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दुर्गापूजा गाइड लाइन का पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल ने कड़ा विरोध किया

  • यह बहुसंख्यक समाज की आस्था के खिलाफ है

  • प्रशासन का पत्र महान आस्था के पर्व के खिलाफ

  • लोग सामाजिक दूरी बनाये रखना जान गये

  • जुलूस भी तो निकल रहे हैं फिर प्रतिबंध क्यों

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दुर्गापूजा गाइडलाइन को लेकर जनता के बीच जारी नाराजगी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री

बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री को सीधा पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि

हिंदुओं के महान आस्था का पर्व दशहरा मनाने को लेकर आपकी सरकार द्वारा जारी

लॉकडाउन के प्रतिबंध पत्रांक संख्या 890 सीएस दिनांक 7 अक्टूबर 2020 के आलोक में

जारी दिषा-निर्देष की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ। झारखंड में कोरोना

महामारी का ग्राफ अब नीचे आ रहा है। अब झारखंड प्रदेश की जनता कोरोना से लड़ने,

सामाजिक दूरी और संयम रखते हुए विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना जान

गए हैं और आदत भी बन गई है। दशहरा पर्व मनाने के संबंध में राज्य द्वारा निर्गत

दुर्गापूजा गाइडलाइन आज समाज में हो रहे व्यवहारिकता से दूर और बहुसंख्यक समाज

की आस्था के अनुकूल प्रतीत नहीं हो रहा है। इस संबंध में अनेक धार्मिक संगठन के लोगों

ने मुझसे संपर्क किया और अपनी भावना को भी व्यक्त करते हुए बताया कि किस तरह से

प्रशासन के नाक के नीचे सरकार द्वारा निर्गत लॉकडाउन के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते

हुए भीड़ भरे जुलूस निकाले जा रहे हैं और आए दिन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है जिसका

मौन समर्थन कहीं न कहीं सरकार द्वारा प्राप्त है। स्व. हाजी हुसैन अंसारी जी को

श्रद्धांजलि देते हुए उनके जनाजे की जलसा में बगैर सोशल डिस्टेनसिंग के हजारों का

हुजूम जिसमें खुद आप और आपके मंत्रिमंडल के कई सहयोगी भी शामिल थे, की ओर भी

आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं जो इस तथ्य को सत्यापित करता है।

दुर्गापूजा गाइडलाइन का उल्लंघन तो कई जगह हो रहा है

झारखंड में सरकार की ओर से विभिन्न स्थलों यथा थाना परिसरों एवं दीदी किचन के

माध्यम से एवं समाज के अन्य संगठनों द्वारा चलाये गए लॉकडाउन के प्रारंभ से ही

प्रवासी मजदूरों, राहगीरों और गरीबों के लिए भोजन वितरण के कार्य व्यवस्था से आप

भली-भाँति वाकिफ होंगे कि जब सामाजिक दूरी बनाकर लाखों लोगों को भोजन वितरण

कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया, जो दशहरे में प्रसाद बांटने से ज्यादा ही

प्रबंधन का प्रदर्शन था। ऐसे ही संगठनों द्वारा झारखंड में हर जगह पर दुर्गापूजा तथा

पंडाल का भी आयोजन किया जा रहा है तो इस तरह के आयोजन में फिर प्रतिबन्ध क्यों

लगाया गया है ? अपने ही राज्य में चुनाव आयोग के द्वारा विभिन्न राजनैतिक पार्टियों

को जिसमें आपकी पार्टी भी शामिल है, चुनावी सभा की अनुमति दी गई है जिसमें हजारों

लोग शामिल हो रहे हैं जिसे समाचार पत्र, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के

माध्यम से देखा जा सकता है। क्या चुनावी पर्व से भी हिंदुओं का मुख्य त्योहार दुर्गापूजा

का कम औचित्य है?

उपयुक्त तथ्यों के आधार पर पुनः आपसे आग्रह करना चाहता हूँ कि दशहरा पूजा पंडाल

के लिए जो सरकारी निषेधाज्ञा जारी किया गया है जिसमें मूर्तिं साइज, प्रसाद वितरण

विधि, विसर्जन विधि एवं पूजा विधि सभी मे ढील देने की आवश्यकता है। कभी-कभी देवी

की पूजा अर्चना से भी महामारी से मुक्ति मिलती है हमारे पूर्वजों ने और दुर्गा सप्तशती ने

ऐसा ही कहा गया है –

दुर्गा सप्तशती का उल्लेख कर पत्र लिखा है

विश्वेश्वरित्वंपरिपासिविश्वं,
विश्वात्मिका धारयसीतिविश्वम्।
विश्वेशवन्द्याभवतीभवन्ति,
विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥

विपक्षी दल के नेता के रूप में राज्य की जनता की भावना को आप तक पहुँचाना मेरा

दायित्व है। दुर्गा पूजा सिर्फ हिंदूओं का ही नहीं अपितु सभी धर्म के लोगों का शक्ति और

स्वास्थ्य वर्धन हेतु आस्था और विश्वास का प्रतीक है। मैं आशा करता हूँ आप निषेधाज्ञा

पत्रांक संख्या 890 सीएस दिनांक 7 अक्टूबर 2020 को निरस्त करेंगे और आपके इस

सकारात्मक पहल से राज्य की करोड़ों जनता की भावना का कद्र होगा और सभी लोग

व्यवहारिक सामाजिक दूरी रखते हुए दुर्गापूजा का पर्व परिवार एवं प्रदेशवासी के साथ

मिलकर मना सकेंगे।


 

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