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दो देशों इटली और क्रोशिया के बीच प्रोसेक्को नाम को लेकर झगड़ा




प्रोसेक्कोः दो देशों के बीच एक नाम को लेकर विवाद है। यह दरअसल प्रोसेक्को नाम है,




जिसे लेकर इटली और क्रोशिया आपस में झगड़ रहे हैं। दरअसल जानकार मानते हैं कि

यह सिर्फ दो देशों के बीच नाम का ही विवाद भर नहीं है। दरअसल यहां की वाइन के

कारोबार की वजह से दो देश इस प्रोसेक्को वाइन को लेकर झगड़ रहे हैं। इस प्रोसेक्को नाम

से दोनों ही देशों में वाइन बनायी जा रही है। इटली के वाइन उत्पादक इस नाम को अपने

लिए रखना चाहते हैं जबकि क्रोशिया के वाइन निर्माता भी इसका उपयोग कर रहे हैं। दो

देशों का विवाद सामने आने के बाद वहां के वाइन बनाने का इतिहास पर भी लोगों का

ध्यान गया है। दरअसल प्रोसेक्को में वाइन बनाने का इतिहास करीब तीन सौ वर्ष पुराना

है। इस इलाके में तब से अंगूर उगाकर वाइन बनाने का काम चल पड़ा था, जो धीरे धीरे

विश्व में प्रसिद्ध होता चला गया है। अब ख्याति फैल जाने की वजह से यहां के नाम को

लेकर दो देशों के बीच यह विवाद उभरा है। यहां के वाइन का बाजार करीब 75 विलियन

यूरो यानी 87 बिलियन डॉलर का है।




दो देशों का असली झगड़ा वाइन के कारोबार को लेकर

अब इतने बड़े बाजार के नाम को लेकर इटला का दावा है किसी दूसरे की तरफ से इस

प्रोसेक्को नाम का प्रयोग गलत है जबकि क्रोशिया उसके दावों का खंडन करता है। यह

दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई देशों के खास उत्पाद ही विश्वप्रसिद्ध हो चुके हैं।

मसलन इटली के खास चीज के अलावा फ्रांस के शैम्पेन की ख्याति दुनियाभर में है।

इसलिए यह कारोबारी लाभ ही दो देशों के बीच झगड़े का कारण बना हुआ है। इटली के

वाइन कारोबारी यह मानते हैं कि नाम से उपभोक्ता में गलतफहमी होना स्वाभाविक है

क्योंकि यहां प्रोसेक्को नाम से उत्पादित वाइन का अधिकांश दूसरे देशों में ही निर्यात होता

है। दूसरी तरफ क्रोशिया की तरफ से यूरोपियन संसद में प्रतिनिधि लाडिस्लाव इलिकिक

कहते हैं कि उपभोक्ता को इसकी कोई चिंता नहीं होता है, उसे किसी भी उत्पाद की

गुणवत्ता को देखकर परखना आता है। इसलिए कई पीढ़ियों से चल रहे कारोबार को इटली

के एकाधिकार में नहीं सौंपा जा सकता है क्योंकि उसके अपने लोग भी काफी समय से इस

कारोबार से जुड़े हुए हैं और नाम से उसके उत्पादन की भी वैश्विक ख्याति है।



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