अकुशल नर्स और कंपाउंडर से बंध्याकरण मामले की जांच प्रारंभ

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  • टीम ने लिया लिखित प्रतिवेदन 

  • टीम ने माना मामला गंभीर 

  • दोषी पर होगी कार्रवाई

नीलू चौबे

श्री बंशीधर नगर : अकुशल नर्स एवं कंपाउंडर के द्वारा महिलाओं का बंध्याकरण ऑपरेशन किये जाने के मामले में विभागीय जांच शुरू हो गई है।

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जिला से ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सक डा रामविनोद के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय टीम ने शनिवार को अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की जांच की।

जांच के दौरान टीम ने आठ बिंदूओं पर जांच की तथा बंध्याकरण ऑपरेशन के दौरान ओटी में नियुक्त चिकित्सकों एवं कर्मियों ने लिखित प्रतिवेदन लिया।

जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जांच के लिये जिला से तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया था।

जिसमें ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सक डा रामविनोद के नेतृत्व में सदर अस्पताल गढ़वा के चिकित्सक डा अमित कुमार एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझिआंव के चिकित्सक डा गोविंद सेठ को शामिल किया गया था।

टीम ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच की।

जांच के बाद पत्रकारों से बातचीत के क्रम में टीम ने बतलाया कि बंध्यकारण मामले की जांच की गई है।

ऑपरेशन के दौरान प्रतिनियुक्त कर्मियों से लिखित प्रतिवेदन लिया गया है।

टीम ने कहा कि जांच रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंपा जायेगा।

एक सवाल के जबाब में टीम ने कहा कि मामला गंभीर है, दोषी के विरूद्ध होगी कार्रवाई।

अकुशल नर्स और कंपाउंडर का क्या है पूरा मामला

गत् 31 जनवरी को हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय खबर में अनुमंडलीय अस्पताल में अकुशल नर्स एवं कंपाउंडर के द्वारा महिलाओं का बंध्याकरण ऑपरेशन कर मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ किये जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी।

खबर प्रकाशित होने के बाद जिप उपाध्यक्ष रेखा चौबे ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच की थी तथा डीएस को कड़ी फटकार लगाते हुये व्यवस्था में सुधार लाने की हिदायत दी थी।

विधायक भानू प्रताप शाही ने भी बंध्याकरण मामले को गंभीरता से लेते हुये मामले को विधानसभा में उठाया था तथा उन्होंने सदन के माध्यम से चालू सत्र में सरकार से महिलाओं की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे डॉक्टर, नर्स और अस्पताल प्रबंधन के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी।

सीएस डा एनके रजक ने भी स्वयं पूरे मामले की जांच की थी तथा डीएस डा सुचित्रा कुमारी एवं सर्जन डा नाथुन साह को इसके लिये पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया था।

बावजूद सीएस ने डीएस डा सुचित्रा कुमारी को अस्पताल के सभी प्रशासिनक पदों से हटाकर अस्पताल के चिकित्सक पदाधिकारी डा राहुल कुमार को सभी प्रशासनिक कार्यों के लिये कार्यकारी उपाधीक्षक मनोनित किया था।

जबकि सीएस के द्वारा पूरे मामले में डा सुचित्रा कुमारी को जिम्मेवार ठहराने के बाद भी उनके पास ही वित्तीय पावर रहने दिया गया था।

इस मामले में गुनाहगारों के विरूद्ध समुचित कार्रवाई नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर फिलहाल सवालिया निशान लग गया है।

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