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फरक्का के दूसरे ब्रिज के टूट जाने से दो लोगों की मौत

  • पुल की डिजाइन पर उठ गये हैं कई सवाल

  • गार्डर टूटा तो चपेट में आये है सात मजदूर

  • मृतक के पिता ने कहा पहले से ही संदेह था

  • अंतिम दौर का निर्माण कार्य फिर से बाधित

प्रतिनिधि

मालदाः फरक्का के दूसरे ब्रिज का निर्माण कार्य और उसकी डिजाइन पर सवाल खड़े हो

गये हैं। यहां पुल का निर्माण कार्य चलने के दौरान ही गार्डर का एक हिस्सा अचानक नीचे

आ गिरा। इसकी चपेट में सात मजदूर आये हैं जबकि वहां कार्यरत एक इंजीनियर सहित

दो लोगों की मौत हो गयी है। घटना की सूचना पाते ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी

घटनास्थल पर पहुंचे हैं। सभी घायलों को मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेजा गया

है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बतायी जाती है। स्थानीय वैष्णवनगर थाना इलाके में यह

घटना रात को होने के बाद वहां रात से ही राहत और बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया गया था।

उस दौरान सर्च लाइट जलाकर काम किया जा रहा था। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और

अन्य विरोधी दलों ने फरक्का बराज प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

तृणमूल कांग्रेस ने फरक्का प्रशासन पर आरोप लगाये

एनएचएआइ की तरफ से इस पुल के निर्माण का ठेका आरकेइसी नामक एक दक्षिण

भारतीय कंपनी को सौंपा गया है। गार्डर का जो हिस्सा टूटकर नीचे गिरा है वह साठ मीटर

लंबा और 895 टन वजन का था। पूरे पुल की लंबाई करीब तीन किलोमीटर है, जिसे 88

पिलरों पर खड़ा किया जा रहा है। अधिकांश काम पूरा होने के बाद अब कोलकाता से

मालदा की तरफ आने वाले हिस्से पर काम चल रहा था। इसी दौरान यह हादसा हुआ है।

घटना के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वहां नियमित तौर पर रविवार की रात को

भी काम चल रहा था। काम पर अनेक मजदूर थे। अचानक ही गार्डर का एक हिस्सा टूटकर

नीचे आ गिरा। इसकी चपेट में आने की वजह से ही दो लोगों की मौत हो गयी जबकि शेष

गंभीर रुप से घायल हो गये हैं। काफी पुराना पड़ चुके फरक्का ब्रिज के लिए दूसरे पुल का

निर्माण कार्य केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ कराया गया है। बीच में काम घटिया होने के आरोप

में स्थानीय लोगों ने इस काम को बंद करा दिया था। तब भी यह आरोप लगा था कि पुल

की डिजाइन में गड़बड़ी है। काफी दिन काम बंद रहने के बाद हाल ही में इसे दोबारा चालू

किया गया था।

फरक्का के दूसरे ब्रिज की डिजाइन पर संदेह

इस हादसे में मारे गये इंजीनियर शचीन प्रताप के पिता उदयवीर सिंह ने भी पुल की

डिजाइन में गड़बड़ी होने का संदेह जाहिर किया है। वह खुद भी इस निर्माण कार्य के एक

हिस्से के इंजीनियर हैं। उनका कहना है कि पुल की डिजाइन पर मैंने पहले ही संदेह व्यक्त

किया था। प्रशासन को इसकी जानकारी दी गयी थी। इसी वजह से तीन महीने काम बंद

हुआ था। लेकिन जिस संस्था ने यह डिजाइन तैयार की थी, उसने कह दिया कि अगर

गलत है तो बनाने वाले इसे सुधार लें। ऐसा संभव तो नहीं था क्योंकि हम अपनी मर्जी से

तो किसी डिजाइन में तब्दीली नहीं कर सकते। हमलोगों ने लिखित तौर पर भी इसकी

मांग की थी। लेकिन नक्शा बनाने वाली कंपनी ने कोई जबाव ही नहीं दिया।

उदयवीर का कहना है कि पिछले बीस साल से वह इस कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं। उनका

कहना है कि इतने लंबे समय तक निर्माण कार्य से जुड़े होने का अपना अनुभव भी होता है।

इसी आधार पर पुल की डिजाइन पर संदेह व्यक्त किया था। अब प्रशासनिक जांच होने

दीजिए सब कुछ साफ हो जाएगा। इस घटना में वहां के प्रोजेक्ट इनचार्ज एस श्रीनिवास

राव भी मारे गये हैं। वह आंध्रप्रदेश के राममनदुरी इलाके के निवासी है। इस हादसे में

मुकेश पांडे (27 साल), रंजन कुमार मेहता (26 साल) और सुबेदार प्रजापति भी घायल हुए

हैं। हादसे के बाद इस काम को फिर से रोक दिया गया है।

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