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किसान का बेटा सपना भी नहीं देखता आईएएस बनने का

  • रोहतास के जिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार से खास बात-चीत के रोचक मुद्दे

  • पिता के सान्निध्य में ही जीवन को समझने का मौका मिला

  • रोहतास में भी अपने पिता के साथ ही रहते हैं धर्मेंद्र कुमार

  • आईएएस की तैयारी रणनीति बनाकर प्रेरणा के साथ हो

  • हर फैसला समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर

रोहतासः किसान का बेटा आईएसए बनना तो दूर उसका सपना भी नहीं देख सकता है।

यह तो दादाजी की बातों से मन के अंदर उपजी जिद थी कि जिसे सबसे कठिन कहा जाता

है, उसे ही पार कर जाना है।

जिन्होंने पूर्व में वीडियो नहीं देखा हैं उनके लिए फिर से लिंक

रोहतास के डीएम धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि उनके पिता एक सामान्य किसान थे। लेकिन

वह इस बात के लिए अपने पिता के आभारी हैं कि किसान होने के बाद भी उन्होंने अपने

दोनों पुत्रों यानी किसान का बेटा को हमेशा खेती से अलग रखते हुए पढ़ाई में ध्यान लगाने

को कहा। गांव में रहने की वजह से खेतों से सीधा रिश्ता को बचपन से बना हुआ था लेकिन

धर्मेंद्र मानते है कि खेतों में पले बढ़े होने के बाद भी पिता ने कभी कृषि के करीब उन्हें नहीं

आने दिया। जब कभी भी ऐसी नौबत आती तो वह अपने दोनों पुत्रों को सिर्फ अपनी पढ़ाई

की तरफ ध्यान देने की बात कहकर खेती से अलग कर दिया करते थे। अपनी मां के बारे

में उन्होंने कहा कि उनके लिए उनकी मां सौम्य लेकिन दृढ़ता के साथ अपनी बात रखने

की रोल मॉडल है। वह पहले भी पूजा पाठ में व्यस्त रहने वाली महिला थी और आज भी

उनकी दिनचर्या में पूजा पाठ है। लेकिन वह मानते हैं कि उन्होंने अपनी मां से सहनशीलता

सीखी है। धर्मेंद्र मानते हैं कि अगर उनमें अपनी मां के जितनी सहनशीलता आ जाए तो

वह और भी सफल हो सकते हैं। अपनी सफलता का श्रेय धर्मेंद्र अपने माता पिता को देते

हुए यह बताने से नहीं चूकते कि हर व्यक्ति का विकास उसके माता पिता की वजह से ही

संभव हो पाता है। इसलिए आज भी वह मानते हैं कि वह जो कुछ भी हैं, सिर्फ अपने माता

पिता की वजह से ही हैं।

किसान का बेटा पर पिता ने पढ़ाई पर ध्यान दिलाया

उनकी बातों से जीवन दर्शन के इस मर्म को गांठ बांध लेना चाहिए कि रोहतास में भी वह

यही मानते हैं कि वह अपने माता पिता के साथ रहते हैं। इस वाक्य की गहराई को

समझाने का मकसद जीवन के नजरिए को और बेहतर बनाना ही है ताकि दूसरों को इससे

प्रेरणा मिल सके।

आईएएस बनने की चाह रखने वालों के लिए धर्मेंद्र कुमार ने साफ साफ कहा कि सबसे

पहले तो इस बात को दिमाग से निकला देना होगा कि यह परीक्षा बहुत ही कठिन है। जब

उनके जैसा किसान का बेटा यह परीक्षा पास कर सकता है तो यह माना जाना चाहिए यह

कोई हिमालय सी चुनौती नहीं है।  उसके बाद सही रणनीति बनाकर अगर इस परीक्षा की

तैयारी की जाए तो सफलता अवश्य हासिल होगी। उसके लिए यह भी जरूरी है कि आपके

अंदर से इस लक्ष्य को प्राप्त करने की कोई प्रेरणा भी हो। बतौर जिलाधिकारी उन्होंने एक

नियम बना रखा है कि वह किसी के व्यक्तिगत कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। इस पर उन्होंने

स्पष्ट किया कि जब आप किसी एक ऐसे कार्यक्रम में जाते हैं तो दूसरे कार्यक्रमों में भी

आपको निमंत्रण मिलता है। ऐसे सार्वजनिक समारोह में आप ऐसे लोगों से भी मिलते

जुलते हैं, जिनके बारे में आपको कोई जानकारी नहीं मिलती। ऐसी मुलाकातों से कई बार

बाद में परेशानी खड़ी हो जाती है। इसी वजह से उन्होंने यह नियम बना रखा है कि वह

सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों में ही भाग लेंगे। इसका दूसरा फायदा यह होता है कि सरकारी

काम काज निपटाने और आम जनता से मिलने के लिए अधिक समय उपलब्ध हो जाता

है। इससे आम जनता को फायदा होता है।

निजी तौर पर किसी के निजी कार्यक्रम में नहीं जाता हूं

सरकार के काम काज के तौर तरीकों पर विस्तार से हुई चर्चा के दौरान उन्होंने एक गंभीर

बात यह कही है हर फैसला इस बात को ध्यान मे रखकर लिया जाना चाहिए कि समाज के

सबसे अंतिम व्यक्ति पर इस फैसले का क्या प्रभाव पड़ेगा। इसी बात-चीत के तहत

उन्होंने जिला की योजनाओं के साथ साथ इलाके के औद्योगिक विकास और डालमिया

कारखाने की कानूनी स्थिति पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से

इस बात के लिए प्रयास किया जा रहा है कि यहां बंजारी सीमेंट कारखाना का विस्तार कैसे

हो। उस कारखाना को चूना पत्थर की कमी है, उसे दूर करने के लिए भी जिला प्रशासन की

तरफ से काम हो रहा है। (समाप्त)

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