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पर्यावरण प्रदूषण के कारण भारत में किडनी कैंसर बढ़ रहा है

  • बाहर का भोजन तथा अधिक मांस खाने से भी कैंसर

  • हाल के दिनों में इसके मरीजों की संख्या बहुत बढ़ी

  • इसकी रोकथाम से देश को काफी आर्थिक लाभ होगा

  • डॉ भुवनेश्वर बोरोआ और टाटा कैंसर अनुसंधान संस्थान का शोध

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : पर्यावरण प्रदूषण ने देश में कैंसर के प्रकार और प्रवृत्ति में बदलाव लाया है,

गुवाहाटी में डॉ भुवनेश्वर बरुआ कैंसर संस्थान (बीबीसीआई) और टाटा कैंसर अनुसंधान

संस्थान के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक उच्च स्तरीय शोध में पता चला है। मुख्य रूप से

पित्ताशय की थैली, फेफड़े और स्तन कैंसर के रुझानों पर केंद्रित अनुसंधान संस्थान इस

रिपोर्ट को, जो मानव जीव विज्ञान में अंतरराष्ट्रीय जर्नल अग्रिमों में प्रकाशित किया गया

है। अभी तक यह माना जाता था कि बढ़ते वायु प्रदूषण से अस्थमा और फेफड़ों का कैंसर

होता है, लेकिन बढ़ते वायु प्रदूषण से झिल्लीदार नेफ्रोपैथी रोग यानी किडनी रोग का

खतरा भी बढ़ता है। बी बरुआ कैंसर संस्थान (बीबीसीआई) और टाटा कैंसर अनुसंधान

संस्थान के उच्च स्तरीय शोध डॉक्टर ने इस रिपोर्ट में कहा है कि भारत में किडनी के

कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। किडनी कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य

कारण स्मोकिंग हैं, लेकिन पर्यावरण प्रदूषण इसकी एक मुख्य वजह है। भारत में अभी

तक 60 साल के बाद लोगों में किडनी कैंसर के मामले देखने को मिलते थे, लेकिन पिछले

10 वर्षों में 40 साल की उम्र के लोगों को भी यह बीमारी होने लगी है। इसका प्रमुख कारण

स्मोकिंग, तंबाकू सेवन के साथ-साथ खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका प्रदूषण भी है। अभी

तक यह माना जाता था कि बढ़ते वायु प्रदूषण से अस्थमा और फेफड़ों का कैंसर होता है,

लेकिन बढ़ते वायु प्रदूषण से झिल्लीदार नेफ्रोपैथी रोग यानी किडनी रोग का खतरा भी

बढ़ता है।

पर्यावरण प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण हुआ है

बीबीसीआई के निदेशक डॉक्टर अमल चंद्र कटकी ने कहा कि देश में कैंसर की बढ़ती

घटनाओं को आंशिक रूप से समझाया जा सकता है और बढ़ती आबादी और जीवन

प्रत्याशा में वृद्धि हो सकती है, जिससे कैंसर रोगियों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि हो सकती

है। रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉक्टर ने कहा कि दुनिया भर में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़

रही है। भारत की बात करें तो आईसीएमआर के अनुसार इस समय देश में साढ़े 22 लाख

कैंसर से पीड़ित लोग हैं, जबकि हर साल करीब 11 लाख नये कैंसर रोगियों को चिन्हित

किया जाता है। वहीं अगर इससे होने वाली मौतों की बात करें तो बीते 15 वर्षों में यह

संख्याा दोगुनी हो गयी है। हर वर्ष कैंसर से ग्रस्त करीब 8 लाख लोग मौत का शिकार हो

जाते हैं। किडनी का कैंसर मूत्र संबंधी कैंसरों में तीसरे नम्बैर का कैंसर है।डॉक्टर की शोध

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाहर का भोजन, गलत दिनचर्या, दूषित भोजन करना,

हाईपरटेंशन का इलाज ना कराना तथा बहुत ज्यादा मांस खाना भी कुछ ऐसी आदते हैं

जिनकी वजह से किडनी को भारी नुकसान पहुंचता है। बहुत अधिक मांस खाने से भी

कैंसर हो सकता है। प्रदूषण को लेकर जागरुकता का अभाव भी किडनी कैंसर के मरीजों को

हर साल बढ़ा रहा है। ऐसे में ऐसी आदतों को जल्द से जल्द बदल देनी चाहिए, जिससे

स्वस्थ रह सकें।हालांकि, कैंसर का एक बदलता पैटर्न पूरी तरह से आबादी में पहले से

प्रचलित जोखिम कारकों के कारण नहीं हो सकता है।

इस पर रोक थाम से देश को कई लाभ एक साथ होंगे

वैश्विक प्रदूषण से अब भारतीय समुद्री जीवन भी संकट मेंपर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगाने के निहित स्वास्थ्य लाभ हैं और कैंसर की रोकथाम के

साथ-साथ गैर-संचारी रोगों से जीवन के नुकसान को रोकने के अलावा गहरा आर्थिक लाभ

होगा। डॉक्टर ने कहा।यहां उल्लेख करें कि किडनी रोगों में वायु प्रदूषण के प्रभाव का पता

लगाने के लिए टाटा कैंसर संस्थान और बी बरुआ कैंसर अस्पताल के शोधकर्ताओं ने

लगभग साढ़े बारह साल तक यह अध्ययन किया, अध्ययन, वर्ष 2007 में शुरू हुआ था।

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