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प्रसिद्ध अभिनेता विद्युत जामवाल चंदगीराम अखाड़े में







नयी दिल्लीः प्रसिद्ध अभिनेता विद्युत जामवाल उर्फ कमांडो ने दिल्ली के प्रसिद्ध मास्टर

चंदगीराम अखाड़े में धूम मचा दी। वह अपनी फिल्म के प्रोमोशन के तहत वहां पहुंचे थे।

मार्शल आर्टस के जानकार जामवाल ने वहां दांव भी आजमाये। राजधानी दिल्ली के

मशहूर चंदगीराम अखाड़े में एक अनोखी लड़ाई हुई जिसमें एक तरफ पहलवान जगदीश

कालीरमन के दमदार पट्ठे थे तो दूसरी तरफ हिंदी सिनेमा में बिजली से चमकते कमांडो

विद्युत जामवाल। दरअसल, विद्युत जामवाल की फिल्म कमांडो 3 आगामी 29 नवंबर

को सिनेमाघरों में दिखाई देगी। उसी फिल्म के प्रमोशन के लिए विद्युत जामवाल यमुना

नदी किनारे बने इस अखाड़े में आए थे जिसे भारत के मशहूर पहलवान रहे मास्टर

चंदगीराम ने बनवाया था। विद्युत जामवाल ने इस मौके पर अपनी फिल्म कमांडो 3 के

बारे में बताया और मैट और मिट्टी के अखाड़े पर कुछ उभरते पहलवानों के साथ कुश्ती के

दांव भी आजमाए।

उत्तर प्रदेश पुलिस में डीएसपी पद पर कार्यरत और भारत केसरी पहलवान जगदीश

कालीरमन ने प्रसिद्ध अभितेना विद्युत जामवाल का स्वागत किया और उन्हें नई

फिल्म के लिए शुभकामनाएं दीं। जगदीश ने साथ ही कुश्ती और मार्शल आर्ट्स में

समानता बताते हुए कहा कि कोई भी खेल शरीर को तो फिट रखता ही है, देश को भी

मजबूत बनाता है। अब तो बहुत सी फिल्मों में खेल और खिलाड़ी की जिंदगी के बारे में

बता कर लोगों का सार्थक मनोरंजन किया जा रहा है।

विद्युत् जामवाल तो आते ही छा गए थे। फिल्मी हीरो पर उन का खिलाड़ी मन पूरी तरह

हावी था। अखाड़े में उन्होंने मिट्टी को समतल बनाने के लिए फावड़ा उठा लिया और

अपने सफेद कपड़ों के खराब होने की भी परवाह नहीं की। एक पहलवान को तो उन्होंने

किसी पेशेवर पहलवान की तरह पटक दिया था।

प्रसिद्ध अभिनेता इस अखाड़ा में आकर उत्साहित हुए

इसके बाद विद्युत जामवाल ने मैट पर असली पहलवानों की असली कुश्ती देखी जबकि

जगदीश कालीरमन ने लाइव कमेंट्री की। अपनी फिल्म से ज्यादा विद्युत जामवाल ने

नई पीढ़ी को मजबूत बनने की सलाह दी और महिला पहलवानों की हिम्मत और जज्बे

की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि सिर्फ जिम में जाने और बॉडी बनाने से देश मजबूत

नहीं बनता है, बल्कि वह देश आगे बढ़ता जिसमें पुरुष वहां की महिलाओं का सम्मान

करते हैं और उन पर आई मुसीबत में उनका साथ देने के लिए खड़े होते हैं। पहलवान इस

जज्बे में बाजी मार जाते हैं। हर गुरु अपने शिष्य को खेल के साथ साथ महिलाओं की

इज्जत करना भी सिखाता है चंदगीराम अखाड़े की तरफ से साई कोच सहदेव बाल्यान,

पूनम कालीरमन, विजय कौशिक (कोच), कृष्ण पहलवान, साहिल सर्राफ और जगदीश

कालीरमन ने विद्युत जामवाल को गुर्ज और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया ।



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