पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी क्षेत्र बदलकर साइबेरिया की तरफ जाएगा

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  • 1980 से तेज हो गयी बदलाव की गति

  • पहले आर्कटिक समुद्र के बीच में था

  • पृथ्वी के अंदर तैर रहा है तरल लोहा

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः पृथ्वी पर अब चुंबकीय क्षेत्र का बदलाव भी नजर आने लगा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह परिवर्तन काफी तेजी से हो रहा है।

इस बदलाव की वजह से वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि अगले पचास वर्षोँ में पृथ्वी का उत्तरी छोर अब रुस के साइबेरिया के पास पहुंच जाएगा।

वैज्ञानिकों ने इस बदलाव को समझते हुए खास तौर पर दिशा निर्धारण के कंपास में भी इसे देखा है।

पहले उत्तरी चुंबकीय क्षेत्र जहां की तरफ इशारा करता था, अब वह स्थान बदल गया है।

वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक पहले पृथ्वी का उत्तरी चुंबकीय केंद्र उत्तरी कनाडा की तरफ था।

करीब एक सौ वर्ष पहले इसे आर्कटिक सागर के बीच में पाया जाता था।

अब जिस गति और दिशा की तरफ यह बदल रहा है, उससे अगले पचास वर्षों में इसके साइबेरिया में पहुंच जाने की उम्मीद की जा रही है।

वैज्ञानिकों की मानें तो यह बदलाव हाल के दिनों में काफी तेज भी हो चुका है।

ओस्लो (कनाडा) से मिली जानकारी के मुताबिक इस पर शोध करने वाले वैज्ञानिक अब चुंबकीय ध्रुव के बदलने का एक मॉडल भी तैयार कर चुके हैं।

जिससे यह पता चलता है कि इसमें कब और कैसे बदलाव हुए हैं।

इसी मॉडल के आधार पर इस छोर के रुस के साइबेरिया की तरफ बढ़ने का प्रमाण मिल रहे हैं।

इस शोध दल से जुड़े ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के प्रमुख सियारन बेगान ने कहा कि पिछली सदी के प्रथम 80 वर्षों तक इसमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ था।

वर्ष 1980 के बाद से यह स्थिति तेजी से बदलने लगी है।

अब वर्तमान में यह बदलाव करीब 50 किलोमीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से होने लगा है।

पृथ्वी का नया चुंबकीय मॉडल अगले साल पेश होगा

वैज्ञानिकों द्वारा चुंबकीय क्षेत्र का एक मॉडल अगले वर्ष दुनिया के सामने रखा जाने वाला है।

लेकिन बदलाव में आयी तेजी के बाद अमेरिकी सेना ने वैज्ञानिकों से इस मॉडल को जल्द पेश करने का अनुरोध किया है।

समुद्र और आकाश में दिशा निर्धारण के लिए जिन उपकरणों का इस्तेमाल होता है, वे इसी चुंबकीय क्षेत्र पर आधारित होते हैं।

इसलिए चुंबकीय क्षेत्र में होने वाले बदलाव के मुताबिक इनमें भी सुधार करना जरूरी है वरना आकाश में उड़ते हुए अथवा समुद्र में चलते जहाज गलत दिशा की तरफ बढ़ जाएंगे।

खास तौर पर सैन्य अभियानों के लिए यह भूल बड़ा नुकसान कर सकती है।

इसी तरह सामान्य उड़ान और नौ परिवहन में भी इस गड़बड़ी से परेशानी हो सकती है।

सभी प्रमुख सैन्य शक्तियों को इसी बदलाव की वजह से अपने अंदर बहुत कुछ बदलना पड़ रहा है।

इधर चुंबकीय क्षेत्र में हो रहे इस बदलाव के कारणों की जांच में लगे वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि

पृथ्वी की गहराई में उबल रहे लावा के बीच मौजूद तरल लौह अयस्क भी

अब अंदर ही अंदर साइबेरिया की तरफ सरकता जा रहा है।

30 जनवरी को जारी हो सकती है एक रिपोर्ट

इस बारे में आगामी 30 जनवरी को एक रिपोर्ट जारी किये जाने की घोषणा कर दी गयी है।

कोलाराडो विश्वविद्यालय के जिओमैग्नेटिस्ट आर्नड चूलियट का कहना है कि

इस बदलाव की गति इतनी तेज होती जा रही है कि इससे पृथ्वी की सतह के ऊपर बड़े हादसे भी हो सकते हैं।

खास तौर पर दिशा भ्रम की वजह से यह गड़बड़ियां हो सकती हैं।

लिहाजा इन्हें सुधारा जाना बहुत ही जरूरी है।

वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि इस बदलाव की वजह से अपने स्मार्टफोन से अपना अथवा अपने गंतव्य का निर्धारण करने वालों को भी इस चुंबकीय क्षेत्र के बदलाव से परेशानी हो सकती है।

लिहाजा नये सिरे से इन्हें तैयार कर सभी लोगों को नया चुंबकीय क्षेत्र उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।

ऐसा खासकर उन उपकरणों के लिए है, जो सैटेलाइट रेडियो तरंगों के आधार पर काम कर रहे हैं।

दूसरे जमीनी टावर से काम करने वाले उपकरणों पर इसका अभी बहुत कम प्रभाव पड़ेगा

लेकिन पांच साल के भीतर उन्हें भी बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी।

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