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अधिक मतदान से चकराये गये हैं चुनावी किस्मत का आकलन करने वाले विशेषज्ञ

  • बंगाल में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक दिखी

  • टीएमसी ने ईवीएम फिक्सिंग का भी आरोप लगाया

  • हिंसा की किसी बड़ी घटना की कोई सूचना नहीं

  • सुबह से शाम तक महिलाएं अधिक नजर आयी

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: अधिक मतदान के पैटर्न ने चुनावी परिणाम भांपने वाले विशेषज्ञों को चकरा

दिया है। आम तौर पर यह स्थापित आकलन है कि जब पूर्व के मुकाबले अधिक मतदान

हो तो उसे सत्ता के खिलाफ होने वाला मतदान आंका जाता है। पश्चिम बंगाल में यह

स्थिति नजर आयी है लेकिन इस अधिक मतदान में महिलाओं की अत्यधिक भागीदारी

की वजह से यह तय नहीं हो पा रहा है कि इतनी अधिक संख्या में मतदान के लिए आने

वाली महिलाएं दरअसल किसके पक्ष में मतदान करने आयी हैं। यह सवाल इसलिए भी

खड़ा हुआ है क्योंकि भाजपा के तमाम नेताओं के खिलाफ अकेली ममता बनर्जी इस

चुनावी समर में हैं। वैसे इस पहले चरण के मतदान को अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माना जा रहा

है। इससे चुनाव से जुड़े तमाम लोगों ने राहत महसूस किया है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि

पहले चरण के मतदान के अनेक इलाके जंगल महल के हैं, जो घोर नक्सलवाद प्रभावित

इलाके माने जाते हैं। वैसे इन इलाकों में पहले से ही अर्धसैनिक बलों की अनेक टुकड़ियों

को तैनात किया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक अपराह्न चार बजे तक लगभग

70.17 फीसदी मतदान हुआ। एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन क्षेत्र के कई

मतदान केन्द्रों के बाहर मतदान शुरू होने से पहले लम्बी कतारें देखी गईं। तेज गर्मी के

बावजूद मतदाता बढ़-चढ़कर मतदान कर रहे हैं। राज्य में इक्का-दुक्का हिंसा की घटनाओं

को छोड़कर अन्य स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है।

अधिक मतदान के बीच ही ईवीएम की गड़बड़ी की शिकायत

तृणमूल ने आरोप लगाया कि वोटिंग मशीनों को कुछ स्थानों पर ‘फिक्स्ड’ किया गया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा,‘‘ टीएमसी यह जानती है कि वह चुनाव हार रही

है और इसलिए वह इस तरह के आरोप लगा रही है। ऐसी शिकायतों के लिए टीएमसी को

चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए। वैसे टीएमसी की तरफ से ऐसी शिकायत चुनाव

आयोग से भी की गयी हैं। तृणमूल ने दावा किया कि लोग हमारे हक में मतदान कर रहे हैं

लेकिन उनकी वोट वीवीपेट मशीन पर भाजपा चुनाव चिह्न पर वोट पड़ना दर्शा रही है।

तृणमूल कांग्रेस ने ट्विटर पर चुनाव आयोग पर सवालिया निशान उठाया है कि मतदान

के पांच मिनट के भीतर मतदान प्रतिशत कैसे घटकर आधा रह सकता है। उन्होंने कहा कि

यह कैसे हो रहा है। चुनाव आयोग क्या बता सकता है कि मात्र पांच मिनट के अंतराल में

मतदान प्रतिशत कैसे घटकर आधा रह सकता है। यह आश्चर्यचकित करने वाला मामला

है। जंगल महल के मतदान के बारे में बताया गया है कि बांकुरा में दोपहर से पहले तक

57.40 फीसदी मतदान हुआ है, जबकि झारग्राम में 59.23, पश्चिम मेदिनीपुर में 52.60,

पूर्वी मेदिनीपुर में 57.75 ओर पुरुलिया में 51.42 फीसदी मतदान हुआ है। तृणमूल कांग्रेस

नेता माला रॉय और सुदीप बंधोपाध्याय के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल

कोलकाता में मुख्य चुनाव अधिकारी से आज मिला और राज्य चुनाव में पहले चरण और

अन्य मुद्दों पर चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में विसंगतियों पर उंगली

उठाई। श्री बनर्जी ने चुनाव आयोग से मिलने के बाद कहा, आज हमने मुख्य चुनाव

अधिकारी से मुलाकात की। पोलिंग एजेंटों को संबंधित इलाके का ही होना चाहिए, लेकिन

भाजपा ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि पार्टी जिसको तय करेगी उसी व्यक्ति को

एजेंट बनाना चाहिए।

स्थानीय लोगों को ही चुनाव एजेंट बनाने की मांग रखी

हम चुनाव आयोग से दूसरे चरण के चुनाव से इस नियम को बदलने का अनुरोध करते हैं।

हम बूथ एजेंटों के लिए स्थानीय लोगों को तैनात करने की मांग करते हैं, फिर सभी के

लिए उन्हें पहचानना आसान होगा। मुख्य चुनाव अधिकारी ने हमें आश्वासन दिया है कि

वह इस मामले को गंभीरता से लेंगे। तृणमूल राज्य सभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव

आयोग को लिखे पत्र में कहा कि कांठी दक्षिण (216) और कांठी उत्तर (213) सुबह नौ

बजकर 13 मिनट पर क्रमश: 18.47 फीसदी और 18.95 फीसदी मतदान हुआ था लेकिन

चार मिनट बाद नौ बजकर 17 मिनट पर मतदान 10.10 फीसदी और 9.40 फीसदी तक

कम हो गया। इस तरह की विसंगति चुनाव आयोग की वास्तविकता पर सवाल खड़ा

करती है।

महिला बूथ का प्रयोग भी सफल

पश्चिम बंगाल के पहले चरण के चुनाव में कुछ स्थानों पर महिला बूथ भी बनाये गये थे।

इन बूथों पर सिर्फ महिला मतदाता होने के साथ साथ चुनाव कार्य से जुड़ा हर कर्मचारी भी

महिला थी। इन बूथों में भी सुबह से शाम तक महिला मतदाताओं की कतारें लगी रहीं।

वैसे इन महिला मतदान केंद्रों पर अपेक्षाकृत तेजी गति से मतदान होने का भी अनुमान

है। इन तमाम कारणों से अधिक मतदान की रूझान दरअसल अंदर ही अंदर किसके तरफ

है, यह बता पाना चुनावी पंडितों के लिए कठिन हो गया है। 

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