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नैनों की बात मत मानियो नैना ठग लेंगे

नैनों की बात यानी जो आंखों से दिखता है, उसे एकाएक ही सच नहीं मान

लेना चाहिए। कई बार इस आंख से दिमाग के कनेक्शन पर धोखा भी हो

जाता है। झारखंड में चुनाव की घोषणा हो गयी है। हर कोई एक दूसरे को

अब चुनावी जागरुकता का पाठ पढ़ाने वाला है। ऐसे में अगर मैं भी थोड़ा

सा प्रवचन दे लूं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। वैसे भी आम आदमी इनदिनों

अपनी मोबाइल पर इस किस्म का चुनावी प्रवचन सुन ही रहा होगा।

तो मुद्दे की बात पर आ जाते हैं। आज के दौर की प्रचलित कहावत है

कि जो दिखता है वह बिकता है। यानी माल बेचने का एक तरीका उसे

अच्छे से दिखाना भी होता है। इसीलिए तो कहता हूं यारों कि जो कुछ

दिखाया जा रहा है, उसपर पूरी तरीके से यकीन कर लेने की कोई जरूरत

नहीं है। हो सकता है कि आपको माल बेचने के चक्कर में रद्दी माल भी

अच्छी पैकिंग में ड़ालकर बेचा जा रहा है।

माल को खोलकर ठोंक बजाकर देख लो कि कितना दम है

अभी हाल ही में एक अजीब वाकया पश्चिम बंगाल से सुनने को मिला था।

वहां के एक सांसद ने ऑनलाइन पर एक मोबाइल खरीदी थी।

जब पैकेट घर पहुंचा और उसे खोला गया तो उसमें दो पत्थऱ भरे हुए मिले।

बेचारे सांसद महोदय भागे भागे पुलिस के पास गये। चूंकि वह सांसद का

मामला था तो पुलिस तुरंत एक्टिव हो गयी। आनन फानन में कूरियर

सर्विस के उस व्यक्ति को पकड़ा गया जिसके पास यह मोबाइल बरामद हुई।

यानी सांसद को भी पैंकिंग देखकर जरा सा भी एहसास नहीं हुआ था कि

अंदर का माल गड़बड़ी है। इसलिए अब सिर्फ देखकर भरोसा करने का

जमाना नहीं है। पांच साल की सेवा का सवाल है बच्चा, इसलिए

सोच समझकर फैसला लेना।

फिल्म ओमकारा हाल के दिनों की फिल्म है। इस फिल्म की चर्चा कई

कारणों से हुई थी। उनमें से एक चर्चा तो सैफ अली खान के बदले स्वरुप

के अभिनय को लेकर भी था। फिल्म में काफी मसाला भी था और

आइटम सांग भी। लेकिन जिस गीत की याद आ रही है, उसे गुलजार ने

लिखा था और संगीत में ढाला था विशाल भारद्वाज ।

इसे स्वर दिया था उस्ताद राहत फतेह अली खान ने। यूं तो इस गीत

के बोल हिन्दी में थे लेकिन उनका उच्चारण राजस्थानी अंदाज में

हुआ था। इस गीत को आज भी पसंद किया जाता है। गीत के बोल कुछ

इस तरह हैं।

नैनों की मत माणियो

नैनों की मत माणियो
नैना ठग लेंगे
जगते जादू फूकेंगे रे
जगते-जगते जादू
नींद बंजर कर देंगे
नैना ठग लेंगे

भला मंदा देखे णा, पराया ना, सगा रे
नैनों को तो डसने का चस्का लगा रे
नैनों का ज़हर नशीला रे
बादलों में सतरंगियाँ बोंवे, भोर तलक बरसावें
बादलों में सतरंगियाँ बोंवे, नैना बांवरा कर देंगे
नैना ठग लेंगे…

नैना रात को चलते-चलते, स्वर्गां में ले जावे
मेघ मल्हार के सपने बीजें, हरियाली दिखलावें
नैनों की ज़ुबान पे भरोसा नहीं आता
लिखत-पढ़त न, रसीद न खाता
सारी बात हवाई रे
बिण बादल बरसावें सावण, सावण बिण बरसातां
बिण बादल बरसावें सावण, नैना बांवरा कर देंगे
नैना ठग लेंगे…

दोबारा नहीं तिबारा से समझा रहा हूं कि नैना के रास्ते ठगने से खुद को

बचाइये। ठोंक ठठाकर देखिये कि अंदर के माल में कितना दम है।

हाल के दिनों में इधर से उधर डाल पर कूदने वाले इस बार भी भरोसे

के काबिल हैं या नहीं यह आप तय कीजिए। नहीं तो चार साल तक जिस

पार्टी को कोसते रहे अचानक वही प्यारा क्यों लगने लगा प्यारे।

कुछ तो और भी राज हो सकता है।

झारखंड में इस बार फिर से लोकसभा चुनाव जैसी ही मोर्चाबंदी है।

झारखंड की मोर्चाबंदी को देखिये मत अंदर से समझिये

इस मोर्चाबंदी में कौन कितने पानी में है और कितने गहरे पानी में

उतरा है, इसका पता चल जाएगा। आपकी जिम्मेदारी तो माल को

ठोंक बजाकर देखने की है। सिर्फ नैनों की बात पर भरोसा मत करियो।

वैसे भी देखने समझने पर भी पहरा लगा है। इसका खुलासा भी व्हाट्सएप

ने कर दिया है। यानी आपकी भी जासूसी फिर से हो रही है। मसलन आप

क्या कुछ सोशल मीडिया में कर रहे हैं, किन लोगों से बात कर रहे हैं या

क्या कुछ घूम फिर रहे हैं, हर कुछ किसी न किसी की नजर में है।

इसी एक मौके पर तो लगता है कि भाई मुकेश अंबानी और मैं इस मामले

में बराबर है। यानी उनका भी वोट एक और मेरा भी वोट एक। इस एक वोट

की बराबरी का हक अदा करना भी आपकी जिम्मेदारी है। सोच समझकर

नहीं दिया तो अगले पांच साल तक सिर्फ अपने आप को ही कोसते रहियेगा।

कमर कसकर तैयार रहिये और आंख के साथ साथ दिमाग से भी ताकते-

झांकते रहिये ताकि नैनो से कोई आपको ठग नहीं ले।

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