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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने किया याद




  • वाजपेयी द्वारा देखा गया सपना अभी पूरा हो गया

  • नेपाल सीमा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेलवे पुल हुआ तैयार

  • बांग्लादेश से नेपाल तक रेल पथ का मूल आधार अब लगभग पूरा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि को याद करते हुए पूर्वोत्तर

सीमांत रेलवे के एक उच्च अधिकारी ने आज गुवाहाटी में मीडियाकर्मियों को सूचित किया

है कि वाजपेयी द्वारा देखा गया सपना अभी सच हो गया है। यह नेपाल सीमा के साथ

उत्तर पूर्व में बहुत महत्वपूर्ण रेलवे पुल है जो 516 करोड़ में पूरा हुआ है। भारत और नेपाल

के बीच डेढ़ हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा की सीमा साझा होती है। इसी सीमा से सटकर एक

रूट उत्तर भारत से लेकर उत्तर पूर्व तक भारत को जोड़ता है। इसी रूट पर एक महत्वपूर्ण

रेलवे पुल करीब 17 सालों की मेहनत के बाद बनकर तकरीबन तैयार हुआ है, जिसके

ज़रिये कम समय में उत्तर पूर्व पहुंचना संभव होगा। सूत्रों के अनुसार नेपाल बॉर्डर से

सटकर तैयार हो रहा रेलवे ब्रिज उत्तर पूर्व के लिहाज़ से अहम है । भारतीय रेलवे ने बिहार

में रणनीतिक महत्व वाले एक पुल का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। बताया गया है

कि निर्देशों के मुताबिक ज़ोनल रेलवे ने काम को इसलिए गति दी क्योंकि उत्तर पूर्व

हिस्सों के साथ बेहतर ढंग से कनेक्टिविटी बनाने वाले इस रेल ब्रिज को 31 अगस्त के इस

महीने से पहले शुरू किया जाना है ।

पूर्व प्रधानमंत्री बाजपेयी ने इसकी शुरुआत की थी

नेपाल के साथ चल रहे ताज़ा सीमा विवाद के नज़रिये से भी यह पुल महत्वपूर्ण है। इस

पुल का रणनीतिक महत्व यह है कि भारत इसके ज़रिये व्यक्तियों के साथ ही सामान को

उत्तरी भारत से उत्तर पूर्व भारत तक एक छोटे रास्ते से पहुंचा सकेगा। दूसरी तरफ, इस

लाइन के ज़रिये ज़मीनी पहुंच भी बढ़ने की उम्मीद है। अभी उत्तर पूर्व से जो ट्रेनें आती हैं।

उन्हें कटिहार और मालदा से होकर आना पड़ता है यानी ‘चिकन नेक’ रूट से. इस नए पुल

के कारण पहले तो चिकन नेक पर दबाव कम होगा और दूसरी तरफ, उत्तर पूर्व से आने

वाले रेल ट्रैफिक को दरभंगा। निर्मली और न्यू जलपाईगुड़ी से होकर आने का अल्टरनेटिव

रूट मिलेगा जो नेपाल बॉर्डर के समानांतर चलेगा । यहाँ उल्लेख है कि पूर्व प्रधानमंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी इस ब्रिज की नींव। भारतीय रेलवे को उत्तर पूर्व फ्रंटियर

रेलवे ज़ोन के साथ रणनीतिक रूप से जोड़ने के मकसद से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी

वाजपेयी ने साल 2003 में इस पुल की आधारशिला रखी थी। वाजपेयी की पुण्यतिथि के

मौके पर इस साल इस पुल को शुरू किया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों के हवाले से

खबरों में कहा गया है कि निर्माली की तरफ से ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा होना अभी बाकी

है, जो तेज़ी से जारी है. साल 2003 में इस ब्रिज के लिए 323 करोड़ रुपए की मंज़ूरी दी गई

थी लेकिन पूरा होते होते इस ब्रिज की लागत 516 करोड़ रुपए से ज़्यादा की हो गई। पूर्व

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान को याद करते हुए, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे

के एक उच्च अधिकारी ने आज गुवाहाटी में कहा कि वर्तमान के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के

नेतृत्व में केंद्र सरकार अटल जी के विचारों को केंद्र में रखकर सुशासन व गरीब कल्याण

के मार्ग पर अग्रसर है।

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