सामाजिक बहिष्कार बनेगा आपराधिक मामला, बहिष्कार बंदी कानून को मंजूरी

सामाजिक बहिष्कार को अपराध ठहराने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य बन गया है।

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मुंबई: जाति पंचायत ने अगर एकाध व्यक्ति अथवा परिवार पर डाले गए सामाजिक बहिष्कार को अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है। ऐसे आरोप में सात वर्ष तक की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हाल ही में बहिष्कार जैसे अनेक मामलों का खुलासा हुआ है। अनेक सामाजिक मामलों में जाति पंचायत द्वारा किसी व्यक्ति विशेष अथवा परिवार के बहिष्कार के मामले को लेकर फैसला दे दिया जाता है। ऐसे में वह व्यकित जिसने गलती नहीं की है, वह भी जातिगत पंचायत के आधार पर दोषी करार दे दिया जाता है। उस परिवार को सामाजिक यातनाओं को झेलना पड़ता है।

सामाजिक बहिष्कार को अपराध ठहराने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य बन गया है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने महाराष्ट्र सामाजिक बहिष्कार बंदी कानून 2015 को मंजूरी दे दी है। गत तीन जुलाई को महाराष्ट्र के राजपत्र में इस आशय की जानकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुधीर श्रीवास्तव द्वारा प्रकाशित की गई थी। अब जाति पंचायत के सदस्यों को सात वर्ष के कारावास और पांच लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया जा सकता है। इस मामले के संज्ञान में आने के बाद छ: महीने में निर्णय सुनाने की व्यवस्था की गई है।

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