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ट्रेन के सफर में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शहनवाज हुसैन से खास बात-चीत

  • चुनौती स्वीकार कर तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान भी गाया

  • भागलपुर में गंगा जी का पानी पी लिये तो किससे डरें

  • हमारा नेता भी 56 ईंच सीना वाला है तो क्या डरना

  • वैसे भी बिहार किसी बात पर डरता वरता नहीं है

दीपक नौरंगी

भागलपुरः ट्रेन के सफर में किसी नेता का इंटरव्यू लेने के कई फायदे हैं। आम तौर पर

सार्वजनिक समारोह में भीड़ भाड़ के दौरान गंभीर विषयों पर सही तरीके से चर्चा नहीं हो

पाती है। इसलिए जब ट्रेन के सफर में भाजपा के कद्दावर नेता और सैयद शहनवाज हुसैन

नजर आ गये तो उनका साक्षात्कार लेना और गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा करने का

अवसर गंवाने का कोई सवाल नहीं था। वैसे इस साक्षातकार के बाद ही उन्हें बिहार से फिर

से भाजपा ने विधान परिषद के एकमात्र सीट पर होने वाले चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी

भी घोषित कर दिया है। इससे स्पष्ट है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब उनकी राष्ट्रीय

जिम्मेदारियों को और बढ़ाते हुए उन्हें फिर से बिहार में सक्रिय करना चाहता है। यह

उल्लेख प्रासंगिक है कि जब भाजपा ने उन्हें जम्मू कश्मीर का प्रभारी बनाया था तो वह

अत्यधिक चर्चा के केंद्र में आये थे। इसलिए ट्रेन के सफर में उनसे बात चीत का सिलसिला

इसी जम्मू कश्मीर के प्रभारी बनाये जाने से प्रारंभ हुआ।

वीडियो में कई राज पहली बार खोले सैयद शहनवाज हुसैन ने

उन्होंने कहा कि उनके पहले किसी भी राष्ट्रीय दल के नेता जाते थे तो गिनी चुनी स्थानो

पर ही वह जाते थे। लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी मिलने के बाद तय किया कि वह कश्मीर के

उन इलाकों में भी जाएंगे, जहां आतंकवाद का बोलबाला था। इसके तहत वह उन गांवों तक

भी गये,जो पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों का इलाका था। एक गांव में तो सभा के लिए

सुरक्षा के इंतजाम के साथ साथ पर्दे भी लगाये गये थे क्योंकि सुरक्षा बलों को अंदेशा था

कि वहां किसी भी तरफ से ग्रेनेड अथवा रॉकेट लांचर का हमला हो सकता है। श्री हुसैन ने

कहा कि महबूबा मुफ्ती बार बार कहती थीं कि यहां को तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा।

इस बात को चुनौती के तौर पर स्वीकारते हुए उनलोगों ने स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद

के मजार के सामने बनी मजार के कोने में बने मैदान में जनसभा की। वैसे इस जनसभा में

पहुंचने में उन्हें आधा घंटा बिलंब हुआ। इस बीच वहां ग्रेनेड से हमला भी हुआ। बावजूद

इसके वहां लोग जुटे और खुद श्री हुसैन ने अपने हाथों से वहां तिरंगा फहराया और राष्ट्र

गान भी गाया।

ट्रेन में सफर में पहली बार गोपनीय बात की जानकारी दी

बात चीत का क्रम आगे बढ़ने पर उन्होंने पहली बार अपनी और नरेंद्र मोदी के बीच हुई

बात चीत का खुलासा किया। यह बताते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस बात का जिक्र

उन्होंने आज तक किसी ने नहीं किया है। अब काफी समय हो गया है और यह गंभीर चर्चा

है इसलिए बताया जा सकता है कि दरअसल कश्मीर के बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी को बताया था कि कश्मीर के लोग नरेंद्र मोदी से बहुत प्यार करते हैं। वहां के लोग

पाकिस्तान और आतंकवादियों पर भरोसा नहीं करते। उनलोगों को भरोसा है कि उनका

विकास अगर कोई करेगा तो वह नरेंद्र मोदी ही कर पायेगा। इसके बाद खुद श्री मोदी कई

बार वहां गये और वहां के लिए अलग अलग परियोजनाएं चालू की हैं।

कश्मीर के विकास के लिए प्रधानमंत्री गंभीर हैं

चुनाव प्रचार के दौरान कई बार अजीब परिस्थितियों से भी उन्हें गुजरना पड़ा, जिनका

उल्लेख उन्होंने विस्तार से किया। आतंकवादियो के गांव में जाकर वह लोगों को समझाते

थे कि हथियार फेंकों और कलम पकड़ो। एक वाकये का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया

कि एक स्थान पर प्रचार के लिए जाने पर एक महिला कूड़ा और पत्थर फेंकती थी। यह हर

रोज का काम था। एक बार लगातार दो दिन तक महिला नजर नहीं आयी तो उनके घर

हाल चाल पूछने चले गये। लोगों से निरंतर मिलने के क्रम में यह लगातार बताते रहे कि

मुसलमानों का आदर्श बगदागी, ओसामा बिन लादेन, हाफीज सईज या कोई और

आतंकवादी नहीं हो सकता। हमारा आदर्श को मोहम्मद पैगंबर ही हैं, जो अमन और शांति

का संदेश देते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने ट्रेन के सफर में अपने कश्मीर के अनुभव

की जानकारी देते हुए कहा कि वहां का सब कुछ सुंदर है। इसलिए वहां अब लोगों को

भरोसा भी हो चुका है कि वहां की आम जनता का भला अगर कोई कर सकता है तो वह

नरेंद्र मोदी ही है।

भागलपुर का तो मेरे ऊपर कर्ज है उतारना तो पड़ेगा

भागलपुर के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह जब सांसद थे तो जनता के काम

का वेतन पाते थे। लेकिन अब भी वह भागलपुर के लिए काम कर रहे है। फर्क सिर्फ इतना

है कि अब काम के वेतन नहीं मिलते हैं। फिलहाल उनकी भूमिका कॉलेजों में पढ़ाने वाले

उन शिक्षकों के जैसी है जो बिना वेतन के भी छात्रो को पढ़ाते हैं। अपनी तरफ से भागलपुर

के लिए हर संभव प्रयास करने के साथ साथ उन्होंने कहा कि भागलपुर का कर्ज उनके

ऊपर है। इसलिए भागलपुर के लिए वह काम नहीं करें, ऐसा तो हो ही नहीं सकता।

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