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झारखंड आंदोलन के नींव के पत्थर कड़िया मुंडा का पुतला जलाया

  • पत्थलगढ़ी और सरनास्थल पर बोलने का हुआ है विरोध

  • वनांचल आंदोलन को खून से सींचा है कड़िया मुंडा ने

  • बेबाक और दो टूक लहजे में बोलने वाले नेता हैं

  • सारे भाजपायी चुप्पी साधे हैं, यह शर्म की बात

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड आंदोलन की नींव रखने वालों में से एक और पूर्व भाजपा सांसद कड़िया

मुंडा का खूंटी में सरना आंदोलन के क्रम में पुतला जलाया गया। राजनीति में इस किस्म

का विरोध तो होता रहता है लेकिन हैरत की बात है कि भाजपा के छोटे बड़े सभी नेता इस

पर मौन साधे रहे। जिस झारखंड आंदोलन और अलग राज्य को बनाने का श्रेय लेने में

भाजपा कभी पीछे नहीं हटती, उन्हें शायद यह पता भी नहीं होगा कि खुद कड़िया मुंडा भी

झारखंड आंदोलन को आगे बढ़ाने में अग्रणी योद्धा रहे हैं। एकीकृत बिहार के दौरान इसी

भाजपा में भी अलग झारखंड राज्य का बड़ा जबर्दस्त विरोध होता था। उस वक्त भाजपा

झारखडं नहीं वनांचल की बात करती थी। यह उस समय की बात है जब आज के दौर के

अधिकांश नेता या तो राजनीति में नहीं थे अथवा भाजपा में नहीं थे। उनकी जानकारी के

लिए बता दूं कि पतरातू की बैठक में इसी वनांचल की मांग पर मार पीट तक की नौबत आ

गयी थी। भाजपा के लोग चाहे तो उस दौर के जीवित भाजपा नेताओं से इसकी पुष्टि कर

सकते हैं। ऐसे कद्दावर नेता को अपने दो टूक बयान की वजह से विरोध झेलना पड़े, यह

बात गले से उतरती है। लेकिन उनका ऐसा विरोध होने के बाद भाजपा वाले चुप्पी साधकर

बैठे रहें, यह बात हजम होने लायक नहीं है। एक तरफ झामुमो अब भी गुरुजी के झारखंड

आंदोलन को याद करती है तो दूसरी तरफ भाजपा वाले अपने नेता के योगदान को

दरकिनार कर सिर्फ राज्य बनाने का श्रेय लूट रहे हैं, यह निश्चित तौर पर पार्टी की मूल

अवधारणा से हटने की निशानी है।

झारखंड आंदोलन से अब तक अपनी अलग पहचान रखते हैं

अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए अनेक लोगों के लिए भय का कारण रहे कड़िया मुंडा ने

सिर्फ यह कहा था कि सरना स्थल कोई धर्म नहीं है, यह धार्मिक स्थल हो सकता है, जिस

तरीके से हिंदुओं के लिए मंदिर, मुसलमानों के लिए मसजिद और इसाइयों के लिए

गिरजाघर धार्मिक स्थल होते है। उन्होंने पहले से ही यह स्पष्ट कर रखा है कि पत्थलगढ़ी

के नाम पर जो आंदोलन चलाया जा रहा है, उसका दरअसल राजनीतिक मकसद कुछ और

है। इसी बयान के विरोध में पत्थलगढ़ी आंदोलन से जुड़े लोगों ने उनका और दो अन्य

नेताओं का पुतला जलाया। यह भी राजनीतिक विरोध में स्वीकार्य था लेकिन सारे भाजपा

वाले अपने उस नेता के समर्थन में बयान देने से बच रहे हैं, जिनकी वजह से वनांचल का

आंदोलन आगे चलकर अलग झारखंड राज्य का आधार बना, यह हरकत समझ से परे है।

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