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किसान संगठनों ने सरकार का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, कहा

  • तीनों कानून वापस ले केंद्र सरकार

  • सरकार पर नहीं है अनेक नेताओं को भरोसा

  • राकेश टिकैत ने कहा ट्रैक्टर परेड रोका तो भुगतेंगे

  • देश के किसानों को तिरंगा लेकर जाने से कौन रोकेगा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसान संगठनों ने सरकार का प्रस्ताव नामंजूर करते हुए अपना आंदोलन

जारी रखने की बात कही है। इसका एलान कल रात ही हो गया था। केंद्र सरकार ने अगले

डेढ़ वर्षों तक इन कानूनों को स्थगित करने के साथ साथ हर मुद्दे पर विचार करने का

प्रस्ताव किसान यूनियन के नेताओं को दिया था। सरकार के इस प्रस्ताव पर किसान

यूनियन के नेताओं ने कहा था कि वे अपने सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर इस पर

फैसला लेंगे और सरकार को उसकी जानकारी देंगे। कल रात ही सभी आंदोलनकारी

संगठनों ने अपनी तरफ से सरकार के प्रस्ताव को खारिज करते हुए तीनों कृषि कानूनों को

वापस लेने की मांग दोहरायी। इसके साथ आज सुबह से ही ट्रैक्टर परेड की तैयारियों को

अंतिम रुप प्रदान किया गया। दिल्ली पुलिस द्वारा इस ट्रैक्टर परेड को रोके जाने के

सवाल पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अभी की योजना तो दिल्ली के चारों तरफ

यह ट्रैक्टर परेड करने के बाद आंदोलनकारियों के वापस लौट जाने का ही है। इस बीच पूरी

परेड तिरंगे के साथ होगी और शत प्रतिशत शांतिपूर्ण रहेगी। आज सुबह राकेश टिकैत ने

एक सवाल के उत्तर में कहा कि उनके ट्रैक्टर परेड की योजना में कोई तब्दीली नहीं हुई है।

लेकिन अंदरखाने से कई किस्म की सूचनाएं आ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर

दिल्ली की परिधि में होने वाले इस परेड को दिल्ली पुलिस ने कहीं भी रोका तो फिर जहां

पर उसे रोका जाएगा, वहीं पर आंदोलन स्थापित हो जाएगा। इसलिए पुलिस या कोई और

देश के किसानों को हल्के में लेने की गलती नहीं करे। इसके पहले भी किसान संसद तक

अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। इस बार तो किसानों के जीवन मरण का सवाल है

किसान संगठनों में कुछ लोग सरकार पर भरोसा करने के पक्ष में

वैसे अंदरखाने से इस बात की भी सूचना मिल रही है कि कुछ किसान संगठन केंद्र सरकार

के इस वादे पर भरोसा करना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि अगर वाकई सरकार बात चीत से

समस्या का समाधान करना चाहती है तो सरकार को मौका मिलना चाहिए। दूसरी तरफ

अन्य संगठनों को सरकार के प्रस्ताव पर भरोसा ही नहीं है। वे मानते हैं कि सिर्फ

आंदोलनकारियों को हटाने के लिए सरकार की तरफ से यह चाल चली गयी है। इसीलिए

सम्मिलित तौर पर आंदोलनकारियों के शीर्ष संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से

यह बयान जारी किया गया है कि इस आंदोलन में जान गंवाने वाले 143 किसानों की

शहादत को वह बेकार नहीं जाने देंगे। यह प्रस्ताव असहमति के बाद भी सर्वसम्मति से ही

पारित किया गया है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने आज अपनी तरफ से

आठ राज्यो के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से

बैठक की और उनकी राय जानी।

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