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ED ने भगोड़े अभियंता राम विनोद प्रसाद को किया गिरफ्तार, महिला मित्र की वजह से पकड़ाया अभियुक्त

  • अपनी कथित गर्लफ्रेंड के घर छिपा था अभियुक्त
  • परिवार के लोगों तक को नहीं थी जानकारी
  • ईडी ने गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ा
  • विभागीय अधिकारी बाद में करेंगे पूछ ताछ
  • सरकार का ढेर सारा पैसा लेकर गायब था

रांची : ED ने कई वर्षों से फरार चल रहे और कई घपलों क मास्टरमाइंड बताये गये

अभियंता राम विनोद प्रसाद को अंतत: धर दबोचा है। उसे उसके कथित महिला मित्र

के घर से पकड़ा गया है। जो सूत्रों की माने तो काफी कोशिशों का सफल नतीजा रहा है

प्रवर्तन निदेशालय के लिए। दरअसल वह अपने महिला मित्र की मां के घर में

कोलकाता में छिपा हुआ था। दूसरी तरफ इस कार्रवाई के पहले से राम विनोद प्रसाद

के परिवार के अपने लोगों को इन ठिकानों की कोई जानकारी नहीं थी। दिल्ली में रहने

वाला उनका परिवार भी उसके लगातार लापता होने की वजह से काफी परेशान था।

ED ने लगाईं सभी कोशिशे, तकनीक से लेकर भौतिकी तक

मिली जानकारी के अनुसार ईडी के अधिकारियों की एक टीम काफी समय से उसे

पकड़ने के लिए लगी हुई थी। इसी क्रम में उसकी गतिविधियों को सूचना तकनीक के

आधार पर देखा जा रहा था। इसी खोजबीन से रांची के ईडी अधिकारियों को उसके

मुंबई से कोलकाता आने का संकेत मिला था। इसी संकेत के आधार पर रांची से ईडी

की दो लोगों की टीम रातों रात कलकता जा पहुंची। रात दो बजे दमदम पुलिस थाने से

पुलिस बल साथ लेकर ईडी के अधिकारी पूरी रात छह से सात स्थानों पर छापामारी

की। हालांकि उसके बाद भी अभियुक्त का कोई पता नहीं चल पाया था। इस वजह से

पुलिस टीम को छोड़ देने के बाद भी रांची से गये अधिकारी लगातार उसके ठिकाने की

पहचान करने की कोशिश कर रहे थे। इसी प्रयास के तहत दूसरे पहर में जब एक

अनजान फ्लैट पर छापा मारा गया तो वह पकड़ा गया। शिफोन गोम्स नामक उसकी

महिला मित्र की मां उसके साथ पायी गई जो राम विनोद के पकड़ाने की वजह बनी।

कोविड परिक्षण में निगेटिव परिणाम

उसे पकड़ने के बाद स्थानीय पुलिस को इस गिरफ्तारी की जानकारी देने के बाद ईडी

की टीम उसे आनन फानन में रांची ले आयी है। यहां कोर्ट में पेशी के बाद कोर्ट के

आदेश पर उसका व ईडी अधिकारियों ने अपना सबसे पहले कोविड परीक्षण कराया।

जहां लंबे इंतजार के बाद सभी का रिपोर्ट निगेटिव आया। फिलहाल पुलिस के सुपुर्द

कर दिया गया है। ईडी की टिम ने गिरफ्तार अभियुक्त राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को

सेंट्रल जेल भेज दिया है। ईडी के अधिकारी बाद में उससे तमाम मामलों के बारे में

पूछताछ करेंगे। बस मलाल था तो अभियुक्त के पकड़े जाने का, जो अब पुरा हो गया

है। ज्ञात हो कि अभियुक्त के खिलाफ कई थानों में लगभग 10-12 केस चल रहे है और

ईडी द्वारा रजिस्टर्ड एक केस के तहत पुरा घोटाले का मामला लगभग 18-20 करोड़

रुपये का है, जिसमे अबतक 4-5 करोड़ की संपत्ति ईडी जब्त भी कर चुकी है।

प्रशासनिक अधिकारियों की बढ़ सकती है परेशानियां

कई मामलों में वांछित होने के दौरान उसकी करोड़ों की संपत्ति पहले ही जब्त की जा

चुकी है, जिसमे जमीन, घर, वाहन, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपाजिट आदि कई दस्तावेज

शामिल है। वैसे समझा जाता है कि पूछताछ में राम विनोद से कई राज भी खुल कर

सामने आएगा। अभियंता के अचानक गिरफ्तार होने से कुछ प्रशासनिक अधिकारियों

की परेशानी भी बढ़ सकती है, जो अपने कार्यकाल में इस अभियंता पर जरूरत से

अधिक भरोसा कर काम के एवज में उसे करोड़ों का अग्रिम भुगतान करते चले गये थे।

पूछ ताछ में इस मेहरबानी का भी कोई राज अगर होगा तो वह सामने आ सकता है।

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