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पृथ्वी से बहुत दूर हमारे जैसा ही एक ग्रह फिर मिला

  • दूसरे सौरमंडल में 11 दिन में चक्कर काटता है

  • पृथ्वी से तीन हजार प्रकाश वर्ष दूर

  • अपने सूर्य का चक्कर 378 दिन में

  • खगोलीय स्थिति भी पृथ्वी के जैसी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी से बहुत दूर लेकिन बिल्कुल पृथ्वी के जैसा एक और ग्रह खोजा गया है।

दरअसल अंतरिक्ष में अनजाने इलाकों में चल रहे शोध के तहत अब तक कई ऐसे ग्रहों का

पता चला है। आकार में पृथ्वी के जैसा होने के साथ साथ अनुमान है कि यह ग्रह भी अपने

सौर मंडल के सूर्य से करीब उतनी ही दूरी पर है, जितनी की पृथ्वी की सूर्य से दूरी है। सिर्फ

अब तक की जानकारी के मुताबिक अपना चक्कर काटने में पृथ्वी के लिहाज से 11 दिन

का समय लेता है। जिस सौरमंडल में इसके होने का पता चला है, उसे वैज्ञानिक प्रोक्सिमा

कहते हैं। प्रोक्सिमा सेंचुयरी के ग्रहों के बीच मौजूद इसे अब जाकर नये वैज्ञानिक मॉडल के

आधार पर खोजा और पहचाना गया है। दस लाख से अधिक पर हुए शोध के बाद यह ऐसा

ग्रह है जो आकार प्रकार में बिल्कुल पृथ्वी के जैसा नजर आ रहा है। हालाकिं अब वैज्ञानिक

इसके बारे में और नये नये तथ्य जुटा रहे हैं। इन तमाम जानकारियों को एकत्रित करने के

बाद अब तक मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर लेने के बाद वैज्ञानिक इसके बारे में और

अधिक जानकारी देने की घोषणा कर चुके हैं। तब तक इसे प्रोक्सिमा बी का नाम दिया

गया है और उसके बारे में और जानकारी जुटाने की कवायद चल रही है।

पृथ्वी से दूर होने के बाद भी परिस्थितियां लगभग एक जैसी

वैज्ञानिक यह देखकर भी हैरान हैं कि जिस ग्रह के ईर्दगिर्द यह चक्कर काट रहा है, वह

तारा भी आकार प्रकार में सूर्य के जैसा ही है। साथ ही उसके आस पास जो अन्य ग्रह हैं, वे

भी लगभग हमारे सौरमंडल के जैसे ही हैं और लगभग सबकी दूरी और संरचना भी हमारी

सौर मंडल के अन्य ग्रहों के जैसी है। केओआइ 456.04 नाम से दर्ज इस ग्रह भी अपनी

रोशनी का 93 प्रतिशत पृथ्वी के जैसा ही प्राप्त होता है। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यह

पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर है। वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक यह हमसे करीब तीन

हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। इस शोध के बारे में एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पत्रिका

में शोध प्रबंध भी प्रकाशित हुआ है।

केप्लर स्पेस टेलीस्कोप से मिले आंकड़ों के आधार पर इस इलाके में कुछ पृथ्वी के जैसा

होने के संकेत मिले थे। उसी संकेत के आधार पर आगे का शोध प्रारंभ किया गया था।

नासा के वैज्ञानिक इस बारे में और अधिक जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। नासा को भी

उम्मीद है कि अंतरिक्ष में जेम्स वेब टेलीस्कोप की स्थापना होने के बाद इसके बारे में और

विस्तार से जानकारी मिल पायगी। वैसे इस जेम्स वेब टेलीस्कोप के अलावा यूरोपिय

स्पेस एजेंसी का प्लेटो टेलीस्कोप भी वर्ष 2026 में अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला है। उससे

भी इस इलाके के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी क्योंकि यह दोनों ही खगोल दूरबीन

अंतरिक्ष में अलग अलग स्थान से तमाम आंकड़ों को एकत्रित करेंगे। वैसे वैज्ञानिकों के

मुताबिक पृथ्वी के जैसा नजर आने वाला यह चौथा ग्रह है।

हमारे ग्रह जैसा दिखने वाला यह चौथा ग्रह खोजा गया

इस दिशा में लगातार पृथ्वी का विकल्प तलाशने का अभियान लंबे समय से चल रहा है।

वैसे प्रारंभिक विश्लेषण का यह भी नतीजा है कि इस ग्रह और उसके मूल तारा की स्थिति

की वजह से वहां इंफ्रा रेड किरणों के विकिरण की संभावना कम है। दरअसल इसी किरण

की अधिकता की वजह से अधिकांश जीवन के पनपने लायक परिस्थितियां उत्पन्न होती

हैं। पृथ्वी के जैसा ही ग्रह खोजने का अभियान प्रारंभ होने के बाद वर्ष 1992 में इसमें पहली

सफलता मिली थी। उसके बाद से अब तक हजारों ग्रहों की पहचान हो चुकी है और नये नये

सौरमंडल भी खोजे जा चुके हैं। इनमें से पृथ्वी के जैसा ग्रह खोजना कोई आसान काम नहीं

था। लेकिन इस अभियान को जारी रखा गया है और उसी प्रयास के तहत चौथा ऐसा ग्रह

पाया गया है, जो आकार प्रकार में पृथ्वी के जैसा ही है। इसके साल की गणना का निष्कर्ष

है कि यह केप्लर 160 का पूरा चक्कर 378 दिनों में पूरा करता है। पृथ्वी के सूर्य के चारों

तरफ परिक्रमा पूरा करने की अवधि औसतन 365 दिनों की होती है।

गणित के एलॉगरिथम के सिद्धांत के आधार पर पुराने आंकड़ों का नये सिरे से विश्लेषण

कर इसमें नये नये संशोधन किये गये हैं। तब जाकर इस सौरमंडल में लगभग पृथ्वी के

जैसी हालत में अवस्थित इस ग्रह का पता चल पाया है। लेकिन सारे वैज्ञानिक अब जेम्स

वेब टेलीस्कोप से मिलने वाले नये आंकड़ों के विश्लेषण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


 

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