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पृथ्वी की पारिस्थितिकी की हालत दिनों दिन हो रही खराब

  • मंगल ग्रह पर इंसान बसाने पर हो रहा है विचार
  • पृथ्वी पर कभी भी आ सकती है तबाही
  • उल्कापिंडों से धरती पर आता रहा है महाप्रलय
  • मंगल पर सुक्ष्म जीवन ही बनायेंगे जीवन के आधार
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी की पारिस्थितिकी यानी पर्यावरण तंत्र इतनी तेजी से बिगड़ रही है कि कभी भी हादसा हो सकता है।

यह पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है कि इस हादसे का क्रम एक बार प्रारंभ होने की स्थिति में

उसे रोक पाना इंसान के वश में नहीं है।

इसी स्थिति का आकलन करते हुए वैज्ञानिक अब मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने की योजनाओं पर विचार कर रहे हैं।

सारा कुछ समझ लेने के बाद वहां जीवन लायक परिस्थिति बनाने के लिए सबसे पहले सुक्ष्म जीवनों को

वहां बसाने की योजना बनायी जा रही है।

यह सुक्ष्म जीवन यानी वैज्ञानिक परिभाषा में अत्यंत लघु आकार के जीवन ही वहां इंसान के रहने लायक परिस्थितियां पैदा करेंगे।

एक बार यह सुक्ष्म जीवन विकसित होने के क्रम में आ गया तो धीरे धीरे वहां का वातावरण इंसान के बसने लायक बनता चला जाएगा।

इस कड़ी में सबसे अधिक जरूरत वायुमंडल की है। इस वायुमंडल को तैयार करने के लिए भी

जिन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, उनकी रचना यह सुक्ष्म जीवन ही करते हैं।

पृथ्वी के खतरों के बारे में वैज्ञानिक ने जानकारी दी

इस बारे में पोलैंड के वारसा के कॉपरनिकस साइंस सेंट्रल प्लेनेटोरियम की डॉ वेरोनिका स्लीवा ने कहा कि

समय रहते ही इंसान को पृथ्वी से आगे मंगल ग्रह पर अब बसने का प्रयास करना चाहिए

क्योंकि पृथ्वी की आंतरिक परिस्थिति अत्यंत भयावह हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि यूं तो सैद्धांतिक तौर पर सूर्य का चक्कर काट रहे उल्कापिंडों पर भी जीवन की रचना का प्रयास किया जा सकता है।

लेकिन वे आकार में इतने बड़े नहीं हैं कि पृथ्वी की आबादी का बोझ संभाल सकें।

दूसरी तरफ इन उल्कापिंडों का खतरा भी पृथ्वी पर अचानक ही तेजी से बढ़ता जा रहा है।

कल रात ही चार उल्कापिंड अत्यंत तेज गति से पृथ्वी के करीब से गुजरे हैं।

इन सभी के गुजरने की दिशा और दूरी अब करीब आती जा रही है। इसने वैज्ञानिकों की चिंता और बढ़ा दी है।

ऐसा तो पहले से ही माना जा रहा है कि सामान्य परिस्थिति में भी किसी दिन

विशाल उल्कापिंड के गिरने की वजह से पृथ्वी का जीवन समाप्त हो सकता है।

वीडियो में देखिये उल्कापिंड गिरने के प्रभाव

ऐसा पहली बार नहीं होगा बल्कि पहले भी कई बार ऐसा महाप्रलय आ चुका है।

लेकिन इंसानी कारणों से पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है वह कभी भी तबाही की श्रृंखला को प्रारंभ कर सकता है।

इसीलिए यह कहा जाता है कि पृथ्वी पर महाप्रलय की स्थिति लाखों वर्षों में अवश्य आती है।

सब कुछ तबाह हो जाने के बाद पृथ्वी पर फिर से जीवन की उत्पत्ति होती है।

यह क्रम काफी समय से चला आ रहा है।

मंगल ग्रह को विकल्प के तौर पर बनाने के लिए पहल करनी होगी

मंगल ग्रह पर सुक्ष्म जीवन स्थापित करने से वहां का माहौल बदलना प्रारंभ होगा।

वैज्ञानिक मानते हैं कि एक बार जीवन को विकास का क्रम वहां प्रारंभ होने की स्थिति में

इसमें धीरे धीरे तेजी आती जाएगी।

वैसे भी मंगल ग्रह पर पानी पहले से ही मौजूद है। इसलिए जीवन के विकास में कोई विशेष दिक्कत नहीं आयेगी।

सिर्फ हवा को इंसान अथवा अन्य जीवन के लायक बनाने के लिए यह काम सुक्ष्म जीवन ही तैयार करेंगे।

डॉ स्लीवा ने कहा कि अब जो परिस्थितियां हैं, उसमें इंसान को सिर्फ एक ही ग्रह पर बंधकर नहीं रहना चाहिए।

इसलिए विकल्प के तौर पर मंगल सबसे बेहतर स्थान हो सकता है।

वर्तमान में भी इंसान के पास मंगल ग्रह तक पहुंचने की तकनीक मौजूद है।

सिर्फ वहां जीवन की रचना के बाद क्रमिक विकास के तौर पर यह ग्रह भी इंसान तथा अन्य प्राणियों के बसने के लायक बनाया जा सकता है।

वहां जाने वाले सामान्य तरीके से जीवित रह सकें इसे सुनिश्चित करने के लिए सुक्ष्म जीवन को स्थापित करना होगा।

हालांकि वैज्ञानिक यह मानते हैं कि यह कोई व्यापारिक योजना नहीं होगी लेकिन इसके लिए राजनीतिक स्तर पर फैसला लेना पड़ेगा।

इस काम को जितना जल्द प्रारंभ किया जा सके, मंगल पर जीवन प्रारंभ करने की योजनाएं उतनी तेजी से लागू की जा सकेंगे।

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