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किसान आंदोलन के स्थगन के एलान के बाद घर वापसी का दौर शुरु




ट्रैक्टरों पर सामान लाद वापस जा रहे किसान
एक लेन को खाली कर दिया किसानों ने
यातायात की बेहतर परिवहन सुविधा जारी
अब पुलिस के जिम्मे है बैरिकेड हटाना

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसान आंदोलन को स्थगित किये जाने के एलान के बाद आज से वाकई दूर दराज के किसान अपने अपने घर लौटने लगे हैं। दिल्ली की सीमा पर एक साल से अधिक समय से डेरा डाले किसानों ने अपना सामान समेटकर ट्रैक्टरों से रवानगी की। टिकरी और सिंघु बॉर्डर से काफी संख्या में किसान आज वापस लौटे हैं।




संयुक्त किसान मोर्चा के एलान के मुताबिक सारे किसानों की घर वापसी के बाद ही संगठन के नेता इन स्थानों को खाली करेंगे। वैसे किसान नेता राकेश टिकैत के एलान के मुताबिक किसानों ने धरनास्थल पर एक लेन पूरी तरह खाली कर दिया है, जिससे अब यातायात सुगम हो गयी है।

वैसे इन सड़कों पर दिल्ली पुलिस की तरफ से अनेक किस्म के जो अवरोध खड़े किये गये थे, उन्हें हटाने का काम अब तक प्रारंभ नहीं हो पाया है। सिर्फ जो अस्थायी बैरिकेड थे, उन्हें पुलिस वालों ने मजदूरों की मदद से हटा लिया है। सीमेंट के जो भारी ब्लॉक सड़कों पर रख गये थे, उन्हें शायद कल हटा लिया जाएगा।

इन भारी ब्लॉकों को मशीन की मदद से ही हटाया जा सकता है। वैसे इस सड़क पर जहां जहां पुलिस की तरफ से लोहे की सलाखें ठोंक दी गयी थी, उन्हें भी हटाने के लिए अधिकारियों ने मुआयना किया है।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के धरना वापस लेने के फैसले की जानकारी मिलने के बाद पिछले एक साल से टिकरी सीमा पर डेरा डाले सैकड़ों किसान गुरुवार को अपने घर के लिए रवाना हो गए। हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने एलान किया है कि वे 11 दिसंबर को जश्न मनाने के बाद घर वापस जाएंगे।

किसान आंदोलन की औपचारिक समाप्ति जश्न के बाद

वैसे मिल रही जानकारी के मुताबिक किसानों के पहले जत्थे में घर लौटने वाले पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, होशियारपुर और फिरोजपुर जैसे दूर-दराज के स्थानों के थे, जबकि उनमें से अधिकांश ने आज सुबह (शुक्रवार) जल्दी वापस जाने के लिए अपना सामान पैक किया।

जब मंच से आंदोलन खत्म करने का एलान किया गया तो मुख्य प्रदर्शन स्थल पर किसानों ने जीत का जश्न मनाया और मंच पर डांस भी किया। अमृतसर के रहने वाले किसान हरविंदर ने कहा कि कल केंद्र द्वारा हमारी सभी मांगों को स्वीकार करने के बाद हम आज घर वापस जाने के बारे में आश्वस्त थे, इसलिए हमने पैकिंग कर ली थी।

जैसे ही एसकेएम ने सिंघू सीमा से आंदोलन को वापस लेने की घोषणा की, हमने इन्हें ट्रैक्टर-ट्रेलरों और अन्य वाहनों पर लाद दिया।




वहीं, गुरदासपुर के गुरजीत ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार के अन्य सदस्यों को कल पंजाब से टिकरी बुलाया था ताकि वे हमारा सामान और अन्य सामान वापस वाहनों में ले जा सकें।

उन्होंने कहा कि कुछ किसानों ने पहले अपने ट्रैक्टरों को कृषि उद्देश्यों के लिए गांव वापस भेज दिया था और उनके ट्रेलर सीमा पर खड़े थे, इसलिए वे भी ट्रेलरों को घर वापस ले जाने के लिए यहां ट्रैक्टर लाए।

बीकेयू (राजेवाल) के एक सीनियर नेता परगट सिंह ने पुष्टि की कि सैकड़ों किसान (विशेष रूप से दूर-दराज के किसान) आज यानी गुरुवार को घर के लिए रवाना हुए।

जाम से बचने के लिए बारी बारी निकल रहे हैं किसान

उन्होंने कहा कि पंजाब के रास्ते में ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है, इसलिए इन किसानों ने इस तरह की किसी भी समस्या की संभावना को रोकने के लिए आज घर लौटना पसंद किया।

कल किसान न केवल अपना सामान बांधकर ट्रेलरों और अन्य वाहनों पर लादेंगे, बल्कि सीमा पर साफ-सफाई भी सुनिश्चित करेंगे जैसा कि तय किया गया था। एसकेएम के निर्णय के अनुसार अधिकांश किसान शनिवार को पंजाब के लिए रवाना होंगे।

बीकेयू नेता ने बहादुरगढ़ शहर और अन्य स्थानों के लोगों की मदद के लिए आभार व्यक्त किया। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेताओं द्वारा अपने एक साल के आंदोलन की जीत की घोषणा के तुरंत बाद पिछले एक साल से किसान आंदोलन के केंद्र रहे सिंघू सीमा पर जश्न शुरू हो गया।

इसके अलावा सैकड़ों किसानों ने एसकेएम की घोषणा के बाद अपना सामान, टेंट पैक करना शुरू कर दिया और सीमा पर अपने अस्थायी आश्रयों को हटाना शुरू कर दिया।



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