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अंतरिक्ष में पृथ्वी के विकल्प की तलाश में एक और ग्रह मिला

  • नासा के टेस मिशन में पृथ्वी के जैसा एक और इलाका देखा गया

  • पृथ्वी का विकल्प तलाशने का काम जोरों पर जारी

  • जीवन बसाने लायक अंतरिक्ष में इलाकों की तलाश

  • प्रारंभिक आंकड़ों के बाद आगे की शोध जारी है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अंतरिक्ष में पृथ्वी के विकल्प की तलाश जोर शोर से जारी

है। दरअसल किसी कारण से अगर इंसानों को अंतरिक्ष में कहीं और

बसना पड़े, उसकी तमाम संभावनाओं पर वैज्ञानिक गौर कर रहे हैं।

कुछ ग्रहों और यहां तक की चंद्रमा में जीवन के लायक परिस्थिति पैदा

करने का काम भी प्रारंभ हो चुका है। अब तक जिन इलाकों को इसके

लायक समझा गया है, उन सभी में बर्फ की अवस्था में पानी मौजूद है।

पानी के मौजूद होने के बाद ही पृथ्वी का जीवन वहां पनप सकता है।

इसी क्रम में नासा के टेस मिशन को एक नई कामयाबी मिली है। जहां

पर पृथ्वी जैसा माहौल वाला ग्रह खोजा गया है वह यहां से करीब एक

सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। नासा ने अपनी 235वीं बैठक में इस खोज

की औपचारिक घोषणा कर दी है। अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी

की होनोलुलु में यह बैठक हुई थी।

अंतरिक्ष में पृथ्वी के विकल्प की तलाश भविष्य की सोच में

नासा के टेस मिशन ने पृथ्वी जैसे इस ग्रह को जहां खोजा है, वह

दरअसल ग्रहों का एक समूह है। इस समूह के बीच आम तौर पर यह

ग्रह सूर्य एवं अन्य तारों की रोशनी के बीच छिपा रहता है। इस

खगोलीय स्थान को टीओआइ 700 कहा जाता है। आकार में यह सूर्य

का करीब 40 फीसद है और एक तारों के चारों तरफ परिक्रमा करने

वाले तीन ग्रहों में से एक है। ऑक्सीजन की मौजूदगी की तकनीक

विकसित होने के बाद इसके जरिए पृथ्वी के बाहर जीवन की तलाश का

काम तेज हो चुका है। साथ ही खगोल वैज्ञानिक उन इलाकों की

पहचान कर रहे हैं जहां भविष्य में इंसानों की बस्ती बसायी जा सके।

टीओआइ 700 डी की स्थिति तारे की परिक्रमा करने वाले तीन ग्रहों में

से सबसे अधिक दूरी पर है। अपने तारे की परिक्रमा करने में इसे

जितना वक्त लगता है वह पृथ्वी के 37 दिनों के बराबर है।

अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से अब तक जो आंकड़े मिले हैं, उसके

मुताबिक इस ग्रह को भी पृथ्वी के मुकाबले 86 प्रतिशत ऊर्जा सूर्य से

मिलती है। लेकिन इसकी स्थिति के बारे में सिर्फ यह पता चला है कि

इसकी एक दिशा हमेशा ही दिन की अवस्था में होती है। तारे की

परिक्रमा करने वाले दो अन्य ग्रहों में से जो सबसे करीब है वह पृथ्वी के

ही आकार का है। इसकी परिक्रमा की अवधि पृथ्वी के दस दिन के

बराबर है। बाहर चक्कर काटते तीसरे ग्रह का आकार थोड़ा बड़ा है और

वह 16 दिन में अपने तारे की एक चक्कर लगाता है।

इस इलाके के ग्रहों का दिन पृथ्वी से काफी बड़ा

नासा के एस्ट्रेफिजिक्स विभाग के निदेशक पॉल हर्टज ने इस बार में

बताया कि टेस यान को खास इसी काम के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया

है। वहां से मिलने वाले आंकड़ों के विश्लेषण के बाद जिन ग्रहों को वह

पृथ्वी के लायक पाता है, उन पर पृथ्वी पर स्थापित अत्याधुनिक

खगोल दूरबीनों से लगातार नजर रखी जाती है।

वैसे पूर्व के अभियानों में भी वैज्ञानिकों को यह तारा नजर आया था।

लेकिन उस वक्त इसे अत्यधिक गर्म माना गया था। अब उस गलती

को सुधार लिया गया है। मजेदार और उल्लेखनीय तथ्य यह है कि

वैज्ञानिकों की इस गलती को एक स्कूली छात्र ने सुधारा है। यह छात्र

भी टेस की टीम के साथ काम कर रहा है। उसी ने आंकड़ों का विश्लेषण

कर पाये गये तथ्यों के आधार पर वैज्ञानिक दल का इस गलती की

तरफ ध्यान आकृष्ट किया था।

नासा के वैज्ञानिक मान रहे हैं कि वर्ष 2021 में अंतरिक्ष में भेजे जाने

वाले जेम्स वेब टेलीस्कोप के चालू होने के बाद इसके बारे में और

अधिक जानकारी मिल पायेगी।

पृथ्वी के लायक कौन सा इलाका है, इसे समझने के लिए भी टेस

अभियान से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक तकनीक विकसित कर ली है। टेस

यान से आंकड़े प्राप्त होने के बाद उनका वैज्ञानिक तथ्यों का गहन

विश्लेषण किया जाता है।

जेम्स बेव टेलीस्कोप से मिलेगी भविष्य की जानकारी

इस विश्लेषण के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जाती है कि

जिस ग्रह अथवा तारा को देखा गया है वहां का तापमान और बाकी

परिस्थितियां पृथ्वी से कितनी मिलती जुलती है। इसी क्रम में टेस

अभियान ने सुदूर अंतरिक्ष में जो सूर्यों के बीच घूमते एक तारे की खोज

की थी, जिसकी परिस्थितियां भी पृथ्वी के लायक है। दो बड़े सूर्य के

बीच होने की वजह से उसे आम तौर पर नहीं देखा जा सकता है।

लेकिन आधुनिक विज्ञान ने तेज रोशनी के बीच छिपे इस इलाके को

भी स्पष्ट किया है। एक ऐसा ग्रह स्कार्सडेल हाई स्कूल के एक छात्र

वूल्फ कूकियर ने खोजा है। वह गर्मी की छुट्टी में नासा के गोडार्ड स्पेस

सेंटर में काम करने आया था। दोनों सूर्य के बीच जब अंधेरा होता है उस

वक्त बहुत कम समय के लिए यह नजर आता है।

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  1. […] अंतरिक्ष में पृथ्वी के विकल्प की तलाश … नासा के टेस मिशन में पृथ्वी के जैसा एक और इलाका देखा गया पृथ्वी का विकल्प … […]

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