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किसानों का भारत बंद आज कई राज्यों में होगा असर




राजनीतिक दलों से लेकर श्रमिक संगठनों ने किया है बंद का समर्थन
कांग्रेस और राजद सहित कई दलों का समर्थन
कई बड़े श्रमिक संगठनों ने भी दिया समर्थन
दक्षिण के तीन राज्य सरकार समर्थन में हैं
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसानों का भारत बंद को कई राजनीतिक दलों और खास तौर पर श्रमिक संगठनों ने समर्थन देने का एलान कर इसकी धार को तेज कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने इस बंद का आह्वान किया है।




तीन कृषि कानूनों की वापसी को लेकर पिछले वर्ष प्रारंभ हुए आंदोलन के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस भारत बंद का आह्वान किया गया है। घोषणा के मुताबिक इसके तहत सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय एवं दुकान इसके दायरे में रहेंगे।

आपात सेवाओं को बंद के दायरे से मुक्त रखा गया है। कांग्रेस ने पहले ही इस बंद के समर्थन में मैदान में उतरने का एलान कर रखा है। पार्टी के प्रवक्ता गौरव बल्लभ के मुताबिक पिछले सात वर्षों में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक साजिश के तहत देश के कृषि उद्योग को बीमार करने की साजिश की है। इसके अलावा राजद की तरफ से तेजस्वी यादव भी बंद के समर्थन में रहेंगे।

वैसे ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन से लेकर अनेक श्रमिक संगठनों और वाम दलों ने पहले से ही इस बंद को समर्थन देने की बात कही है। इनमें से अनेक संगठन बंद के समर्थन में सड़कों पर भी उतरेंगे।

इस वजह से ऐसा माना जा रहा है कि इस बार के भारत बंद का असर उन राज्यों में भी होगा, जहां इससे पहले कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन की आंच नहीं पहुंची थी। पंजाब के नये मुख्यमंत्री ने भी बंद का समर्थन करने की बात कही है। इसके अलावा कई राज्य सरकारों ने भी बंद को समर्थन देने की घोषणा कर इस आंदोलन की धार को और पैना कर दिया है।




किसानों का भारत बंद आंदोलन की बरसी पर

संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने भारत बंद को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाये रखने की बात कही है। दक्षिण भारत में तमिलनाडू में सत्तारूढ़ डीएमके भी इस बंद के समर्थन में है।

जबकि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट श्रमिक संगठन जैसे बड़े यूनियन के लोग इसके समर्थन में सड़कों पर आयेंगे। केरल की वामपंथी सरकार अपनी पार्टी के फैसले के तहत पहले से ही इस आंदोलन के पक्ष मे है।

भारत बंद को इस केरल की सरकार ने भी समर्थन दिया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में राजनीतिक कारणों से भी इस बंद को समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है।

इस वजह से ऐसा माना जा रहा है कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रारंभ होने वाला यह किसान आंदोलन एक साल पूरे करने के बाद फिर से जीवित हो उठेगा क्योंकि कई राज्यों में अब विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं।



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