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पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था का अनुमान देश में कई अर्थशास्त्रियों का कहना




पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था का अनुमान देश में कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय




अर्थव्यवस्था के कई मानक अब धीरे-धीरे महामारी के पहले के स्तर पर लौट रहे हैं, ऐसे में संभव है

कि अर्थव्यवस्था दो साल पहले जिस स्थिति में थी आखिरकार उसी स्तर पर होगी। चालू वित्त वर्ष

की पहली तिमाही के दौरान स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अब भी कोविड से पहले

की अवधि 2019-20 की समान तिमाही की तुलना में 9.2 प्रतिशत कम था। लेकिन अर्थशास्त्रियों

को उम्मीद है कि जीडीपी तीसरी तिमाही तक महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच जाएगी। जुलाई में

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े, पिछले वित्त वर्ष के समान महीने की तुलना

में केवल 0.3 प्रतिशत ही पीछे था। विनिर्माण सूचकांक, पिछले साल के त्योहारी सीजन अक्टूबर

2020 (132.0) के समान ही जुलाई 2021 में 130.9 के स्तर पर था जो दूसरी लहर के बाद इसमें

सुधार की मजबूती दर्शाता है। उदाहरण के लिए, मारुति एस-प्रेसो और मारुति विटारा ब्रेजा के आने

से आईआईपी में समान अंक जुड़ जाएंगे लेकिन जीडीपी गणना में इनके मूल्य अलग-अलग हैं।

अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक सकल घरेलू उत्पाद व्यापक रूप से महामारी

से पहले के स्तर पर वापस आ जाएगा। ज्यादातर संकेतक औसत स्तर पर पहुंचेंगे लेकिन इसमें

भिन्नता भी आएगी। विनिर्माण सेवाओं से बेहतर होगा, गैर-टिकाऊ वस्तुएं, उपभोक्ता टिकाऊ

वस्तुओं से बेहतर होंगी वहीं बड़ी कंपनियां छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) से बेहतर होंगे।

हालांकि यह थोड़ा पेचीदा है कि आखिर अगस्त में आईएचएस मार्किट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स

(पीएमआई) 52.3 और पीएमआई सर्विसेज 56.7 पर क्यों था।

पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था के कई संकेत मिले हैं

पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था के कई संकेत मिले हैं इसकी एक संभावित वजह यह बताई जा सकती

है कि निजी क्षेत्र के सर्वेक्षणों के अनुमान से महीने के आधार पर पीएमआई तैयार होता है। वहीं

दूसरी तरफ , विनिर्माण के मामले में पिछले महीने का आधार 55.3 था जबकि सेवा क्षेत्र के लिए यह

45.4 था। 50 से नीचे का अंक संकुचन का संकेत देता है जबकि इससे ऊपर की संख्या विस्तार को

दर्शाती है। ऐसे में विभिन्न सेवाओं जैसे रेस्तरां आदि के खुलने से अगस्त में पीएमआई को बढ़ावा

मिला, वहीं विनिर्माण क्षेत्र में ऐसा नहीं हुआ। अन्य मापदंडों में, निर्यात कोविड से पहले के स्तर की

तुलना में अधिक रहा है। जुलाई में निर्यात सालाना आधार पर करीब 50 फीसदी अधिक था जबकि




अगस्त में वृद्धि लगभग 46 प्रतिशत कम हो गई। चालू वित्त वर्ष के दौरान पांच महीने में हर महीने

निर्यात कोविड दौर के पहले के स्तरों से अधिक रहा। तर्क की खातिर यह कहा जा सकता है कि यह

मुख्य रूप से बाहरी मांग के कारण था। लेकिन घरेलू मांग का संकेत देने वाले, गैर-तेल, गैर-सोना

का आयात 2019 में अगस्त महीने की तुलना में इस साल अगस्त में 4.32 प्रतिशत ऊपर था। वे

2019 के समान महीने की तुलना में जुलाई में सिर्फ 1.15 प्रतिशत अधिक थे। इसके अलावा, वित्त

वर्ष 2022 के पहले पांच महीनों में हर महीने कर कोविड के पहले के स्तर से अधिक रहा है। ऐसा

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के बीच डेटा की

बेहतर साझेदारी और जीएसटी में ई-चालान के अनिवार्य उपयोग के वजह से संभव हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था स्पष्ट रूप से कोविड के पहले के स्तर पर वापस आ रही है।

कोविड के पहले जैसी स्थिति में लौटने की उम्मीद

अर्थव्यवस्था कोविड से पहले भी धीमी हो रही थी और इसका कोविड से पहले के स्तर पर ही वापस

आना भारत के लिए पर्याप्त नहीं है। अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार को और बढ़ाने और इसे

कोविड से पहले के स्तर पर बनाए रखने की आवश्यकता है। बैंक से संबंधित कुछ हाल की नीतिगत

घोषणाएं, पिछली तारीख से लागू होने वाले कराधान, दूरसंचार कंपनियों को राहत और उत्पादकता

से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं सरकार द्वारा उठाए गए कुछ महत्त्वपूर्ण कदम हैं अगस्त

में कम बारिश, सितंबर में भारी वर्षा की वजह से खनन, बिजली और निर्माण जैसे क्षेत्रों में रुझान पर

असर पड़ने की संभावना है क्योंकि सेमीकंडक्टर्स से संबंधित आपूर्ति से जुड़े मसले की वजह से भी

वाहन क्षेत्र का उत्पादन बाधित हो रहा है। साल-दर-साल वृद्धि, रेलवे की माल ढुलाई दरों में कटौती

और पिछले साल लॉकडाउन अवधि के दौरान विपणन योजनाओं के पेश किए जाने की वजह से भी

रही। कई कर्मचारी अब भी घर से काम कर रहे हैं, इसके बावजूद जुलाई और अगस्त में पेट्रोल की

खपत कोविड से पहले के स्तर से अधिक हो गई। हालांकि, चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में

हर महीने वाहन पंजीकरण कोविड से पहले के स्तर से नीचे था। यह दोपहिया वाहनों की धीमी बिक्री

के कारण हो सकता है जिसकी वजह कोविड-19 की वजह से अनौपचारिक क्षेत्र और एमएसएमई का

प्रभावित होना है।



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