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शिक्षा विभाग के बाबुओं के चलते शिक्षक की टूट गई सांस डोर, नहीं मिली पेंशन




साहिबगंज:  शिक्षा विभाग का विवादों से चोली दामन का संबंध रहा है। इसी क्रम में विभाग से एक




और मामला जुड़ गया है।सेवानिवृत्त शिक्षक का पेंशन भुगतान नहीं करने, और इस परेशानी से

शिक्षक का निधन हो जाने का मामला धीरे धीरे शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

मामले को लेकर शिक्षा विभाग का माहौल भी गरमाने लगा है। मामले की जांच करने उपायुक्त

रामनिवास यादव भी डीएसई कार्यालय पहुंच चुके हैं। इसी क्रम में आरोपित लिपिकों की निलंबित

करने के लिए ससमय संचिका उपलब्ध नहीं कराने के आरोप में डीएसई के प्रधान सहायक चांद

हांसदा को उपायुक्त द्वारा निलंबित भी कर दिया गया है, लेकिन मामले के दोनों आरोपित लिपिकों

के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। .और पेंशन के इंतजार में शिक्षक की टूट गई सांस

की डोर पेंशन के इंतजार में सेवानिवृत्त शिक्षक की आखिरकार सांसे टूट गई। मामला यहां जाकर

भी नहीं रुका। इसके बाद भी मृतक शिक्षक की पत्नी को भी अब तक पेंशन नसीब नहीं हो सका है।

दरअसल शहर के शांति नगर मोहल्ला निवासी अश्वनी मिश्रा बीते 31 जनवरी 2019 को तालझारी

अंचल अंतर्गत मिडिल स्कूल महाराजपुर से सहायक शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सरकार

के कड़े निर्देश के बाद भी सेवानिवृत्त शिक्षक को सेवानिवृत्ति के कई माह तक विभाग द्वारा पेंशन

शुरू नहीं किया गया। आवेदन देने और कई बार डीएसई कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद उनको

जानकारी मिली कि उनका वेतन का फिक्सेशन नहीं किए जाने के चलते उनको पेंशन का लाभ नहीं

मिल पा रहा है। दरअसल सरकारी नियमानुसार वर्ष 1914 में ही शिक्षक अश्वनी मिश्रा को 4200

वेतनमान ग्रेड से 4600 के वेतनमान ग्रेड में प्रोन्नति दी जानी थी,

शिक्षा विभाग द्वारा उनको इस वेतनमान का लाभ

लेकिन विभाग द्वारा उनको इस वेतनमान का लाभ से वंचित कर दिया गया था। शिक्षक अश्वनी




मिश्रा के परिजनों का आरोप है कि उस समय कार्यालय के लिपिकों के द्वारा पे फिक्सेशन के नाम

पर नजराना की मांग की गई थी, जो नहीं दिए जाने पर उनका पे-फिक्सेशन नहीं किया गया। इसके

चलते सेवानिवृत्ति के बाद उनका पेंशन प्रभावित हो गया। कागजी लफरो की पेंच मे फंसे पेंशन पाने

के इंतजार में डीएसई कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते आखिरकार शिक्षक अश्वनी मिश्रा की

सितंबर 2020 में निधन हो गया। इसके बाद भी डीएससी कार्यालय के बाबुओं की कान पर जूं नहीं

रेंगी। पेंशन के लिए मृतक शिक्षक की पत्नी अनीता झा के द्वारा शिक्षा विभाग को आवेदन दिया

गया, लेकिन यहां भी बात नहीं बनी। जो पेंशन बुक बंद कर आया उस पर पत्नी अनीता झा के स्थान

पर उसके स्वर्गवासी पति अश्वनी मिश्रा का नाम है अंकित कर दिया गया था, जिसके चलते हैं फिर

से पत्नी भी पेंशन के लाभ से वंचित रही। यहां अनीता झा के परिजनों का आरोप है कि पेंशन का

लाभ देने के नाम पर चढ़ावा नहीं देने के चलते ही कार्यालय के बाबुओं द्वारा जानबूझकर यह

करामात की गई ताकि उन लोगों को परेशानी झेलनी पड़े। हालांकि कार्यालय के आरोपित बाबुओं ने

इससे इनकार किया और कहा कि यह महालेखाकार विभाग की गलती थी, इसे सुधारने के लिए रांची

भेजा गया है। मामला चाहे जो भी हो लेकिन पेंशन के अभाव में जहां सेवानिवृत्त शिक्षक अश्वनी

मिश्रा का निधन हो गया, वही अब उनके परिजनों का भी आर्थिक रूप से हाल बेहाल है। पेंशन की

चाहत और डीएसई कार्यालय के दोषी लिपिकों पर कार्रवाई के लिए मृतक शिक्षक की पत्नी और बेटे

अब न्याय के लिए डीसी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। परिजनों को पूर्ण विश्वास है कि उपायुक्त

स्तर से जल्द ही उन लोगों को न्याय मिलेगी।



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