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दुर्गा पूजा का आयोजन चुनाव से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है

  • नीतीश कुमार सेक्यूलर चरित्र के नेता हैं

  • हमारी सरकार बनी तो शराबबंदी खत्म होगी

  • इस सरकार में काम कम और भाषण ज्यादा

  • इस बार तो महागठबंधन की सरकार बनेगीः अजीत शर्मा

दीपक नौरंगी

भागलपुरः दुर्गा पूजा के आयोजन पर प्रशासन इस तरीके से रोक लगाये, यह बिल्कुल भी

उचित फैसला नहीं है। हर कोई जानता है कि यह हिंदुओं का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है।

इसी मौके पर नवरात्र भी आता है। अनेक लोग और महिलाएं इसी धार्मिक श्रद्धा में उपवास

भी रखती हैं। इस त्योहार में मां दुर्गा की पूजा नहीं हो इससे अधिक दुर्भाग्य की बात कुछ

नहीं हो सकती है। यह बयान भागलपुर के वर्तमान विधायक अजीत शर्मा का है।

वीडियो में जान लीजिए उन्होंने सारे मुद्दों पर क्या कुछ कहा

उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के नियमों और प्रावधानो की जानकारी हरेक को है। इस पूजा में

प्रतिमा मिट्टी की बनती है और पूजन के माध्यम से उसमें प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है।

अब सरकार हिंदुओं को उनके धार्मिक आचरण से कोरोना के बहाने रोक रही है, यह फैसला

गलत है। प्रशासन को चाहिए कि वह सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना स बचाव के अन्य

प्रावधानों को लागू करते हुए दुर्गा पूजा के आयोजन की अनुमति दी। जब सरकार चुनाव

कराने में कोरोना के खतरों के उठा रही है तो हिंदुओं को पूजा करने से क्यों रोका जा रहा है।

चुनाव के मौके पर पूछे गये राजनीतिक सवालों के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह आकलन

या अनुमान ही गलत है कि इस बार राजग की सरकार बनने वाली है। विधायक अजीत

शर्मा ने कहा कि विपक्षी गोलबंदी के अंदरखाने में क्या कुछ चल रहा है, इस बारे में वह

कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन वह व्यक्तिगत तौर पर नीतीश कुमार को सेक्यूलर

मानते हैं। इसी तरह लोग स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी को भी सेक्यूलर ही मानते थे।

इसलिए नीतीश कुमार को अपनी इस छवि का ध्यान रखते हुए भाजपा के साथ जाना ही

नहीं चाहिए था। लेकिन अब चुनाव नजदीक है और यह परिणाम ही स्पष्ट कर देगा कि

इस बार महागठबंधन की सरकार बनेगी।

दुर्गा पूजा के अलावा राजनीतिक मुद्दों पर भी बात चीत हुई

महागठबंधन की सरकार बनने पर शराबबंदी के अपने पूर्व बयान पर फिर से जब सवाल

पूछा गया तो उन्होंने अपनी पुरानी बात ही दोहरा दी कि वह शराबबंदी खत्म करने के पक्ष

में हैं। उन्होंने कहा कि जब शराबबंदी का फैसला लागू किया गया था तो वह इसके पक्ष में

थे। अब काफी दिन बीत चुके हैं, जिन्हें इसकी आदत से दूर करना था, वह दूर हो चुके होंगे।

लेकिन सच्चाई यह भी है कि इस प्रतिबंध के बाद भी पूरे राज्य में शराब धड़ल्ले से बिक

रही है। जिसका कोई लाभ राज्य को नहीं मिल रहा है। इसलिए वह इस बात के लिए प्रयास

करेंगे कि महागठबंधन की सरकार बनते ही शराबबंदी का फैसला बदला जाए। कड़े नियमों

के तहत शराब की बिक्री हो और उससे प्राप्त होने वाले राजस्व से बिहार में औद्योगिक

इकाइयां स्थापित की जाएं। ताकि यहां के नौजवानों को रोजगार के लिए अन्यत्र नहीं

जाना पड़े।

चुनावी समीकरण में नीतीश कुमार के राजग खेमा से बाहर आने के सवाल पर श्री शर्मा ने

कहा कि यह सिर्फ अटकलबाजी है। लेकिन अगर वाकई ऐसा होता भी है तो नीतीश कुमार

को महागठबंधन में शामिल करने का फैसला तो बड़े नेताओं को लेना है। श्रीमती सोनिया

गांधी और राहुल गांधी ही नीतीश कुमार को फिर से अपने गठबंधन में अथवा दल के साथ

शामिल करने के विषय पर फैसला ले सकते हैं।


 

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