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पूर्णिमा के चांद की मदद से चालू हो गया फंसा पड़ा जहाज एवरगिवन

  • सूयेज कनाल में नौ परिवहन व्यवस्था बहाल पर अनेक जहाज खड़े

  • छह दिनों के निरंतर प्रयास के बाद अंततः सफलता हाथ लगी

  • ज्वार आते ही समुद्र का जलस्तर बढ़ गया तो परेशानी दूर

कायरोः पूर्णिमा के चांद ने सूयेज नहर के बंद पड़े यातायात को खोलने में सबसे बड़ी

भूमिका निभायी। पूर्णिमा के चांद का समुद्र पर होने वाले असर को हम सभी पहले से ही

जानते हैं। इस दौरान चांद का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी को अपनी तरफ खींचने लगता है।

वीडियो में देखिये कैसे आगे बढ़ाया गया इस जहाज को

इसी वजह से समुद्र में ज्वार जैसी स्थिति पैदा होती है क्योंकि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की

वजह से समुद्र का पानी ऊपर की तरफ जाने लगता है। छह दिनों से बंद पड़े सूयेज कनाल

में इसी अवस्था से मदद मिली। इसकी बदौलत वहां फंसा पड़ा पानी का विशाल जहाज

एवरगिवन अब निकल गया है। वैसे एहतियात के तौर पर खास जहाज अब भी उसका

मार्गदर्शन कर रहे हैं ताकि आगे समुद्र तक पहुंचने में कोई और अड़चन नहीं आये। इसके

अलावा सूयेज कनाल प्राधिकार ऐसे तमाम जहाजों के गति पर भी ध्यान दे रहे हैं। समझा

जा रहा है कि निर्धारित गति से तेज जहाज चलाने की वजह से यह विशाल जहाज बालू में

धंस गया था। उसे निकालने के लिए नहर प्राधिकार के इंजीनियरों ने 27 हजार घनमीटर

बालू हटाया था। इस नहर में टेढ़ा होकर फंसे होने की वजह से नहर के दोनों छोरों पर से भी

बालू हटाना पड़ा था। उसके बाद जहाज को फिर से पानी में तैराने में सफलता मिल गयी

थी।  उसके बाद से  ज्वार के आने की प्रतीक्षा की जा रही थी।

पूर्णिमा के चांद से दो मीटर ऊंचा उठा जलस्तर

पूर्णिमा के चांद का प्रभाव समुद्र में पड़ना प्रारंभ होते ही समुद्र के साथ साथ इस नहर का

जलस्तर पर ऊपर उठने लगा था। एक खास सीमा से अधिक जलस्तर होने के बाद इस

जहाज के आगे बढ़ने की सारी परेशानियां अपने आप ही दूर हो गयी। नहर प्राधिकार के

अध्यक्ष एडमिरल ओसामा राबी ने कहा कि वहां फंसे पड़े पानी के जहाज को आगे बढ़ाने में

सफलता मिल गयी है। उसके आगे बढ़ाने के लिए कई टग बोटों का भी इस्तेमाल किया

गया, जो लगातार उसे सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए खींच रहे थे। इन टग बोटों की

मदद से उसे किनारे से करीब 102 मीटर अलग हटाया जा सका था। जिसकी वजह से वह

पानी में तैरने लगा था। वहां के समय के मुताबिक दिन के साढे ग्यारह बजे चांद के प्रभाव

में ज्वार की स्थिति बनते ही जलस्तर करीब दो मीटर ऊंचा उठ गया। उसके बाद इस

एवरग्रीन को आगे बढ़ाने में कोई परेशानी नहीं हुई। वैसे इन छह दिनो के दौरान नहर के

दोनों छोर पर करीब चार सौ जहाज जहां तहां रुके पड़े हैं। नहर प्राधिकार के लोग बड़ी

सावधानी से नहर में बनी जाम की स्थिति को दूर करने के लिए दिन रात काम कर रहे हैं।

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