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पूर्व आईपीएस अधिकारी ने मुंगेर गोलीकांड में लिपि सिंह को जिम्मेदार ठहराया


  • अमिताभ दास पहले भी गलत का विरोध करते रहे हैं

  • हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही है इसकी जांच

  • चुनाव आयोग ने हटाया था एसपी और डीएम को

  • जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की पुत्री हैं अधिकारी

दीपक नौरंगी

भागलपुरः पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास बिहार के पुलिस महकमे में एक जाना

पहचाना नाम है। सरकार के काम काज की खुली आलोचना करने वाले इस पूर्व अधिकारी

ने रेल में एसपी होते वक्त ही उस काल के रेल मंत्री और अभी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

से टक्कर ले ली थी। उसके बाद सरकारी सेवा से हटने के बाद वह ऐसे मुद्दों पर बेझिझक

अपनी राय सार्वजनिक करते हैं। इस बार उन्होंने मुंगेर गोली कांड पर जांच करने वाली

सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार को पत्र लिखकर लिपि सिंह के

खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि बतौर एसपी वह

खुद भी चार वर्षों तक मुंगेर में पदस्थापित रहे हैं। दुर्गा पूजा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए

गोलीचालन के बारे में वहां के पुलिस वालों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें बताया है कि

इसके लिए सिर्फ तत्कालीन एसपी लिपि सिंह ही जिम्मेदार है। इसी आधार पर उन्होंने

हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही जांच के तहत वर्तमान में सहरसा की एसपी लिपि सिंह के

खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। यह जगजाहिर है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष

आरसीपी सिंह की पुत्री होने की वजह से नीतीश कुमार का उन्हें वरदहस्त प्राप्त है। इसी

वजह से चुनाव आयोग द्वारा मुंगेर के हटाये जाने के बाद उन्हें सहरसा का एसपी भी बना

दिया गया है। नीतीश कुमार का यह फैसला अनेक वर्तमान और पूर्व आईपीएस

अधिकारियों को नागवार भी गुजरा है। अब अमिताभ दास के पत्र से पुलिस मुख्यालय में

फिर से चर्चा का माहौल गर्म हो गया है।  बताते चलें कि पूर्व में बिहार सरकार ने मुंगेर

गोलीकांड की घटना पर मिट्टी डालने का भरसक प्रयास किया था।

पूर्व आईपीएस अधिकारी के अलावा पिता की अपील भी

वहां पुलिस फायरिंग में एक युवक अनुराग पोद्दार के मारे जाने पर जब वहां जनता सड़कों

पर आ गयी, उसके बाद आनन फानन में चुनाव आयोग ने वहां की एसपी लिपि सिंह के

साथ साथ डीएम को भी हटा दिया था। सरकार से न्याय नहीं मिलने के बाद मृतक के पिता

अदालत की शरण में चले गये थे। अदालत द्वारा उन्हें दस लाख रुपये मुआवजा देने के

निर्देश को भी तब तक टाला गया जब तक कि मामले की सुनवाई की अगली तिथि नहीं

आयी। अब उच्च अदालत की निगरानी में ही इस मामले की जांच भी चल रही है। इस

मामले सीआइडी के अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार भी असमंजस की स्थिति से

गुजर रहे होंगे। यूं तो उन्हें एक बिना लाग लपेट वाला अफसर माना जाता है। इस बार की

परेशानी यह है कि वह डीजी पद पर प्रोन्नत होने के बिल्कुल करीब है। ऐसे में सरकार को

नापसंद कोई भी रिपोर्ट उनकी प्रोन्नति के रास्ते में भी अवरोध पैदा कर सकती है। अब पूर्व

आइपीएस अधिकारी अमिताभ दास के पत्र की वजह से सरकारी जांच में फिर से गर्मी आ

गयी है, ऐसी पुलिस मुख्यालय में चर्चा है।

इस अमिताभ दास के पत्र के साथ ही भागलपुर में दो देसी बम बरामद होने की भी सूचना

है। पुलिस के मुताबिक यह मामूली किस्म के बम है, जिन्हें लावारिश हालत में पाया गया

है। दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि इन बमों के साथ एक पत्र भी था। जिसकी पुष्टि

पुलिस ने नहीं की है। दूसरी तरफ गोपालपुर के विधायक गोपाल मंडल किसी विवाद को

लेकर फिर से झमेले में हैं।

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