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राष्ट्रीय खबर का चुनावी आकलन सही निकला, एनडीए का कुनबा भारी

  • जदयू के साथ गठबंधन में शामिल हो गये जीतन राम मांझी

     

प्रतिनिधि

पटनाः राष्ट्रीय खबर ने इस बात का आकलन पहले ही जता दिया था कि विधानसभा

चुनाव से पहले ही जीतन राम मांझी फिर से एनडीए में शामिल होने जा रहे हैं। यह खबर

आज सही साबित हो गयी। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने आज इसका

विधिवत एलान कर दिया। हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने

एनडीए से जुड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने बुधवार को इसका औपचारिक एलान किया।

जीतन राम मांझी ने कहा कि हमने जनता दल (यूनाइटेड) के साथ गठबंधन किया है और

एनडीए का हिस्सा बन गए हैं। जीतन राम मांझी ने इस दौरान लालू प्रसाद यादव पर भी

निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हम लालू प्रसाद के गलत चक्कर में पड़ गए। राष्ट्रीय

जनता दल (आरजेडी) में भाई-भतीजावाद है। महागठबंधन से अलग होने के बाद जीतन

राम मांझी ने कहा कि हम बिना शर्त जेडीयू के साथ गठबंधन कर रहे हैं। अभी सीटों को

लेकर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है। इसे बाद में बैठकर सुलझा लेंगे। बिहार के पूर्व

सीएम ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत दिलाने के लिए पूरा जोर

लगाएंगे। जीतन राम मांझी ने आगे कहा कि जहां से सम्मान मिला है, इसलिए हमने

उन्हीं के साथ जाने का फैसला लिया है। हम जेडीयू के नजदीक हैं और उनका पार्टनर

बनकर रहने का निर्णय लिया है। बता दें कि आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में

लगातार उपेक्षा से नाराज जीतन राम मांझी ने 22 अगस्त को अपनी पार्टी की कार्यसमिति

की बैठक करके अलग होने का फैसला कर लिया था।

राष्ट्रीय खबर ने काफी पहले ही संकेत दिया था बदलाव का

जीतन राम मांझी ने 27 अगस्ते को मुख्यतमंत्री आवास पहुंचकर नीतीश कुमार से

मुलाकात भी की थी, जिसके बाद उनके एनडीए के सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ने के

कयास लगाए जाने लगे थे। जेडीयू के साथ गठबंधन के बाद जीतनराम मांझी की घर

वापसी हुई है, क्योंकि वह जेडीयू में ही रहे हैं और फिर अपनी पार्टी बनाकर एनडीए के साथ

मिलकर पिछला चुनाव लड़े थे। 2014 लोकसभा चुनाव में बुरी तरीके से हारने के बाद

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद उन्होंने जीतन राम

मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि, करीब 9 महीने के बाद वह मांझी को हटाकर खुद

सीएम बन गए थे। इसके बाद मांझी ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी। 2015 का

विधानसभा चुनाव मांझी ने एनडीए के साथ लड़ा था, लेकिन महज एक सीट ही जीत सके

थे। इसके बाद उन्होंने महागठबंधन से हाथ मिला लिया था। 2019 का लोकसभा चुनाव

मांझी ने महागठबंधन के साथ मिलकर लड़ा था। 


 

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