देश ने रवीन्द्रनाथ टैगोर को उनके जन्मदिन पर किया नमन

रह्म समाजी होने के बावजूद उनका दर्शन एक अकेले व्यक्ति को समर्पित रहा।

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दो-दो राष्ट्रगानों के रचयिता रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 07 मई 1861 में हुआ था। वे एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्र-गान ‘जन गण मन..’ जिसे गाकर हर भारतीय गर्व महसूस करता है और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान ‘आमार सोनार बांग्ला..’ टैगोर की ही रचनाएं हैं।इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने उनकी जयंती पर नमन करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि सांस्कृतिक चेतना के पुरोधा, महान कला शिल्पी, राष्ट्रगान के रचयिता रवीन्द्रनाथ टैगोर को उनकी जन्म जयंती पर शत-शत प्रणाम। ब्रह्म समाजी होने के बावजूद उनका दर्शन एक अकेले व्यक्ति को समर्पित रहा। उनकी ज़्यादातर रचनाऐं बांग्ला में लिखी हुई हैं। वह एक ऐसे लोक कवि थे जिनका केन्द्रीय तत्त्व अंतिम आदमी की भावनाओं का परिष्कार करना था। उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की लेकिन साल 1880 में बिना डिग्री लिए वापस भारत आ गए। साल 1883 में उनकी शादी मृणालिनी देवी के साथ हुई। बचपन से ही उनका रुझान कविता, छन्द और कहानियां लिखने में था। उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी। 1877 में वह 16 साल के थे जब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई।ये कहना गलत नहीं होगा कि एक बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे। देश को पहला ऑस्कर गुरुदेव रवीन्द्रनाथ की सबसे लोकप्रिय रचना ‘गीतांजलि’ को मिला। रही जिसके लिए 1913 में उन्हें नोबेल अवार्ड से सम्मानित किया गया।काबुलीवाला, मास्टर साहब और पोस्टमास्टर उनकी ये सभी कहानियां आज भी लोकप्रिय कहानियां हैं। रवीन्द्रनाथ की रचनाओं में स्वतंत्रता आंदोलन और उस समय के समाज की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

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