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इलेक्ट्रिक ईल भी अब समूह में शिकार करने लगे हैं

  • ब्राजिल के अमेजन नदी में पहली बार दिखा नजारा

  • सबसे तेज बिजली का झटका देती है यह प्रजाति

  • अब स्थानीय लोगों को भी रिसर्च से जोड़ा गया है

  • घेरकर शिकार को झटका देती हैं यह मछलियां

राष्ट्रीय खबर

रांचीः इलेक्ट्रिक ईल आम तौर पर एकाकी प्राणी होते हैं। यानी एक दूसरे के करीब होने के

बाद भी शिकार के मामले में वे अकेले ही यह काम करते हैं, ऐसी वैज्ञानिक धारणा रही है।

पहली बार यह धारणा भी गलत प्रमाणित होती नजर आ रही है। ब्राजिल के अमेजन नदी

में ऐसा नजारा देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हो रहे हैं। एक टीम बनाकर शिकार करने की

वजह से अब उन्हें अधिक भोजन भी प्राप्त होने लगा है। वैसे यह दृश्य वैज्ञानिकों को हैरान

करने वाला है। इससे पहले कभी इस मछली को इस तरीके से दल बनाकर शिकार करते

नहीं देखा गया था। मालूम हो कि अपने शरीर में उच्च क्षमता का बिजली पैदा करने की

क्षमता रखने वाला यह प्राणी किसी शिकार को अपने बिजली के झटके से ही मार देता है।

इलेक्ट्रिक ईल को टीम बनाकर शिकार करने के दृश्य को वैज्ञानिकों ने कैमरे में कैद भी

किया है। स्मिथसोनियन इंस्टिट्यूशन के नेशनल म्युजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के

वैज्ञानिक कार्लोस डेविड डी सांटाना ने इस बारे मे कहा कि यह अपने आप में अजीब

जानकारी है। इसके पहले ईल के इस किस्म के आचरण का कोई पूर्व इतिहास मौजूद नहीं

रहा है। जिन प्रजाति के इलेक्ट्रिक ईल को ऐसा करते देखा गया है, वे इलेक्ट्रोफोरस

वोल्टाई प्रजाति के हैं। करीब चार फीट लंबे यह इलेक्ट्रिक ईल एक साथ शिकार को घेरते

और मारते पाये गये हैं। इससे पहले वैज्ञानिकों को भी यही पता था कि यह मछली अकेले

ही शिकार किया करती है। वैसे इस प्रजाति के ईल पर ज्यादा शोध भी नहीं हुआ है। पहली

बार वहां के इरिरी नदी में इस प्रजाति के पाये जाने के बाद वैज्ञानिकों ने समझा था कि यह

विलुप्त प्राय प्रजाति की है।

इलेक्ट्रिक ईल की यह प्रजाति 860 वोल्ट का झटका देती है

लेकिन इसके परीक्षण से यह पता चल गया था कि यह अपने शिकार को 860 बोल्ट का

झटका दे सकती है। किसी अन्य प्रजाति की ईल मछली में इतना अधिक बिजली का

झटका देने की क्षमता नहीं है। इस प्रजाति के आचरण पर वर्ष 2012 से ही शोध दल रहा

था। उस वक्त उनकी तादात बहुत कम थी। दो वर्षों में इस प्रजाति के ईलों की संख्या बढ़

गया। इसके बाद लगातार 72 घंटे तक जब इनकी निगरानी हुई तो उनके आचरण और

जीवनचर्या का पता चला।

दिन और रात के समय अक्सर ही ईल आराम किया करते हैं। सिर्फ सुबह और शाम का

वक्त उनके शिकार का होता है। अब पहली बार यह भी देखा जा रहा है कि इलेक्ट्रिक ईल

अब रात में भी शिकार करने लगे हैं।

इस प्रजाति की गतिविधियों पर नजर रखने वालों ने पाया है कि करीब एक सौ ईल एक

साथ गोल गोल घूमते हुए छोटी मछलियों के समूहों पर एक साथ हमला करते हैं। चारों

तरफ से शिकार के समूह को घेर लेने के बाद दस बड़े ईल तेजी से आगे बढ़ते हैं और अपने

बिजली के झटके से उन्हें घायल कर देते हैं। यह भी देखा गया कि बिजली का झटका

लगने के बाद मछलियां उछलकर हवा में आती हैं लेकिन वापस पानी में जाते वक्त वह

बेहोश हो चुकी होती हैं। उसके बाद सारा समूह उन्हें भोजन बना लेता है। प्रति घंटे में एक

टीम पांच से सात बार शिकार के समूह को घेरकर बिजली का झटका देकर अपना भोजन

हासिल करती है। पानी में रहने वाले कुछ अन्य जीव भी इसी तरह समूह में शिकार करते हैं

लेकिन इलेक्ट्रिक ईल के बारे में ऐसा पहली बार होता हुआ नजर आया है।

वैज्ञानिकों ने स्थानीय लोगों को इस शोध से जोड़ा है ताकि और जानकारी मिले

अब वैज्ञानिक शोध दल ने इस जानकारी को और बेहतर बनाने के लिए स्थानीय लोगों को

भी इस शोध से जोड़ा है। जो मानते हैं कि इस प्रजाति के ईल कभी अकेले में भी शिकार कर

लिया करते हैं। इसलिए यह प्रारंभिक सोच है कि इलेक्ट्रिक ईल के शिकार का तरीका

स्थान और शिकार की उपलब्धता पर शायद बदल भी जाता है, जिसके बारे में पहले

जानकारी नहीं थी। अब स्थानीय लोगों की मदद से उनके रहने के ठिकानो और आने जाने

के रास्तो के बारे में भी जानकारी हासिल की जा रही है। ताकि उनके सामाजिक आचरण

के बारे में बेहतर जानकारी जुटायी जा सके।

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