fbpx Press "Enter" to skip to content

वास्तु दोष की वजह से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में अड़चनें

  • वास्तु विशेषज्ञ की भविष्यवाणी सत्य प्रमाणित

  • पहले ही सभी पक्षों को कर दिया था आगाह

  • डॉ सिंह को सिक्का का वास्तुदोष बताया था

  • मंदिर बनाने में लगातार आ रही है परेशानी

सुदीप शर्मा चौधरी

गुवाहाटी: वास्तु दोष के बारे में अब औसत भारतीय परिवार जानता है। शायद हाल के एक

दशक में यह वास्तु अधिक लोकप्रिय भी हुआ है। लोग अपना घर बनाने में भी इस बारे में

जानकारी अवश्य हासिल करते हैं। लेकिन पहली बार प्रस्तावित श्री राम मंदिर के निर्माण

में वास्तु दोष का मामला चर्चा में आ रहा है। असम के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तु

विशेषज्ञ राजकुमार झाँझरी द्वारा अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के मॉडल में

वास्तु दोष की वजह से निर्माण कार्य में अवांछित बाधाएं आने की भविष्यवाणी पूरी तरह

सत्य प्रमाणित हुई है। 300 करोड़ रुपयों की लागत से बनने वाले श्री राम मंदिर की

बुनियाद के लिए 1200 खंभों के निर्माण का कार्य तब खटाई में पड़ गया, जब प्रारंभ में ही

नियत तीन खंभे रेतीली जमीन और भूगर्भ में पानी की वजह से धंस गये। खंभों का

निर्माण कार्य 15 अक्टूबर के आसपास शुरू होने तथा जून-2021 में पूरा होने की बात थी।

प्रथम खंभों की ढलाई के बाद जमीन में धंस जाने की वजह न सिर्फ टल गया बल्कि

निर्माण की पूरी प्रक्रिया को ही नये सिरे से प्रारंभ करने की नौबत आ गयी। विशेषज्ञों का

कहना है कि प्रस्तावित राम मंदिर स्थल के भू-गर्भ में मौजूद बलुआ मिट्टी तथा पानी

पत्थरों से निर्मित होने वाले विशाल मंदिर के स्थायित्व के लिए खतरा है। मंदिर निर्माण

में आयी इस अप्रत्याशित समस्या के बाद राम मंदिर निर्माण से जुड़े हलकों में घोर

निराशा व्याप्त है तथा समिति द्वारा समस्या के निवारण के उपाय सुझाने हेतु देश के

नामी-दामी इंजीनियरों की आठ सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है।

वास्तु दोष के बारे में मोदी सहित सभी प्रमुख लोगों को बताया था

प्रसंगवश उल्लेखनीय है कि असम के वास्तु विशेषज्ञ राजकुमार झाँझरी ने श्रीराम

जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रस्तावित राम मंदिर के

मॉडल में भयंकर वास्तु दोष होने की वजह से इस मॉडल के अनुसार मंदिर निर्माण करने

से अप्रत्याशित बाधाओं व मंदिर निर्माण के बाद भी विकट समस्याओं का सामना करने

की चेतावनी दी थी, जो पूरी तरह सत्य साबित हुई है।

उल्लेखनीय है कि 2 अप्रैल 2020 को राम मंदिर की आधारशिला स्थापन व भक्तों द्वारा

भगवान राम के दर्शन का कार्यक्रम तय किया गया था, जो सरकार द्वारा घोषित

लॉकडाउन के चलते रद्द करना पड़ा। मंदिर की मूर्तियों को जब अस्थाई वेदी में विराजमान

करने का मौका आया, तब हजारों भक्तों व देश के मुर्धण्य संतों की उपस्थिति के बीच

हर्षोल्लास के माहौल के बजाय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा

मुट्ठीभर लोगों की उपस्थिति में पूजन करके भगवान राम को नये अस्थायी लकड़ी के

मंदिर में स्थानांतरित करना पड़ा। कोरोना वायरस के खतरे व केंद्र द्वारा घोषित

लॉकडाउन को देखते हुए साधु-संतों व राम मंदिर आंदोलन से जडि़त लोगों को भी पूजा में

आमंत्रित नहीं किया जा सका। राम मंदिर की दिव्यता और भव्यता को लेकर भी संतों में

विवाद जारी है।

वहां पुरातत्व के अवशेषों को लेकर भी विवाद पैदा हुआ था

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु जमीन के समतलीकरण के दौरान मिली मूर्तियों व

पुरातात्विक अवशेषों को लेकर भी विवाद पैदा हो गया। राम मंदिर आंदोलन के शलाका

पुरुष रामचंद्र परमहंस के दिगंबर अखाड़े में साधु-संतों ने बैठक कर साफ तौर पर कहा कि

उन्हें विहिप के मॉडल पर राम मंदिर का निर्माण स्वीकार नहीं है। पीएम मोदी द्वारा

जुलाई में साधु-संतों को समर्पित करने वाले 210 करोड़ रुपये की लागत से तैयार भजन

सेंटर का उद्घाटन भी टल गया। इस प्रकार एक के बाद एक आ रही बाधाओं के चलते राम

मंदिर का निर्माण कार्य वांछित गति को प्राप्त नहीं कर पा रहा है।

डॉ मनमोहन सिंह को भी रुपये  के सिंबल पर आगाह किया था

प्रसंगवश उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा 2010 में रुपये का नया सिंबल जारी

करने के बाद श्री झाँझरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को रुपये के सिंबल में

वास्तु दोष का जिक्र करते हुए देश की अर्थनीति के विकास हेतु इसमें संशोधन की सलाह

दी थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने की वजह से आज देश की

अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। रुपये का नया सिंबल जारी करने के पूर्व रुपये की

विनिमय दर प्रति डॉलर 44 रुपये थी, जो अब 74 रुपये तक गिर चुकी है। देश की जीडीपी

8.5 फीसदी धराशायी होकर -8 प्रतिशत तक गिर चुकी है। वास्तु विशेषज्ञ राजकुमार

झाँझरी विगत 25 सालों से पूर्वोत्तर को उग्रवाद, दरिद्रता, भूखमरी व पिछड़ेपन से मुक्त

करने हेतु वास्तु के प्रति लोगों में जागरुकता लाने का प्रयास कर रहे हैं तथा अब तक

16,000 परिवारों को नि:शुल्क वास्तु सलाह दे चुके हैं

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from उत्तरप्रदेशMore posts in उत्तरप्रदेश »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from धर्मMore posts in धर्म »
More from राज काजMore posts in राज काज »
More from शिक्षाMore posts in शिक्षा »

One Comment

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: