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किसानों के चारों तरफ घूम रही उत्तरप्रदेश की चुनावी राजनीति




चुनावी चकल्लस

  • सत्यपाल मलिक ने फिर से मोदी को निशाने पर लिया
  • साफ साफ कहा कि बात बात में झगड़ा हो गया
  • मोदी ने रुखे अंदाज में अमित शाह के पास भेजा
  • पीयूष जैन के छापा का फोटो आखिर किसने लिया था
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसानों के चारों तरफ घूम रही उत्तरप्रदेश और पंजाब की राजनीति में भाजपा के अंदर का अंर्तद्वंद्व साफ होता जा रहा है। एक तरफ योगी आदित्यनाथ की जीत सुनिश्चित करने के लिए खुद नरेंद्र मोदी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।




दूसरी तरफ मेघालय के राज्यपाल और जाट नेता उन्हें इन्हीं किसानों के मुद्दे पर घेर रहे हैं, जो चुनावी गणित को पलट सकते हैं। पश्चिमी उत्तरप्रदेश और पंजाब के बहुत बड़े इलाके में किसानों का वोट ही निर्णायक होता है। कांग्रेस से नाराज यह मतदाता पहले भाजपा के साथ ही थे।

अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। इसी वजह से नरेंद्र मोदी का काम भी पहले के मुकाबले अधिक कठिन हो गया है। उत्तरप्रदेश के हर इलाका अपने पाले में करने में जुटे मोदी के प्रयासों को नये सिरे से मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बयान से धक्का पहुंचा है। श्री मलिक का यह बयान किसानों के घावों को कुरेदने वाला है, जिससे भाजपा को नुकसान हो सकता है।

वैसे अब तक के सारे सर्वेक्षणों में यही स्पष्ट है कि फिलहाल योगी आदित्यनाथ की गाड़ी सबसे आगे चल रही है जबकि अखिलेश यादव की चुनावी गाड़ी की रफ्तार पहले से अधिक तेज हो चुकी है। श्री मलिक ने अपने ताजा बयान में किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी मुलाकात का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे पर जब वह श्री मोदी से मिले थे तो बात-चीत अच्छी नहीं रही। इसका विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पांच सौ किसानों के मर जाने की बात कही तो नरेंद्र मोदी नाराज हो गये और उल्टा कह दिया कि क्या वे सारे लोग मेरी (नरेंद्र मोदी) की वजह से मरे हैं।

किसानों की मौत पर दोनों के बीच बात बढ़ी

श्री मलिक ने आगे कहा है कि मैंने उनसे कहा कि चूंकि आप प्रधानमंत्री हैं इसलिए इन मौतों की जिम्मेदारी आपकी ही है। बहस अधिक बढ़ने के बाद श्री मोदी ने उन्हें यह निर्देश दिया कि वह अमित शाह से जाकर मिलें। बकौल श्री मलिक उन्होंने वैसा ही किया।




हरियाणा के फोगाट खाप के सम्मेलन में उनका सम्मान किये जाने के मौके पर श्री मलिक ने चकरी में यह बातें कही है। इसके राजनीतिक असर को समझना कठिन नहीं है। उनका यह बयान जब आया जबकि मेरठ में प्रधानमंत्री मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर रहे थे।

किसानों के चारो तरफ घूमती इस राजनीति को श्री मलिक के बयान ने और गरमा दिया है। इसका नतीजा है कि राजनीतिक चर्चा के मुख्य केंद्र से अब इत्र कारोबारी पीयूष जैन और पुष्पराज जैन का मामला गायब होता जा रहा है।

सिर्फ यह सवाल वहां भी प्रमुख तौर पर उभर चुका है कि आखिर पीयूष जैन के यहां नोटों का अंबार मिलने वाली तस्वीर मीडिया को किसने उपलब्ध करायी थी क्योंकि छापामारी के दौरान प्रेस का प्रवेश तो वर्जित था। जाहिर सी बात है कि छापामार दल के ही किसी अफसर ने यह फोटो ली थी, जो बाद में सोशल मीडिया में वायरल हो गयी।

दूसरी तरफ खुद श्री मोदी मेरठ में साफ तौर पर अखिलेश यादव पर ही निशाना साधकर यह भी स्पष्ट करते जा रहे हैं कि मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के साथ ही होने जा रहा है। अपनी जनसभाओं में बार बार लाल टोपी वालों के कुशासन का उल्लेख कर वह भाजपा का नंबर बढ़ा रहे हैं या अखिलेश को और प्रसिद्धी दे रहे हैं, यह बहस का विषय है।

पीयूष जैन की छापामारी का फोटो किसने वायरल किया

श्री मोदी ने पूर्व की सरकारों में अपराधियों के हावी होने को एक चुनावी मुद्दा भी बनाया है और यह कह रहे हैं कि योगी के राज्य में अपराधियों को ऐसी कोई छूट नहीं मिलने से अपराधियों को संरक्षण प्रदान करने वाले भी परेशान हो गये हैं। कुल मिलाकर श्री मोदी के बयान के बाद किसानों के संबंध में मेघालय के राज्यपाल का बयान राजनीतिक तौर पर निरर्थक नहीं है, यह समझा जा सकता है लेकिन इसके परिणाम आखिर क्या होंगे, यह समझने वाली बात है। क्योंकि सत्यपाल मलिक पहले ही कह चुके है कि अगर केंद्र से उन्हें इशारा भी होता है तो वह पद छोड़ने में एक पल का विलंब नहीं करेंगे।



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