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ऊर्जा संचालित उपकरण अब आप पहनकर चल सकते हैं




  • तैयार हो चुका है स्ट्रेचेबल बैटरी जैसा नया उपकरण

  • इसे शरीर पर पोशाक की तरह पहना जा सकेगा

  • हर जरूरी उपकरण को निरंतर ऊर्जा प्रदान करेगा

  • लीक होने अथवा अन्य खतरों से भी दूर होगा यह

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ऊर्जा संचालित उपकरण अगर आपके शरीर पर हो तो वह

एक साथ कई काम कर सकता है। इससे आप अपने शरीर के तापमान

को नियंत्रित रखने के अलावा शरीर के अंदर की गतिविधियों की भी

निगरानी कर सकते हैं। साथ ही अपने मोबाइल का चार्ज खत्म होने पर

भी आप अपने इसी पोशाक से उसे चार्ज भी कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने

इसी किस्म के खींचाव वाले यानी स्ट्रेचेबल बैटरी तैयार करने में

सफलता पा ली है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्याल के वैज्ञानिकों ने इस काम को सफल कर

दिखाया है। इनलोगों ने एक नर्म परत वाली ऐसी बैटरी तैयार की है,

जिसे खींचा जा सकता है। यानी इसके अंदर मौजूद खास किस्म के

प्लास्टिक की वजह से यह रबर की तरह लचीला भी है। साथ ही इसे

तैयार करने में इस बात का भी खास ध्यान रखा गया है कि पारंपरिक

बैटरी की तरह इसे तैयार करने में आग से जलने वाले पदार्थों का

इस्तेमाल नहीं किया गया है। यानी इनमें आग लगने का भी खतरा

नहीं है। स्ट्रेचेबल यानी खींचा जा सकने वाली इन बैटिरियों को इसी

वजह से अब पहना भी जा सकता है। शरीर में पोशाक की तरह रहने

वाले यह बैटरी पहले की भारी बैटरियों के मुकाबले वजन में हल्के और

आसानी से ढोने लायक भी हैं। साथ ही इनसे हानिकारक रसायनों के

लीक होने का खतरा भी नहीं है। इन कारणों से उन्हें प्रचलित बैटरियों

के मुकाबले काफी अधिक फायदेमंद समझा जा रहा है।

ऊर्चा संचालित उपकरणों के लिए सहायक बैटरी

इस बैटरी को विकसित करने से जुड़े वैज्ञानिक और रसायनिक

इंजीनियर झेहान बाओ और मैटेरियल वैज्ञानिक याई कूई मानते हैं कि

इस प्रजाति की बैटरी के अनेक लाभ इसलिए भी हैं क्योंकि वह अलग

अलग शरीर के आकार प्रकार के हिसाब से मुड़ और खिंचाव सहन कर

सकता है। इनपर आधारित ऐसे इलेक्ट्रानिक उपकरण तैयार किये जा

सकते हैं, जो शरीर के पोशक के साथ ही इंसान के साथ मौजूद रहेंगे

और उसके काम काज की गुणवत्ता को और बेहतर बना सकेंगे।

वर्तमान में जिन लिथियम बैटरियों का अधिक प्रयोग होता है, उन्हें

पॉलिमर  की मदद से बनाया जाता है। इन पॉलिमरों के इलेक्ट्रोलाइट

के तौर पर काम करने की वजह से बैटरी का नेगेटिव हिस्सा से ऊर्जा

को उसके पॉजिटिव ध्रुव तक ले जाते हैं। इसके बीच में ऊर्जा से जुड़े

उपकरण काम करते रहते हैं। लेकिन इन्हें तैयार करने में जिन जेलों

का इस्तेमाल होता है उनके लीक होने की वजह से कई बार रासायनिक

प्रतिक्रिया होती है अथवा कुछ मामलों में इनमें आग लगने और उनमें

विस्फोट होने की भी शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं। वैज्ञानिकों ने इस

नई प्रजाति की बैटरी को तैयार करने में इन खतरों पर भी पूरा ध्यान

दिया है। इसलिए स्ट्रेचेबल बैटरी को उस प्रकार के पॉलिमर से बनाया

गया है तो खिंचाव सह सकता है और इसमें सुराख होने के बाद भी यह

एक छोर से दूसरे छोर तक ऊर्जा का प्रवाह बनाये रखने में सक्षम है।

इस तकनीकी सुधार की वजह से बैटरी के लीक होने से उत्पन्न होने

वाले तमाम खतरों को नकारा जाना संभव हो पाया है।

इस बैटरी को खींचने और मोड़ने पर भी कांम एक जैसा

स्ट्रेचेबल बैटरी तैयार करने के बाद प्रयोगशाला में उसके परीक्षण के

दौरान यह पाया गया है कि जब इस बैटरी को मोड़ा और दबाया गया

तब भी उसके ऊर्जा की मात्रा यथावत रही। जांच के दौरान वैज्ञानिकों ने

इस बैटरी को खींचकर उसके मूल आकार से करीब दोगुणा कर दिया

था उसके बाद भी बैटरी ने अपना काम सही तरीके से करना जारी रखा

था। जिस बैटरी को प्रयोग के तौर पर विकसित किया गया है वह अंगूठे

का नाखुन के आकार का है। इसे तैयार करने में सफल होने के बाद

शोधकर्ता यह मान रहे हैं कि इसकी मदद से खास तौर पर इंसान की

जान बचाने में मददगार उपकरणों को इनसे संचालित किया जाना

और आसान एवं सुरक्षित हो जाएगा। वे शरीर के ऊपर पोशाक की तरह

रहते हुए तमाम  जीवन रक्षक उपकरणों को ऊर्जा प्रदान कर सकेंगे।



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