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डीएसपी देविंदर सिंह की गिरफ्तारी से कई सवाल सुलगे

  • अफजल के परिवार को उम्मीद शायद अब खुलेगा असली राज

  • संसद हमले के समय से लगातार आरोपों में था नाम

  • पुलवामा हमले के दौरान कई बार आरोप भी लगे

  • आतंकवादियों के साथ क्यों दिल्ली जा रहा था

विशेष प्रतिनिधि

श्रीनगरः डीएसपी देविंदर सिंह की गिरफ्तारी ने एक साथ कई सवाल

खड़े कर दिये हैं। देविंदर का नाम अफजल गुरु ने भी लिया था। लेकिन

तब एक आतंकवादी का बयान समझकर उसे नजरअंदाज कर दिया

गया था। अब अफजल गुरु को फांसी पर लटकाये जाने के बाद उसके

परिवार के लोगों को उम्मीद है कि असली राज शायद अब देविंदर के

खिलाफ होने वाली जांच से खुलेगा। कश्मीर के कुलगाम के एक इलाके

से तीन आतंकवादियों के साथ कश्मीर के इस राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त

डीएसपी को गिरफ्तार किया गया है। तीनों आतंकवादियों की पहचान

भी हो चुकी है। उनके पास से हथियार और काफी पैसे भी बरामद किये

गये हैं। अब यह सभी लोग किस मकसद से दिल्ली जा रहे थे, इसका

पता चलना बाकी है। दूसरी तरफ अफजल गुरु के भाई का अब भी दावा

है कि देविंदर के मामले की सही जांच अगर हुई तो यह साफ हो जाएगा

कि उसका भाई बेकसूर था। संसद पर हुए हमले के मामले में अफजल

गुरु ने अपने वकील को लिखे एक पत्र में बताया था कि उसने देविंदर

के कहने पर ही एक व्यक्ति को दिल्ली में मकान किराये पर दिलाया

था। उस वक्त देविंदर स्पेशल ऑपरेशंस ग्रूप के साथ जुड़े हुए थे। यह

बाद में पता चला कि जिसे उन्होंने किराये पर घर दिलाया था वह

दरअसल पाकिस्तानी था। उस वक्त देविंदर के साथ एक अन्य पुलिस

अफसर शांति सिंह का नाम भी उछला था। अफजल के भाई यासीन

गुरु मानते हैं कि अब सही जांच हो तो दूध का दूध और पानी का पानी

हो जाएगा। कश्मीर से जुड़े कई अन्य लोग भी इस बात से अब सहमत

हैं कि उस वक्त देविंदर के खिलाफ अफजल गुरु के बयान को टाल

दिया गया था।

डीएसपी देविंदर आतंकवादियों के साथ पकड़ा गया

अब तीन आतंकवादियों के साथ दिल्ली आने के रास्ते में गिरफ्तार

होने के बाद संसद पर हमले से लेकर पुलवामा हमला तक उसकी

भूमिका की निश्चित तौर पर जांच होनी चाहिए। कश्मीर में देविंदर के

जानने वाले इस बात से कतई इंकार नहीं करते कि उसके खिलाफ तो

लगातार आरोप लगते आये हैं। इसके बाद भी सरकार ने इन तमाम

आरोपों की सच्चाई जानने का काम कभी नहीं किया था। वैसे वर्ष

2001 के संसद हमले में जिस बात की अनदेखी की गयी थी, उसमें

सबसे महत्वपूर्ण देविंदर सिंह के साथ आतंकवादियों के संबंध का ही

था। इस बीच पुलवामा में सीआरपी के काफिले पर हुए हमले के मामले

में भी उसी अफसर का नाम उछला था। अब कई संगठनों के प्रमुख

लोगों ने भी इस पर नये सिरे से सवाल उठाये हैं। जानकार बताते हैं कि

जम्मू कश्मीर के संवेदनशील इलाके में जिम्मेदार पदों पर रहने वाले

सभी अधिकारियों पर हमेशा ही अन्य सरकारी एजेंसियों की नजर

रहती है। इसके बाद भी आरोपों के घेरे में आया पुलिस अफसर अब

तक जांच से बाहर कैसे छूटता गया, यह अपने आप में बड़ी बात है।

जो आतंकवादी इस बार देविंदर सिंह के साथ पकड़े गये हैं, उनके बारे

में पुलिस को पहले से ही जानकारी थी। इसके बाद भी गिरफ्तारी के

वक्त देविंदर ने उन्हें पुलिस का जवान क्यों बताया, यह नया सवाल

उठ खड़ा हुआ है।

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