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इथोपिया के इस डालोल मैदान में जीवन नहीं रह सकता




  • पास ही है नमक उगलेवाली ज्वालामुखी
  • पूरा इलाका खारापन से अत्यधिक प्रभावित
  • सुक्ष्म जीवन ने खुद को यहां के लिए ढाल लिया है
  • जीवन के लिहाज से दुनिया का सबसे कठिन इलाका
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः इथोपिया के इस डालोल मैदान इलाके में सब कुछ नजर

आता है। लेकिन पानी होने के बाद भी यहां चलता फिरता जीवन नहीं

है। काफी शोध के बाद वैज्ञानिक इस इलाके को जीवन के निर्वाह के

लिए सबसे कठिन इलाका मान चुके हैं।

दरअसल यहां पानी होने के बाद भी जीवन का नहीं होना हमेशा से

वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित किया करता था। निरंतर हुए शोध के

बाद वहां जीवन के नहीं बढ़ने की वजह का पता अब चल पाया है।

वैसे इस शोध के जारी रहने के दौरान ही शोधकर्ता यह देखकर हैरान

हो गये हैं कि आम जीवों के लिए यह इलाका कठिन होने के बाद भी

सुक्ष्म जीवन की आबादी बसाता है। वहां के सुक्ष्म जीवन ने यहां की

प्राकृतिक चुनौतियों के साथ खुद को ढाल लिया है। इसी वजह स खुली

आंखों से नजर नहीं आने वाला जीवन यहां सही स्थिति में है।

इस इलाके में पानी भी है फिर भी जीवन क्यों नहीं है, इसी सवाल से

शोध का प्रारंभ हुआ था। वहां के आंकड़े जैसे जैसे प्राप्त हुए, उनके

विश्लेषण से चीजें सामने आती चली गयीं। दरअसल वहां का भूतापीय

इलाका ही वहां जीवन के रहने लायक परिस्थितियां पैदा नहीं कर पाती

है। वहां के अनेक झील एसिड की अत्यधिक मात्रा लिये पानी से भरे हैं।

इस वजह से वहां के पूरे वातावरण में खारापन इतना अधिक है कि वहां

सामान्य जीवन नहीं टिक पाता।

इथोपिया के इस डालोल का पानी एसिड युक्त

इस इलाके में एक ज्वालामुखी विस्फोट के बाद ही पूरे इलाका ही एसिड

युक्त हो गया है। अब भी वहां गाहे बगाहे इसी ज्वालामुखी से विस्फोट

की वजह से गैस निकलते रहते हैं। लगातार इसी प्रक्रिया के जारी रहने

की वजह से वहां का पूरा क्षेत्र ही विषैले गैसों के प्रभाव में आकर

जहरीला हो गया है।

वहां के अनेक इलाकों में अब भी झील में मौजूद पानी को उबलती हुई

अवस्था में देखा जाता है। यहां तक कि जाड़े के मौसम में भी वहां का

तापमान 45 डिग्री के आस पास होता है। इससे समझा जा सकता है

कि डानाकिल के इस क्षेत्र में ज्वालामुखी का प्रभाव कितना गहरा है।

अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया है कि यहां की ज्वालामुखी के

अंदर नमक की भरमार है। इसी वजह से जब कभी वहां से लावा बाहर

निकलता है तो नमक भी बाहर आकर पूरे वातावरण को प्रभावित कर

देता है।

पानी में भी नहीं टिक पाते सुक्ष्म जीवन इथोपिया के इस इलाके में

इस इलाके के अनुसंधान में जुटे वैज्ञानिक दल के नेता लोपेज गार्सिया

ने कहा है कि पानी में भी वहां खारापन अधिक होने की वजह से कोई

जीवन नहीं है। इस पानी में सुक्ष्म जीवन भी नहीं पाये गये हं। श्री

लोपेज इस फ्रेंच दल के नेता था, जो फ्रांस और स्पेन के वैज्ञानिकों के

दल का सम्मिलित अभियान था। यहां के पानी में पीएच की मात्रा भी

शून्य से नीचे पायी गयी है। लिहाजा वहां पानी पर आधारित जीवन की

कल्पना नहीं की जा सकती है।

शायद इसी वजह से यह पूरी पृथ्वी का सबसे कठिन इलाका समझा

गया है, जहां जीवन का टिक पाना असंभव है। यहां तक के यहां के

वायुमंडल तक पर इस एसिड और नमक का प्रभाव है। इससे जीवन

पनपने की स्थिति भी नहीं बन पाती है।

नेचर इकॉलॉजी एंड इवोल्यूशन नामक वैज्ञानिक पत्रिका में इस शोध

दल की उपलब्धियों का विवरण प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया

गया है कि सिर्फ नमक पसंद करने वाला एक सुक्ष्माणु वहां अच्छे

तरीके से मौजूद है। वैसे इसने भी यहां की कठिन चुनौतियों को

समझते हुए अपने आचरण में बदलाव किया है। इस सुक्ष्माणु को

हालोफिलिलिक आर्चिया नाम से जाना जाता है।

यहां नमक की अधिकता की वजह से पूरे इलाके में पीला रंग भी

अधिक नजर आता है। काले रंग के बीच पीले रंग के धब्बों की

बहुतायत के बीच वहां मैग्नेशियम भी प्रचुर मात्रा में हैं। यह शायद

ज्वालामुखी विस्फोट से निकले लावा का ही प्रभाव है। इस विस्फोटक

जैसे माहौल की वजह से भी वहां जीवन का टिक पाना कठिन है।

नमक का प्रकार भी जीवन को रोक देता है

वहां जीवन के नहीं होने के अनुसंधान में वैज्ञानिकों ने पाया है कि वहां

कायोट्रोपिर मैग्नेशियम नमक होने की वजह से हाइड्रोजन के अणुओं

के साथ वहां के अन्य जैविय पदार्थों का रिश्ता खंडित हो जाता है। इसी

तरह खारापन और अधिक तापमान की वजह से वहां जीवन बसर

लायक अन्य जो परिस्थितियां बनती हैं, वे भी समाप्त हो जाती हैं।

वैसे जीवन बसर करने के लायक इस सबसे कठिन इलाके के बारे में

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका सीधा संबंध पृथ्वी की गहराई की

परिस्थितियों से भी हो सकता है लेकिन उस पर अभी और शोध किये

जाने की जरूरत है।



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