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रूस की निजी सेना पर यूरोपियन यूनियन ने लगाया प्रतिबंध




पेरिसः रूस की निजी सेना अफ्रीका के इलाके में अधिक सतर्क है। दरअसल अभी यूरोपियन यूनियन का ध्यान इस निजी सेना की तरफ उक्रेन में बढ़ रही अशांति की वजह से गया है। इसके बाद ही ईयू ने रूस की निजी सेना पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।




औपचारिक तौर पर इस सेना का नाम वागनर ग्रूप है। इसका संचालन निजी हाथों में होने के बाद भी ऐसा आरोप लगता है कि दरअसल यह रूस के पूर्व सैनिकों की जमात है। इसका नियंत्रण वैसे निजी लोगों के हाथों में हैं जो रूस की सरकार अथवा खुद ब्लादिमीर पुतिन के करीबी लोग हैं।

अफ्रीका के कई इलाकों में इस सेना की मौजूदगी की चर्चा हुई थी। पहली बार एक मोबाइल टैबलेट के छूट जाने की वजह से इस निजी सेना की संरचना का पहली बार खुलासा हो पाया था। अब तक की जानकारी के मुताबिक उक्रेन के अलावा सीरिया और लिबिया में भी इस रूस की निजी सेना की मौजूदगी रही है।

यह कभी देश की सरकार के लिए तो कभी किसी देश की सरकार के खिलाफ लड़ाई में सीधे हिस्सा लेती है। अनेक अवसरों पर उसके द्वारा हथियारबंद सेना अथवा विद्रोहियों को प्रशिक्षण देने की शिकायतें भी मिली हैं।




अफ्रीका में इस निजी हथियारबंद गिरोह की मौजूदगी खास तौर पर उन इलाको में हैं, जहां तेल का कुआं हैं और जिन कुओं का नियंत्रण रूस की कंपनियों के पास है। ईयू ने अपने स्तर पर यह कहा है कि इस वागनर समूह पर अनेक स्थानों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। सूडान और मोजांबिक में भी इस सेना की उपस्थिति रही है।

रूस की निजी सेना उक्रेन में फैला रही अशांति

वर्तमान में उक्रेन में फैल रही अशांति के बारे में यूरोपियन यूनियन का आरोप है कि दरअसल रूस अब उक्रेन को हड़प लेना चाहता है। इसी वजह से अपने लोगों के जरिए वहां अशांति उत्पन्न की जा रही है।

दूसरी तरफ रूस ने सभी आरोपों का खंडन करने के साथ साथ कहा है कि निजी सैनिक ठेकेदारों को अपना काम करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसी कंपनियों को पूरी दुनिया में काम करने का अधिकार है।

उन कंपनियों की जिम्मेदारी यह है कि वह कोई ऐसा काम न करें, जिससे रूसी कानूनों का उल्लंघन होता हो। खुद ब्लादिमीर पुतिन भी इस बारे में सफाई दे चुके हैं कि रूस की निजी सेना के तौर पर पहचाने गये इस वागनर समूह को न तो सरकार पैसा देती है और न ही उसे रूस के प्रतिनिधि के तौर पर कुछ करने का अधिकार है।



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