पूरा चुंबकीय
क्षेत्र ही बदल जाता है।

इसकी स्थिति का खुलासा करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह
स्थिति लगभग अशांत समुद्र में उठती विशाल लहरों के जैसी ही है।

फर्क सिर्फ यह है कि इस किस्म की सौर लपटों के साथ जबर्दस्त ऊर्जा
भी अंतरिक्ष में बिखर जाती है। इसकी वजह से सौर ऊर्जा की वजह से
सौर आंधियों का असर बढ़ता चला जाता है।

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