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ओल की खेती से किसानों की बढ़ रही आमदनी

पसूका

रांचीः ओल की खेती भी अब झारखंड के किसानों को फायदा पहुंचा रही है। इन दिनों

राजधानी रांची के आस-पास के गांवों में ओल की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। ओल

एक नगदी फसल है, और इसकी खेती कर किसान ना सिर्फ अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे

हैं बल्कि इससे उनके आत्मविश्वास में भी गजब का इजाफा हुआ है। रातू प्रखंड के किसान

श्रवण कुमार अपने ओल की तैयार फसल को मंडी में भेजते हैं। पिछले पांच सालों से ओल

उत्पादन से जुड़े श्रवण कुमार इसके जरिए आर्थिक सशक्त हो रहे हैं। वो बताते हैं कि कई

राज्यों के व्यापारी सीधे खेत से ही उनके उत्पाद खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें बाजार की

परेशानी नहीं होती और इस मुश्किल वक्त में भी उनको अच्छी आमदनी हो रही है। रांची

के रातू इलाके में श्रणव जैसे सैकड़ों किसान ओल के साथ-साथ अन्य सब्जियों की भी खूब

खेती करते हैं। किसान पारंपरिक खेती के साथ साथ इस तरह के नकदी फसलों से जुड़कर

अपनी आमदनी बढ़ाने में जुटे हैं। खास बात यह है कि क्षेत्र की महिलाएं भी खेती-किसानी

में काफी बढ़ चढ़कर अपना योगदान देती हैं। इससे परिवार की आमदनी भी दोगुनी हो

जाती है। ओल की सफाई में जुटी इन महिलाओं को लगता है कि ये खराब होने वाली

फसल नहीं है और आज ओल ही क्षेत्र के किसानों को जिंदा रख रहा है। सैकड़ों एकड़ में

लहलहाती ये फसले इलाके में किसानों की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने का काम कर

रही है।

ओल की खेती के अलावा भी कृषि बना है सहारा

कोरोना काल में झारखंड के अधिकांश इलाकों के किसानों ने सरकारी योजनाओं का लाभ

उठाते हुए अपनी कृषि क्षमताओं का विकास किया है। इसके त्वरित परिणाम भी मिले हैं।

नकदी फसल की खेती से उनके परिवार को इस संकट के काल में भी जबर्दस्त सहारा

मिला है। इससे अनेक परिवारों में खुशहाली भी आयी है। कोरोना काल ने इन किसानों को

ऑन लाइन कारोबार का गुर भी सिखाया है। जिससे उन्हें लाभ भी हुआ है।


 

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