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इथोपिया की सेना का तिगारे में जबर्दस्त प्रतिरोध




नैरोबीः इथोपिया की सेना को तिगारे के इलाके में आगे बढ़ने में जबर्दस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। तिगारे के अलग अलग इलाकों में मौजूद हथियारबंद विद्रोहियों ने इथोपिया की सेना के एक टैंक को भी उड़ा दिया है।




इससे स्पष्ट है कि हर मोर्चे पर तिगारे के विद्रोही पहले से ही मोर्चाबंदी कर बैठे हैं। वैसे इस बार के हमले में इथोपिया की सेना को अन्य सहयोगियों से मदद मिल रही है। पड़ोसी देश इरिट्रिया और पड़ोसी प्रांत आमहारा के सैनिक भी तिगारे की तरफ बढ़ रहे हैं।

यानी तिगारे पर नियंत्रण के लिए एक साथ तीन तरफ से हमला किया गया है। दूसरी तरफ तिगारे के विद्रोहियों की तरफ से कहा गया है कि उत्तरी इलाके के दो प्रांतों पर इथोपिया की सेना ने धावा बोला है।

दोनों तरफ की गोलाबारी से सैनिक भी घायल हुए हैं लेकिन वहां की संचार व्यवस्था बंद होने की वजह से घटनास्थल के आस पास के इलाकों में इसकी कोई पुष्टि नहीं हो पायी है। तिगारे के इस इलाके में इथोपिया की सेना का यह हमला तब हो रहा है जब यह इलाका दुर्भिक्ष से पीड़ित हैं।

वहां के संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके हैं जबकि वहां के अधिकांश लोगों के पास अब पर्याप्त भोजन नहीं है।




दूसरी तरफ इथोपिया की सरकार ने वहां के संयुक्त राष्ट्र के राहत अभियान को भी रोक दिया है। सरकार का आरोप है कि यह राहत अभियान दरअसल विद्रोहियों को फायदा पहुंचा रही थी।

इथोपिया की सेना की कार्रवाई और अमेरिकी चेतावनी

सरकारी फौज की इस कार्रवाई के बीच ही अमेरिका ने उस देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने साफ तौर पर कहा है कि अगर इथोपिया की सरकार इस किस्म के दमनात्मक कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगाती है तो उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिया जाएगा।

इस बारे में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डेविड डेल कोंटे ने कहा कि पिछले 110 दिनों से वहां के लोगों को कुछ भी सामान नहीं मिल रहा है। यह निश्चित तौर पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई है और इसकी वजह से करीब सात मिलियन लोगों के पास भूखमरी की नौबत आ गयी है।



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