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किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर देश भर में प्रदर्शन







  • राकेश टिकैत ने कहा कृषि कानून तो वापस लेना होगा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के बाद आज सिर्फ दिल्ली ही नहीं

बल्कि पूरे देश के विभिन्न इलाकों में किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन हुए।

दरअसल तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने को बुधवार को छह माह का

समय पूरा हो गया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन की तरफ से धरना स्थलों पर

काला झंडा लगाकर विरोध दर्ज कराया गया। यूपी गेट पर किसान यूनियन के राष्ट्रीय

प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार कानून वापस नहीं

लेगी किसान धरना खत्म करके वापस नहीं जाएंगे। इससे पहले सरकार के साथ जो भी

बातचीत हुई थी, यदि सरकार फिर से बातचीत करना चाहती है तो बातचीत वहीं से शुरू

होगी जहां पर पहले खत्म हुई थी। नए सिरे से नई रूपरेखा के साथ कोई बातचीत नहीं

होगी। किसान इसके लिए नहीं मानेंगे। सरकार उन्हें कोरोना का सुपर स्प्रेडर कह रही है

जबकि वो कोरोना के नियमों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की

हितैषी नहीं है इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। उनके नेतृत्व में यूपी गेट पर कृषि

कानून विरोधियों ने सरकार का पुतला फूंका और काले झंड़े लेकर धरना स्थल पर

नारेबाजी करते हुए परिक्रमा भी की।

उन्होंने कहा कि जब आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार ने कुछ दौर में बातचीत की थी, अब

यदि वो फिर से बातचीत करना चाहती है तो बात वहीं से शुरू होगी जहां से खत्म हुई थी।

इससे पहले कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने आंदोलन स्थल पर शामिल प्रदर्शनकारियों

की कम संख्या को देखते हुए कहा कि यह आंदोलन 2024 तक भाजपा सरकार के रहने

तक भी चल सकता है। हमें आंदोलन की तैयारी वैसे ही करनी होगी जैसे तीन साल के लिए

फसल की करते हैं।

किसान आंदोलन के छह माह पर कहा पीछे नहीं हटेंगे

गांव में बैठे हुए लोग आएंगे नहीं तो आंदोलन कैसे चल पाएगा। खेत में जाए बिना फसल

कैसे तैयार होगी। उन्होंने कहा कि जैसे खेत की रखवाली करते हैं वैसे ही आंदोलन की

करनी होगी। खुद ही झोपड़ी बनानी होगी। गांव से साधन लाने पड़ेंगे। आंधी-बारिश और

गर्मी से निपटने के लिए पक्के टेंट की व्यवस्था करनी होगी। रस्सी, बांस, तख्त, चारपाई

और ट्रालियां सब मजबूत चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव से लेकर दिल्ली तक संघर्ष तेज

करना होगा, आंदोलन की भाषा सीखनी होगी। तारीख वह भी 26 ही थी, जब किसानों ने

दिल्ली तक चार लाख ट्रैक्टर पहुंचा दिए थे। उन्होंने इशारों ही इशारों में यह भी कह दिया

कि यह तारीख हर महीने आती है और ट्रैक्टर भी हैं।

श्री टिकैत ने कहा कि यूपी में किसानों का नेताओं के अंदर बड़ा डर है। वहां किसानों के डर

के कारण ही नेताओं ने गांवों में आना छोड़ दिया है, लेकिन फिर भी यूपी में आंदोलन को

तेज किया जाएगा और इसके लिए किसानों को तैयार किया जा रहा है। राकेश टिकैत ने

कहा कि यूपी के किसान हमेशा आंदोलन में सबसे आगे रहे हैं और इस आंदोलन में भी

सबसे आगे यूपी के किसान खड़े हुए हैं। कोरोना काबू में आने के  बाद उत्तर प्रदेश में इस

आंदोलन का स्वरुप और बड़ा होगा।



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