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पास नहीं आना, दूर नहीं जाना तुमको सौगंध हैं आज मोहब्बत बंद है

पास नहीं आना क्योंकि मास्क पर मुझे पूरा भरोसा नहीं है। अपने डाक्टर भी पता नहीं कब

क्या कह दें। पहले कहा कि यह ठेपी वाला मास्क अच्छा है। अब खुद स्वास्थ्य मंत्री ने कह

दिया कि नहीं यह ठीक नहीं है। इसलिए बहुत कनफूजिया गये हैं। जब कोई बात समझ में

नहीं आये तो चुपचाप बैठे रहने या किसी एक जगह पर टिके रहने ही समझदारी है। वइसे

हम कौन सर्फ की खरीददारी में समझदारी दिखाने निकले हैं तो हमेशा कुछ न कुछ करते

हुए नजर आना ही है। चुपचाप दम साधकर पड़े रहो ना। मौका मिला था तो तुरंत काबिल

बनने लगे, इधर से उधर मंडराने में बहुत मजा आ रहा था। अब देखों को कोई रोक टोक

नहीं है फिर भी सड़कों पर से भीड़ गायब होती जा रही है। समझदार लोग अच्छी तरह

समझ रहे हैं कि पास नहीं आना दूर नहीं जाना का असली मतलब क्या होता है। लेकिन

यह बात तो भारत चीन सीमा पर लागू नहीं हो सकती। कोरोना का संकट नहीं होता तो

करीब जाकर झांक आता कि वहां चल क्या रहा है। लेकिन चीन की इस चाल को अगर अब

भी हम नहीं समझे तो हम गलती करने जा रहे हैं। वह पहले से भी चार कदम चलकर तीन

कदम पीछे हटने के खेल में हमारी ढेर सारी जमीन हड़प चुका है। हम जब कमजोर थे तो

अलग बात थी। अब मौका बदला है तो तिब्बत से लेकर वह उस पूरी जमीन पर दावा

करना ही चाहिए तो प्राचीन भारतवर्ष में अखंड भारत का हिस्सा थे। जी हां उस वक्त

कैलाश पर्वत और मानसरोवर से काफी आगे तक भारत हुआ करता था।

अखंड भारत को हम भूल तो नहीं सकते

अखंड भारत की बात करें तो इराक से लेकर सिंगापुर से आगे तक का इलाका था। हम

पीछे हटे तो भाई लोग पसरते चले गये हैं। अब सबको औकात में लाने के लिए चीन से

अच्छा उदाहरण कोई हो नहीं सकता है। लेकिन इसी कोरोना संकट की मजबूरियों की

वजह से एक पुरानी फिल्म का गीत याद आ रहा है। वर्ष 1974 में बनी फिल्म आप की

कसम अपने जमाने की सुपरहिट फिल्म थी। इस गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने और

संगीत में ढाला था आर डी वर्मन ने। इसे स्वर दिया था किशोर कुमार और आशा भोंसले ने

जबकि फिल्मी पर्दे पर इस गीत में राजेश खन्ना और मुमताज नजर आये थे। गीत के

बोल कुछ इस तरह थे।

पास नहीं आना दूर नहीं जाना

पास नहीं आना दूर नहीं जाना

तुम को सौगन्ध है के आज मोहब्बत बंद है

पास नहीं आना दूर नहीं जाना

तुम को सौगन्ध है के आज मोहब्बत बंद है

पहेले तू आग भड़कती है

फिर दिल की प्यास तू बुझाती है

हे पहेले तू आग भड़कती है

फिर दिल की प्यास तू बुझाती है

तेरी यही अदा तो मुझ को पसंद है

अच्छा हाँ हाँ मगर आज मोहब्बत बंद है

पास नहीं आना दूर नहीं जाना

के आज मोहब्बत बंद है
कितना कितना मज़ा है ऐसे जीने में
धक् धक् भी होती नहीं सीने में
कितना कितना मज़ा है ऐसे जीने में
धक् धक् भी होती नहीं सीने में
कोई बेचैनी नहीं कितना आनंद है
पास नहीं आना दूर नहीं जाना
के आज मोहब्बत बंद है
मत छेड़ अपने दीवाने को
रेहने दे तू इस बहाने को
मत छेड़ अपने दीवाने को
रेहने दे तू इस बहाने को
होठों पे ना है मगर दिल तो रज़ामंद है
रज़ामंद है मगर आज मोहब्बत बंद है
पास नहीं आना दूर नहीं जाना
तुम को सौगन्ध है के आज मोहब्बत बंद है

इसलिए भाई लोग सौंगंध है कि शरीर से दूरी और दिलों से नजदीकी बनाये रखिये। वरना

चीन को फिर से यह गलतफहमी हो जाएगी कि उसकी पुरानी चाल कामयाब हो सकती है।

अब इंटरनेशलन से लोकल पॉलिटिक्स पर चिंतन मनन कर लेते हैं।

भौतिकतावादी युग में एक ही झटके में प्रकृति का कहर कैसा हो सकता है, ई तो बूझा गया

है। एक ही झटके में बड़े बड़े तुर्रम खां एक ही झटके में घिस्सू लाल हो गये और उन्हें

जिसने मारा, वह नजर भी नहीं आता। वइसे इस कोरोना से एक और कनफ्यूजन पैदा

किया है कि कहीं अइसा तो नहीं कि ढेर सारे अंधे मिलकर एक हाथी को समझने की

कोशिश कर रहे हैं। बाद में पता चलेगा कि अरे इसका ईलाज तो इतना आसान था और

हमारे ईर्द गिर्द ही था। वायरस, प्रोटिन, ट्रांसमिशन, प्लाज्मा, वैक्सिन कितना कुछ इस

दौर में सीख गये लेकिन जिसकी वजह से सीखे उसे तो वैज्ञानिक भी आज तक सही तरीके

से समझ नहीं पाये हैं तो हम कउन खेत के मूली हैं।


 

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