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एफबीआई द्वारा जारी कर दस्तावेजों में सऊदी अरब की भूमिका का पता चला




  • अमेरिका में हुए आतंकी हमले का रिश्ता था

  • दस्तावेजों में सऊदी संपर्क का खुलासा हो गया

  • पूर्व में इन मामलों पर लगातार पर्दा डाला गया

  • पिगासूस जासूसी का मामला पहली बार पकड़ाया

वाशिंगटनः एफबीआई द्वारा जारी किये गये गोपनीय दस्तावेजों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि अमेरिका के ट्विन टावर पर हुए आतंकी विमान हमलों मे सऊदी अरब की भी भूमिका रही है।




राष्ट्रपति जो बिडेन के निर्देश पर एफबीआई ने इन गोपनीय रक्षा दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है। वैसे इन दस्तावेजों को जनता के लिए उपलब्ध कराते वक्त अनेक स्थानों पऱ उन्हें काली स्याही से छिपाया भी गया है ताकि वहां क्या कुछ लिखा है, उसकी जानकारी दूसरों को नहीं हो सके।

अमेरिका के ट्विन टावर पर हुए दोहरे विमान हमले के बीस वर्ष बाद यह दस्तावेज जारी किये गये हैं। शनिवार की रात (भारतीय समय में रविवार की सुबह) जारी दस्तावेजों में कई स्थानों पर आतंकी हमले में सऊदी अरब की भूमिका के साफ संकेत मिल रहे हैं।

ऐसा पहले से ही आरोप लगता आ रहा है कि विमानों का अपहरण कर आतंकवादी हमला करने वालों को सऊदी अरब ने मदद पहुंचायी ती। अब जो दस्तावेज जनता के समक्ष लाये गये हैं, उससे भी इस आरोप की पुष्टि हो जाती है।

गोपनीय दस्तावेज के मुताबिक विमान हमले में शामिल दो लोगों को अमेरिका में रहने वाले दो सऊदी लोगों की मदद मिलने का पता चला है। यह तो पहले से ही पता चल चुका था कि विमान अपहरण करने वाले 19 लोगों में से 15 लोग सऊदी अरब के ही नागरिक थे।

इन विमान हमलों में तीन हजार से अधिक लोग मारे गये थे। इस आतंकी हमले के बाद आतंकवादी संगठनों के प्रति अमेरिका के साथ साथ दुनिया के अन्य देशों के नजरिया भी बदल गया था। भारत द्वारा आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल उठाने की घटनाओं को उसके बाद से ही वैश्विक समर्थन मिलना प्रारंभ हुआ था।

एफबीआई द्वारा जारी दस्तावेजों में लोगों का भी खुलासा

बाद में ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मार गिराने के बाद यह और भी स्पष्ट हो गया था कि पाकिस्तान भी आतंकवादियों को शरण देता है। ट्विन टावर पर हुए विमान हमले में हजारों लोगों के मारे जाने के बाद अमेरिकी गुप्तचर संस्थाओँ ने पहली बार इस बारे में अधिक ध्यान देना प्रारंभ किया था।

एफबीआई ने जो दस्तावेज जारी किये हैं, उससे पूर्व के आरोपों की पुष्टि हो रही है। आरोप है कि विमान अपहरण में शामिल दो लोगों को अमेरिका में चलने वाले सऊदी दूतावास के एक अधिकारी के अलावा सऊदी अरब के एक जासूस का समर्थन प्राप्त था।




एफबीआई के मुताबिक विमान हमले में शामिल लोगों ने छात्र के भेष में अमेरिका में प्रवेश लिया था। उन्हें उमर अल बायोमी से पूरी मदद मिली थी। वह इन दोनो के दुभाषिया के अलावा उनके रहने और आर्थिक मददगार थे।

यही उमर अल बायोमी सऊदी दूतावास नियमित जाया करता था, जहां उसकी बहुत अच्छी पहचान थी। आतंकी हमले के कुछ सप्ताह पूर्व बायोमी और खुनाइरी अमेरिका छोड़कर चले गये थे।

पहले से ही सऊदी अरब पर आतंकियों की मदद के आरोप लगे थे

एफबीआई के दस्तावेजों में इसका खुलासा होने के काफी पहले से इन आतंकी हमलों में मारे गये लोगों के परिजन यह आरोप लगा रहे थे कि इन घटनाओँ में सऊदी अरब के शामिल होने के बाद भी अमेरिका ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

अब दस्तावेज जारी होन के तुरंत बाद सऊदी अरब दूतावास ने इस खुलासा का स्वागत किया है। साथ ही दूतावास की तरफ से तुरंत यह सफाई भी दी गयी है कि इन आतंकी घटनाओँ के साथ सऊदी अरब सरकार का कोई लेना देना नहीं रहा है।

दूसरी तरफ हमले में मारे गये और घायलों के वकील मैलोनी ने दावा किया है कि अब दस्तावेजो के सार्वजनिक होने के बाद वे यह साबित कर देंगे कि सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ अल कायदा के लोगों का रिश्ता रहा है क्योंकि इस बारे में पहले से भी कई सूचनाएं सार्वजनिक हो चुकी हैं।

वैसे अमेरिका के लिए काम करने वाले सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खगोशी की हत्या के बाद से ही अमेरिका में सऊदी अरब के खिलाफ माहौल बनने लगा था। तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पहले इस हत्या के लिए सऊदी युवराज को जिम्मेदार ठहराने के बाद बाद में पीछे हट गये थे।

वैसे तुर्की दूतावास की इसी हत्या की घटना ने इजरायली जासूसी स्पाईवेयर पिगासूस की भूमिका पर पहली बार सवाल भी खड़े कर दिये थे। जिसके बाद दुनिया भर में जासूसी के नये खुलासा होते चले गये हैं।



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