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पृथ्वी का आठवां महाद्वीप लाखों वर्ष पहले डूब गया था

  • जीलैंडिया महाद्वीप के पूरे इलाके की मैपिंग

  • पूरे इलाके की मैपिंग अब वेबसाइट पर भी

  • समुद्र में साढ़े तीन हजार फीट की गहराई में

  • गोंडवाना प्लेट से अलग हुआ था यह

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी का आठवां महाद्वीप था। इसकी चर्चा बहुत पहले से होती आयी है।

लेकिन पहली बार वैज्ञानिकों ने इस पूरे इलाके की मैपिंग कर ली है। इस आठवें महाद्वीप

का पता चलने के बाद पहले का वैज्ञानिक सिद्धांत फिर से बदलता हुआ नजर आ रहा है।

पहले यह माना गया था कि दरअसल प्राचीन पृथ्वी के सात ही महाद्वीप थे। अब इस

आठवें की खोज हुई है। आधुनिक उपकरणों की मदद से यह भी पता लगाया गया है कि

पृथ्वी का आठवां महाद्वीप दक्षिण प्रशांत महासागर में करीब साढ़े तीन हजार फीट की

गहराई में डूबा हुआ है। इसके पहले से ही एक अन्य महाद्वीप अटलांटिस के डूबे होने की

खोज हो चुकी है।

पानी में डूब जाने वाले पृथ्वी का आठवां महाद्वीप जीलैंडिया नाम से जाना जाता है। अब

तो आधुनिक तकनीक की मदद से उस पूरे इलाके की मैपिंग भी कर ली गयी है। न्यूजीलैंड

के जीएसएस साइंस के वैज्ञानिकों ने यह काम कर दिखाया है। इसमें पूरे महाद्वीप के

आकार प्रकार और ढांचों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है। दरअसल पानी में डूबे

इस इलाके की मैपिंग का काम पूरा होने के बाद उसके क्षेत्रफल सहित अन्य विषयों की

जानकारी मिल गयी थी। पानी में लाखों वर्ष पहले डूब चुके इस विशाल भूखंड के

टेक्नोनिक प्लेटों का विवरण भी तैयार किया गया है। इसके आधार पर इस महाद्वीप के

मॉडल को तैयार करने का काम भी चल रहा है।

पृथ्वी का आठवां महाद्वीप अब डिजिटल मैपिंग पर

इस अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक निक मोरटाइमर ने कहा कि सारे विवरण वेबसाइट पर भी

उपलब्ध करा दिये गये हैं। इससे फायदा यह होगा कि इसके बारे में जानकारी रखने की

इच्छा रखने वाले पानी के भीतर डूबे उस भूखंड के बारे में सब कुछ जान सकेंगे। यहां तक

कि वर्चुयली वहां तक जा भी सकेंगे। उपलब्ध आंकड़ों और मैपिंग के आधार पर वैज्ञानिक

मानते हैं कि इस पानी में डूबे पृथ्वी का आठवा महाद्वीप करीब पचास लाख वर्ग

किलोमीटर का इलाका था। यह वर्तमान ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप से आकार में आधा था।

अब उसका सिर्फ छह प्रतिशत इलाका ही पानी के बाहर नजर आता है। शेष सारा भूखंड

टेक्टोनिक प्लेटों के घर्षण की वजह से नीचे दबता चला गया है । इसके जो हिस्से जमीन

के ऊपर हैं वे न्यूजीलैंड के उत्तर और दक्षिण में द्वीप की शक्ल में हैं। इन्हें न्यू

कैलिडोनिया के नाम से जाना जाता है।

जब इस पूरे भूखंड का मैप बनाने का काम प्रारंभ हुआ तो यह देखा गया कि पानी में डूब

चुक इस महाद्वीप में पर्वत और समुद्री तट भी मौजूद थे। इसमें वैस स्थानों की भी

पहचान हुई है जो उस महाद्वीप के ज्वालामुखी के हिस्से थे। यानी पानी में डूबने के पहले

तक पृथ्वी का आठवा महाद्वीप अपने दायरे में जीवित ज्वालामुखी भी रखता था।

दरअसल इस डूबे हुए महाद्वीप की खोज उस दीर्घकालिन योजना के तहत हुई है, जिसमें

वर्ष 2030 तक पूरी धरती के सारे समुद्री गहराई के इलाकों की मैपिंग पूरा किया जाना है।

समुद्र के अनेक इलाकों तक अब भी इंसान नहीं पहुंच पाया है। आधुनिक यंत्रों की मदद से

भी पृथ्वी के समुद्री के सारे इलाकों की पहचान तक नहीं हो पायी है।

गोडवाना प्लेट से 50 मिलियन वर्ष पहले टूटा था

शोध में इस बात के संकेत मिले हैं कि यह इलाका करीब तीस से 50 मिलियन वर्ष पहले ही

गोंडवाना प्लेट से अचानक टूटकर अलग हो गया था। यह उस वक्त मुख्य प्लेट यानी

गोंडवाना प्लेट से टूटने वाला पहला हिस्सा था।


 

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