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वार्ता के लिए आंदोलनकारियों को बुलाया केंद्र सरकार ने




  • एक महीने से भी अधिक समय से जारी किसान आंदोलन

  • गतिरोध समाप्त करने की बात कही पर तेवर अलग

  • कृषि बिल समर्थक यूनियनों से आज हुई बात चीत

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का भी ख्याल है सरकार को

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वार्ता के लिए केंद्र सरकार की तरफ से आंदोलनकारी किसान नेताओं को

आमंत्रित किया गया है। सरकार की तरफ से यह एलान किया गया है कि यह वार्ता

आगामी 30 दिसंबर को दोपहर दो बजे से होगी। सरकार ने कहा है कि वह इस समस्या के

समाधान के लिए गंभीर है। इसी वजह से वह आंदोलनकारी किसानों के साथ खुले दिल के

साथ नये सिरे से बैठक करने जा रही है। सरकार की तरफ से इस बात का सरकारी एलान

होने के बीच ही केंद्रीय कृषि मंत्री ने आज 25 किसान संगठन के नेताओं से भी बात-चीत

की। इन संगठनों ने केंद्र की तरफ से लाये गये तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया है।

इससे तय है कि अगली बैठक में भी सरकार पहले से निर्धारित अपने एजेंडा के साथ ही

बात करेगी। दूसरी तरफ किसानों के धरनास्थलों पर अन्य राज्यों के किसानों के पहुंचने

का क्रम आज भी जारी रहा। कई राज्यों से करीब पांच हजार किसान नेता विभिन्न

धरनास्थलों पर पूरी तैयारी के साथ ही पहुंचे हैं।

वार्ता के लिए बुलाया तो दूसरे गुट से बात भी कर ली

सरकार द्वारा किसानों को कृषि बिल के संबंध में बातचीत के लिए आमंत्रित करने का यह

छठा अवसर है। सरकार की पहल को इस नजरिए से भी देखा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने

इसके लिए एक कमेटी गठित कर समस्या का समाधान तलाशने का निर्देश दिया है।

पिछले एक महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमा के बाहर धरना दे रहे किसानों

के साथ सरकार का गतिरोध पूरी तरह कायम है। इसके पूर्व हुई पांच दौर की बात चीत का

कोई नतीजा नहीं निकल पाया है क्योंकि दोनों ही पक्ष अपनी अपनी बात पर अड़े हुए हैं।

आंदोलनकारी किसान नेता यह चाहते हैं कि सरकार इन तीनों कानूनों को रद्द करे जबकि

सरकार साफ कर चुकी है कि वह किसी भी स्तर पर अपने कानूनों को रद्द नही करने जा

रही है।

तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले 25 किसान यूनियन के नेताओं ने कृषि मंत्री के

साथ क्या कुछ बात चीत की, उसका विवरण सामने नहीं आ पाया है। वैसे यह खबर आयी

है कि केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने इससे पूर्व केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल और अमित शाह

के चर्चा की है। यह दोनों मंत्री भी पहले ही आंदोलनकारियों के साथ वार्ता कर चुके हैं और

उनकी वार्ता विफल रही है। अमित शाह के साथ बैठक में नाराज किसानों ने कोई राय देने

के बदले सीधे हां या ना में उत्तर देने की शर्त रख दी थी। जिसके बाद बैठक बिना किसी

नतीजे के समाप्त हो गयी थी। 30 दिसंबर को होना वाली बैठक के पूर्व कृषि मंत्रालय के

अधिकारी भी कानूनी पेचिदगियों को और बेहतर तरीके समझ रहे हैं। जाहिर है कि इस

वार्ता में भी कृषि बिलों में उल्लेखित एमएसपी और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर ही

आंदोलनकारी नेता सरकार का साफ उत्तर जानना चाहेंगे।



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