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ग्यारह प्रकाशवर्ष की दूरी पर सुपर अर्थ को खोजा गया

  • धरती का विकल्प खोजने में मिली पांचवीं सफलता

  • टेस्स उपग्रह दूरबीन ने उपलब्ध कराये आंकड़े

  • वर्ष 2017 में पहली बार इलाके पर नजर पड़ी

  • 50 दिन में अपने सूर्य का चक्कर काट लेता है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ग्यारह प्रकाशवर्ष की दूरी पर एक और इलाका है, जहां पृथ्वी के जैसा ग्रह है।

दरअसल इसे फिर से टेस्स उपग्रह सैटेलाइट ने खोजा है जबकि पहली बार इसकी पहचान

केप्लर दूरबीन से की गयी थी। अब तक जो कुछ जानकारी मिली है उसके मुताबिक जिस

ग्रह की पहचान की गयी है, वहां का माहौल पृथ्वी के जैसा ही हो सकता है। याद रहे कि

इससे पहले भी चार ऐसे ग्रहों की पहचान हो चुकी है। दरअसल खगोल वैज्ञानिक अंतरिक्ष

में पृथ्वी के जैसा ही ग्रह खोजने का एक अलग अभियान चला रहे हैं। इस अभियान को

प्रारंभ करने का असली मकसद भी पृथ्वी का विकल्प खोजकर तैयार रखना है। ताकि

अंतरिक्ष में काफी दूर तक जाने की तकनीक विकसित होने की स्थिति में वहां भी इंसानों

की बस्ती बसायी जा सके। जिस इलाके में इसे देखा गया है, वहां के बारे में अभी अध्ययन

चल रहा है और वैज्ञानिक मानते हैं कि वहां एक से अधिक भी इलाके हो सकते हैं, जो पृथ्वी

के जैसे ही हों। यह पृथ्वी से करीब 11 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित इलाका है। अंतरिक्ष के

लिहाज से यह काफी नजदीक होने के बाद भी हमारी विज्ञान इस दूरी को तय करने लायक

तकनीक अभी विकसित नहीं कर पाया है।

ग्यारह प्रकाशवर्ष की दूरी पर है ग्लेइस 887

जर्मनी के गोटिंगजेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने इस इलाके की पहचान

की है। वे मानते हैं कि जिस इलाके की पहचान की गयी है, वहां दो या तीन सुपर अर्थ जैसे

ग्रह हैं जो एक तेज तारे का चक्कर काट रहे हैं। उनकी इस खोज के बारे में जर्नल साइंस में

एक शोध प्रबंध भी प्रकाशित किया गया है। जिस ग्रह की सबसे पहले पहचान हुई है वह

ग्लेइस 887 नाम पा चुका है। इसके आस पास गैस के छल्ले हैं और उसके जरिए अंदर के

वातावरण के बारे में भी जानकारी मिली है। इसी शोध दल ने वर्ष 2017 में पहली बार इस

इलाके में पृथ्वी के विकल्प के होने की संभावना जतायी थी। तब से लगातार इस पर शोध

जारी था। लगातार इस इलाके पर नजर रखने की वजह से शोध टीम को इस बात की

जानकारी मिली कि इसकी धुरी कुछ अलग है। वह हर नौ दिन और 22 दिन के बाद स्पष्ट

नजर आता है। लेकिन लगातार तीन महीने तक इस इलाके पर नजर रखने की वजह से दो

और ऐसे ही ग्रह नजर आये, जहां का माहौल भी पृथ्वी के जैसा हो सकता है। चिली में

स्थापित खास रेडियो दूरबीन की मदद से वहां के सारे आंकड़ों का लगातार विश्लेषण अब

भी किया जा रहा है। वैसे वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन सभी का आकार और वजन

पृथ्वी से बड़ा है। इनके वजन के बारे में अनुमान है कि वे पृथ्वी के मुकाबले चार से सात

गुणा अधिक भारी हो सकते हैं। लेकिन इस क्रम में कई अन्य रोचक जानकारियां भी

वैज्ञानिकों को हो गयी।

अनुमान है कि वहां पानी भी हो सकता है

अपने केंद्र के तेज रोशनी देने वाले तारे का यह पचास दिन में चक्कर काट लेता है। अपने

मुख्य तारे के काफी करीब होने की वजह से वहां पानी भी होने की संभावना है। दो और

इलाकों का पता चला था लेकिन उनके तापमान काफी गर्म है लिहाजा वे पृथ्वी का विकल्प

नहीं हो सकते हैं। तीसरे पर अब भी शोध जारी है। इसका माहौल और तापमान कैसा है,

इसके विश्लेषण के लिए पिछले दो महीने से लगातार इसके आंकड़ों का विश्लेषण किया

जा रहा है। इन आंकड़ों के विश्लेषण से ही यह पता चल पायेगा कि जिसे वे पृथ्वी के बड़े

आकार के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं वहां का अनुमानित तापमान जीवन के लायक है

भी या नहीं।


 

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