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कोरोना काल के दौरान आसमान में कई खगोलीय घटनाएं मिली देखने को

  • उल्कापिंडों की बारिश से जगमगाएगा आसमान

  • सूरज पहले से ही चला गया है लॉक डाउन में

  • सौरमंडल में लगातार हो रही है नई घटनाएं

  • 12 जुलाई से शुरू होगा ग्रहों का हेरफेर

प्रतिनिधि

नई दिल्ली: कोरोना काल के दौरान आसमान में कई खगोलीय घटनाएं देखने को मिल

रही हैं। जुलाई माह में भी कुछ ऐसी ही अद्भुत चीजें देखने को मिलेंगी। इसके पहले से ही

सौर जगत में लगातार अजीबोगरीब घटनाएं घटित होने की जानकारी खगोल वैज्ञानिक

लगातार देते जा रहे हैं। इसी के तहत हमें यह जानकारी पहले ही मिल चुकी है कि सौर

जगत में हुए बदलाव के तहत अभी अपना सूर्य भी काफी लंबे समय के लिए लॉक डाउन

जैसी स्थिति में है। यानी इस दौरान सूर्य की तपिश काफी कम हो चुकी है। यह स्थिति

औसतन चालीस वर्षों की भी हो सकती है क्योंकि पूर्व में भी ऐसा हो चुका है। इस दौरान

गर्मी के मौसम में भी अत्यधिक ठंड पड़ने का पूर्व इतिहास हमारे पास पहले से उपलब्ध है।

लेकिन ग्रहों के फेरबदल के बारे में आर्यभ˜ प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिकों के

अनुसार 12 जुलाई को चंद्रमा और मंगल ग्रह काफी करीब आएंगे। इसके अलावा जुलाई

माह में ही सौरमंडल में तीन ग्रहों की अपोजिशन घटनाएं होंगी। इसमें पृथ्वी व सूर्य के

साथ कोई एक ग्रह एक सीध में आएगा। यह घटना 14 जुलाई को होगी। इसके अलावा माह

के अंत में कई उल्कापिंडों की बारिश भी होगी। जिससे आसमान में रंग-बिरंगी रौशनी

बिखरेंगी।

एरीज के खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार 14 जुलाई को हमारे सौर

परिवार का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में होंगे। इस दौरान पश्चिम

दिशा में जब सूर्य अस्त हो रहा होगा, तो पूरब में बृहस्पति उदय हो रहा होगा, जबकि बीच

में पृथ्वी होगी। चूंकि बृहस्पति धरती के बेहद करीब होगा। इसलिए ये नजारा काफी

खूबसूरत दिखेगा।

कोरोना काल में हमें ये ग्रह भी करेंगे रोमांचित

खगोलविदों के अनुसार 16 जुलाई को प्लूटो ग्रह अपोजिशन की स्थिति में होगा। चूंकि ये

धरती से दूर है इसलिए इसे देखने के लिए दूरबीन का सहारा लेना पड़ेगा। इसी तरह 21

जुलाई को शनि अपोजिशन में होगा। ये पृथ्वी के काफी करीब होगा। इस दौरान शनि ग्रह

से चमकदार छल्ले निकलते हुए देखे जा सकते हैं। इस खबूसूरत दृश्य को दूरबीन से देखा

जा सकता है। इन दोनों ही इलाकों में नजर रखने वाले अंतरिक्ष यानों से वहां के वलयों और

इन ग्रहों का चक्कर काट रहे ग्रहों और उपग्रहों के बारे में भी जानकारी दी है। वहां के बादलों

को भी यान के कैमरों में रिकार्ड किया जा चुका है।

बुध ग्रह का अनोखा नजारा भी दिखेगा

26 जुलाई की सुबह सौरमंडल में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। सूर्योदय से पहले बुध

ग्रह को देखा जा सकेगा। क्योंकि ये आसमान में क्षितिज से 17 डिग्री ऊपर होगा। बाकी

दिनों में ये सूर्य ग्रह के करीब होता है। इसलिए इस पर चमक पड़ती है। जिसके कारण इसे

खुली आंखों से देखना संभव नहीं होता है। मगर 26 जुलाई को इसे दूरबीन से देखा जा

सकेगा। इसके पहले भी हम आसमान पर पृथ्वी के काफी करीब से गुजरते एक उल्कापिंड

की वजह से आसमान पर बुध ग्रह को हरे रंग के चमकीली अवस्था में देख चुके हैं।

आसमान में होगी आतिशबाजी

जुलाई महीने के आखिर में उल्कापिंडों की बरसात होगी। ये सिलसिला 28-29 की रात को

देखने को मिलेगा। उस दिन चांद का आकार इसके 66 फीसद होने कारण उल्कावृष्टि के

नजारे को चंद्रमा के अस्त होने के बाद बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा। कुल मिलाकर यह

महीना अंतरिक्ष में नई गतिविधियों के देखने का भी महीना होगा।

भारतीय नक्षत्रों की इन गतिविधियों के अलावा भी खगोल वैज्ञानिक सौर जगत में निरंतर

हो रहे बदलावों को पहली बार अब बेहतर तरीके से देख पा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि

हब्बल टेलीस्कोप के बदले जब जेम्स वेब टेलीस्कोप अंतरिक्ष में स्थापित हो जाएगा तो

उसकी नई तकनीकों की वजह से सौर जगत की उन गतिविधियों को देखा जा सकेगा, जो

वर्तमान में विज्ञान के विकसित नहीं होने की वजह से वैज्ञानिकों की आंखों से ओझल हैं।

वैसे कई अंतरिक्ष अभियानों की बदौलत भी सौर जगत की अनोखी गतिविधियों की

जानकारी अब हमें मिल रही है। नासा के मंगल अभियान में भेजा गया रोवर भी अब वहां

की उबड़ खाबड़ सतह का दौरा कर रहा है और वहां के बारे में नई नई जानकारी भेज रहा है।

उसी तरह चीन का चंद्रयान रोवर भी वहां की खाइयों के नीचे उतरकर वहां के नमूने

एकत्रित कर रहा है। कोरोना काल इस लिहाज से भी अनूठा होने जा रहा है।


 

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