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बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार का पूर्व सैनिक कोरोना से मरा ?

  • सूचना पाकर आये पुत्र को नहीं मिली पिता की लाश

  • कल रात गंभीर अवस्था में एंबुलेंस से ले जाया गया

  • तीन बैरकों में रहते हैं सभी पूर्व सैनिक कर्मचारी

संवाददाता

रांचीः बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में कोरोना ब्लास्ट की सूचना आम होने के बाद भी वहां

एक पूर्व सैनिक की मौत की सूचना अपुष्ट है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस

सैनिक की तबियत कल रात करीब 11 बजे बहुत खराब हो गयी थी। इसी वजह से उसे

एंबुलेंस ले आनन फानन में रिम्स ले जाया गया था। इसकी सूचना पाकर उस पूर्व सैनिक

का पुत्र भी दिन भर रिम्स और जेल का चक्कर काटता रहा। उसने सभी से यह सवाल

किया कि अगर उनके पिता की मौत हुई है तो उनकी लाश कहां है। लेकिन उसे अपने पिता

की लाश के बारे में किसी स्तर के कोई पुष्ट जानकारी नहीं दी गयी थी।

मामले की शिकायत पहुंचन के बाद जब इस मामले की छानबीन की गयी तो कोरोना

प्रबंधन की कुव्यवस्था का स्पष्ट नमूना खुलकर सामने आ गया है। लगातार इस पूर्व

सैनिक के नाम से उसकी तलाश किये जाने पर रिम्स में इस नाम के किसी मरीज के भर्ती

होने की जानकारी दी गयी। जेल प्रशासन की तरफ से यह जानकारी दी गयी कि शायद पूर्व

सैनिक होने की वजह से उसे नामकुम सैनिक अस्पताल ले जाया गया था। बाद में रिम्स

के सूत्रों ने ही इस बात की पुष्टि की कि उसकी लाश रिम्स के मॉर्चरी में ही रखी हुई है। वहां

के मुताबिक उसे एंबुलेंस से अस्पताल लाते वक्त रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी थी।

इसलिए उसका कोई रिकार्ड रिम्स में उपलब्ध नहीं है। मरी हुई अवस्था में आने वाले शवों

की सीधे मॉर्चरी में भेजने का प्रावधान है। वैसे रिम्स में अब तक मरने वाले इस पूर्व सैनिक

की कोविड रिपोर्ट नहीं आयी है। इसलिए औपचारिक तौर पर कोई यह नहीं कह सकता है

कि इस पूर्व सैनिक की मौत भी कोरोना से हुई है।

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में पूर्व सैनिकों को कोई सुविधा नहीं

इस बीच पूर्व सैनिकों को कारागार सेवा में बहाल करने के बाद भी उनकी सुविधाओं का

कोई ख्याल नहीं रखा गया है। अब कोरोना ब्लास्ट के बाद यह सूचना बाहर आयी है कि

तीन कमरों में करीब तीन दर्जन पूर्व सैनिक रखे गये हैं। कोरोना संकट प्रारंभ होने के बाद

ऐसे सारे पूर्व सैनिकों के बाहर जाने पर पाबंदी है। सेवानिवृत्त पूर्व सैनिक होने की वजह से

कोरोना संक्रमण के प्रति उनकी प्रतिरोधक शक्ति का कम होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

इतना कुछ होने के बाद भी जेल प्रशासन की तरफ से उनकी सुविधाओं में कोई ईजाफा

नहीं किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक सारे पूर्व सैनिकों के लिए बाथरुम भी

कॉमन है। इसलिए जिस पूर्व सैनिक की मौत हुई है, उसके जरिए अन्य लोगों तक संक्रमण

फैला है अथवा नहीं, इसकी पुष्टि भी अब तक नहीं हो पायी है।


 

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