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कड़क हो गये पूर्व सांसद कड़िया मुंडा नीलकंठ से कहा नहीं मिलेंगे

  • तीखे तेवर के लिए पहले से ही जाने जाते हैं
  • नाराज हुए तो केंद्रीय कैबिनेट में शपथ नहीं लिया
  • कोल इंडिया के चैयरमैन तक को किया था सस्पेंड
  • भाजपा के चुनाव मैनेजरों की टोली हो रही परेशान
प्रतिनिधि

रांचीः कड़क स्वभाव के लिए पहले ही परिचित पूर्व सांसद कड़िया मुंडा

फिर से कड़क हो उठे है। वैसे यह उनके लिए कोई नई बात नहीं है।

इससे पहले भी वह कई अवसरों पर अपने इस कड़क स्वभाव के लिए जाने

जाते रहे हैं। इस बार उन्होंने विवादों में घिरे राज्य के मंत्री और खूंटी के

विधायक पद के प्रत्याशी नीलकंठ सिंह मुंडा से मिलने से इंकार कर दिया।

इस बात की जानकारी सार्वजनिक नीलकंठ मुंडा के खेमे से होने से अब

स्पष्ट हो गया है कि खूंटी में भी भाजपा का खूंटा कमजोर हो चला है।

इससे पहले खूंटी के लोकसभा चुनाव में कड़िया मुंडा ने अर्जुन मुंडा के लिए

खुलकर काम किया था। इस बार नीलकंठ से मिलने से इंकार कर

कड़िया मुंडा ने बिना कुछ कहे ही खूंटी विधानसभा क्षेत्र के साथ

साथ पूरे झारखंड में एक स्पष्ट संदेश दे दिया है। इसके दूरगामी परिणाम

होने की आशंका से भाजपा भयभीत है।

खबर रांची तक पहुंचने के बाद तुरंत ही भाजपा के कई मैनेजरों ने किसी

तरह कड़िया मुंडा को मनाने का प्रयास भी किया। लेकिन तब तक देर हो

चुकी है। कोई फैसला लेने के बाद उसपर अंतिम समय तक अड़े रहना

कड़िया मुंडा के स्वभाव में शामिल है। इससे पहले भी अटल बिहारी बाजपेयी

की सरकार में बेहतर मंत्री पद नहीं दिये जाने से नाराज श्री मुंडा ने शपथ लेने

से इंकार कर दिया था। दूसरे मौके पर कोल इंडिया के चैयरमैन एनके शर्मा

को निलंबत कर भी उन्होंने अपने कड़क होने का परिचय दे दिया था। कोल

इंडिया के इतिहास में पहली बार किसी चैयरमैन को ही निलंबित किया गया

था।

कड़क स्वभाव का परिचय दिल्ली में ख्यातिप्राप्त है

अब चुनाव सर पर होने के बाद कड़िया जी के इस कड़े फैसले की जानकारी

सार्वजनिक हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक शायद नीलकंठ सिंह मुंडा

को ही उनके मिलने का तरीका चुनने में गलती हो गयी थी। नीलकंठ सिंह

मुंडा ने उनके एक अंगरक्षक को फोन कर उनसे मिलने का समय मांगा था।

इसी बात पर कड़िया मुंडा भड़क गये हैं। उन्होंने साफ साफ कह दिया कि वह

अभी किसी से नहीं मिल सकते और वह खेत में हल चलाने जा रहे हैं। जैसे

ही यह बात भाजपा मुख्यालय तक पहुंची तो यहां सन्नाटा सा छा गया है।

याद रहे कि इससे पहले भी कड़िया मुंडा ने राज्य सरकार के कई फैसलों की

खुलकर आलोचना की थी। एक स्पष्टवक्ता के तौर पर पहचाने जाने वाले

कड़िया मुंडा आठ बार लोकसभा के सांसद रह चुके हैं। इस बार उनके बदले

अर्जुन मुंडा को वहां से टिकट दिया गया था। उसके बाद से वह अधिकतर

समय अपने गांव के घर पर ही रहते हैं और खेती के काम में व्यस्त समय के

बीच अपने पूर्व से जारी सामाजिक कार्यों को करते हैं। भाजपा कार्यालय में

इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि जमशेदपुर में सरयू राय के खिलाफ

मोर्चा खोलने से हुए नुकसान के बाद अब कड़िया जी का इस तरीके से ना

कह देना भी पूरे राज्य में भाजपा के लिए नई किस्म की परेशानी खड़ी करने

वाला है।

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